100% टैरिफ से कितना महंगा हो जाएगा विदेश से आने वाला सामान? समझें आयात शुल्क के बोझ का पूरा गणित

अमेरिका ने हाल ही में एक विधेयक को मंजूरी दी है जिसके तहत भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे पांच देशों से आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लग सकता है. वहीं, अब सवाल ये है कि जब भी किसी प्रोडक्ट पर टैरिफ लगता है तो फिर उसकी कीमत कैसे बढ़ जाती है और उसे कौन चुकाता है?

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अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के भारी बहुमत से एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है. प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और रूस की तेल से होने वाली कमाई को प्रभावित करना है. लेकिन अगर ऐसा टैरिफ लागू होता है तो इससे अमेरिकी बाजारों में इंपोर्टेड सामान की कीमतों में काफी बदलाव आ सकता है. वहीं, अब सवाल ये है कि आखिर टैरिफ लगने से किसी प्रोडक्ट की कीमत कैस बढ़ जाती है और इसे कौन चुकाता है? तो चलिए जानते हैं इसके पीछे का पूरा गणित.

क्या है 100% टैरिफ का मतलब?

100% टैरिफ का सीधा मतलब है कि किसी दूसरे देश से आने वाले सामान पर उसकी आयात कीमत के बराबर शुल्क लगाया जाएगा. चलिए अब इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए चीन से एक इलेक्ट्रिक कार अमेरिका आती है और उसकी इंपोर्ट वैल्यू $40,000 है. अगर उस पर 100% टैरिफ लागू होता है, तो इंपोर्टर को $40,000 अतिरिक्त शुल्क और देना होगा.

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  • कार की आयात कीमत: $40,000
  • 100% टैरिफ: $40,000
  • टैरिफ जुड़ने के बाद लागत: $80,000

यानी 100% टैरिफ लगने पर आयातक के लिए किसी प्रोडक्ट की शुरुआती लागत लगभग दोगुनी हो जाती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को शोरूम में कार ठीक $80,000 में ही मिलेगी. आखिरी कीमत में शिपिंग, डीलर का मार्जिन, फाइनेंसिंग खर्च और अन्य टैक्स और शुल्क भी शामिल हो सकते हैं.

टैरिफ क्या हैं और ये कैसे काम करते हैं?

BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ आयातित सामान पर लगने वाले टैक्स होते हैं. आमतौर पर, यह शुल्क सामान की कीमत का एक प्रतिशत होता है. उदाहरण के लिए, $10 के उत्पाद पर 10% टैरिफ का मतलब है कि उस पर $1 का अतिरिक्त टैक्स लगेगा जिससे कुल कीमत $11 हो जाएगी. यह टैक्स विदेशी उत्पादों को लाने वाली कंपनियां सरकार को देती हैं. ये कंपनियां अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा या पूरी लागत अपने ग्राहकों पर भी डाल सकती हैं. इस मामले में ग्राहक अमेरिकी उपभोक्ता और अन्य अमेरिकी व्यवसाय हैं. इतना ही नहीं कंपनियां कम सामान आयात करने का फैसला भी ले सकती हैं.

भारतीय एक्सपोर्टर्स पर क्या होगा 100% टैरिफ का असर?

अगर अमेरिका भारतीय सामान पर 100% तक टैरिफ लगाता है, तो इसका सीधा असर भारत से अमेरिका को सामान भेजने वाली कंपनियों पर पड़ सकता है. टैरिफ बढ़ने से भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा और दूसरे तैयार सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे. ऐसे में अमेरिकी खरीदार भारतीय कंपनियों से कम सामान खरीद सकते हैं और उनकी जगह उन देशों से खरीदारी कर सकते हैं, जहां से सामान पर कम टैरिफ लगता है. इसका असर भारतीय एक्सपोर्टर्स के कारोबार पर भी पड़ सकता है. अगर लंबे समय तक ऐसा चलता है, तो उत्पादन कम होने के साथ-साथ रोजगार पर भी इसका असर साफ तौर पर दिखाई देगा.

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हालांकि, कितना नुकसान होगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका आखिर में कितना टैरिफ लगाता है, किन सामानों को इसके दायरे में रखा जाता है और क्या भारत को किसी तरह की छूट या दूसरी व्यापारिक व्यवस्था मिलती है या नहीं.

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टैरिफ कौन चुकाता है?

अक्सर लोग मानते हैं कि टैरिफ का पैसा सामान भेजने वाला देश देता है. लेकिन ऐसा नहीं है. जब कोई सामान अमेरिका पहुंचता है, तो वहां का आयातक (Importer) अमेरिकी सरकार को टैरिफ चुकाता है. इसके बाद आयातक के पास कुछ विकल्प होते हैं. वह इस अतिरिक्त खर्च को खुद उठा सकता है, विदेशी कंपनी से कम कीमत पर सामान खरीदने के लिए बात कर सकता है या फिर सामान की कीमत बढ़ाकर यह खर्च ग्राहकों से भी वसूल सकता है.

मान लीजिए किसी सामान की कीमत 20,000 डॉलर है और उस पर 20,000 डॉलर का टैरिफ लग गया. ऐसे में आयातक की लागत सीधे 40,000 डॉलर हो जाएगी. अगर इसमें दूसरे खर्च और 15,000 डॉलर का मुनाफा भी जोड़ दिया जाए, तो उस सामान की कीमत ग्राहक के लिए करीब 55,000 डॉलर तक पहुंच सकती है. यानी आयातक सरकार को टैरिफ देता है, लेकिन उसका बोझ आखिरकार कंपनियों या ग्राहकों पर पड़ सकता है.

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ट्रंप टैरिफ का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?

ट्रंप का मानना है कि टैरिफ लगाने से अमेरिकी सरकार की कमाई बढ़ेगी. साथ ही, लोग विदेशों से आने वाले सामान की जगह अमेरिका में बने सामान खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे. उनका यह भी मानना है कि इससे विदेशी कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्रियां और कारोबार लगाने के लिए ज्यादा निवेश करेंगी. ट्रंप का यह भी कहना है कि लंबे समय से चले आ रहे फ्री ट्रेड डील्स की वजह से कई अमेरिकी फैक्ट्रियां और औद्योगिक नौकरियां दूसरे देशों में चली गई हैं. इसका असर अमेरिका के कई इलाकों की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. इसके अलावा, ट्रंप अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट भी कम करना चाहते हैं.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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