ईरान को कमजोर समझना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अब बड़ी गलती साबित हो रहा है. इजरायल और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में कूदना अमेरिका के लिए गले की फांस बन गया है, जिससे ट्रंप को चाहकर भी छुटकारा नहीं मिल पा रहा है. परमाणु हथियारों के खिलाफ शुरू हुआ संघर्ष अब होर्मुज पर आकर टिक गया है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान का खतरा भी लगातार सता रहा है, हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने हर किसी को हैरान कर दिया. बताया जा रहा है कि तुर्किये में डोनाल्ड ट्रंप पर हमले का इनपुट था, जिसके बाद उन्होंने कई विमानों को बदलकर व्हाइट हाउस तक का सुरक्षित सफर तय किया.
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले महीने तुर्किये से लौटते समय सुरक्षा कारणों से चुपके से विमान बदलने की बात सामने आई है. हैरानी की बात तो ये है कि ट्रंप ने तो विमान बदल लिया लेकिन विदेश मंत्री मार्को रूबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट उसी ‘एअर फोर्स वन’ विमान में बैठे रहे, जिससे दुश्मन को ऐसा लगे कि ट्रंप भी उसी प्लेन में सवार हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा सबसे जरूरी
अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि रूबियो को विमान बदले जाने और इसके पीछे के खतरे की जानकारी थी. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि खतरे की जानकारी मिलन के बाद भी रूबियो विमान में क्यों बैठे रहे? अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले इंतजाम मंत्रिमंडल के टॉप नेताओं की सुरक्षा से कहीं अधिक जरूरी होता है. खासकर ऐसे राष्ट्रपति के लिए सुरक्षा इंतजाम और कड़े होते हैं जिनकी हत्या के पूर्व में कई प्रयास हो चुके हैं.
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ट्रंप पर Heat Seeking Missile से हमले का खतरा
तुर्किये दौरे के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसी को इनपुट मिली कि डोनाल्ड ट्रंप के एयरफोर्स वन पर शोल्डर फायर्ड मिसाइल से हमला किया जा सकता है. हमले को सटीक बनाने के लिए ‘हीट सीकिंग मिसाइल’ फायर की जा सकती है, जो अपने दुश्मन का पीछा करके मारती है. यह एक लेटेस्ट टेक्नोलॉजी मिसाइल है, जो अपने टार्गेट से निकलने वाली गर्मी (Infrared radiation) को पहचानकर उसका पीछा करती है. इसे आमतौर पर इन्फ्रारेड-गाइडेड मिसाइल भी कहा जाता है.
कैसे काम करती है ‘हीट सीकिंग मिसाइल’?
जैसा कि आपको मालूम होगा, विमान के इंजन और एग्जॉस्ट से काफी गर्मी पैदा होती है. यह गर्मी इन्फ्रारेड रेडिएशन के रूप में बाहर निकलती है. मिसाइल के सिरे पर लगा सेंसर इसी गर्मी को पकड़ता है. सेंसर लगातार यह पता लगाता है कि गर्मी का सोर्स किस दिशा में है और मिसाइल भी टार्गेट के पीछे उसी की दिशा में रास्ता बदलती है. जब मिसाइल टार्गेट के बिल्कुल करीब होती है तो धमाका हो जाता है. यह मिसाइल अचानक से कहीं से भी आ सकती है, इसका पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि इसमें डिटेक्ट की जाने वाली रेडियो तरंगें नहीं होतीं.
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