Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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भारत में हर साल आयोजित होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET-UG) किसी न किसी वजह से अक्सर चर्चा और विवादों में घिरी रहती है. पेपर लीक के दावों से लेकर परीक्षा केंद्रों पर देरी से पहुंचने के कारण छात्रों को एंट्री न मिलने और उनके रोने-बिलखने की तस्वीरें हर साल सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं. इस बीच, सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है. इंटरनेट यूजर्स भारत की नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से मांग कर रहे हैं कि देश की बड़ी परीक्षाओं में दक्षिण कोरिया के परीक्षा नियमों को लागू किया जाए.
दक्षिण कोरिया में ‘सुनेओंग’ (कॉलेज स्कोलास्टिक एबिलिटी टेस्ट – CSAT) वहां की सबसे अहम और कठिन परीक्षाओं में से एक है. यह परीक्षा न केवल छात्रों का कॉलेज तय करती है, बल्कि उनके भविष्य, करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी आकार देती है. इसे वहां ‘जीवन बदलने वाली परीक्षा’ माना जाता है. यही वजह है कि इस परीक्षा के दिन पूरा दक्षिण कोरिया अपने छात्रों की सहूलियत के लिए थम सा जाता है.
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भारत में अक्सर देखा जाता है कि ट्रैफिक जाम या किसी अन्य मजबूरी के कारण अगर कोई छात्र नीट या किसी बड़ी परीक्षा के केंद्र पर महज 5 मिनट भी देरी से पहुंचता है, तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलती. छात्र और उनके अभिभावक गेट पर मिन्नतें करते रह जाते हैं. इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया की ‘सुनेओंग’ परीक्षा के दौरान सरकार और समाज मिलकर छात्रों की मदद करते हैं.
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भारतीय इंटरनेट यूजर्स का तर्क है कि भारत में नीट, जेईई (JEE) और यूपीएससी (UPSC) जैसी परीक्षाओं का दबाव भी छात्रों पर उतना ही होता है, जितना दक्षिण कोरिया में सुनेओंग का. लेकिन भारत में परीक्षा व्यवस्था अक्सर छात्रों के प्रति सहानुभूति रखने के बजाय बेहद कठोर नजर आती है. सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि भारत सरकार और एनटीए को भी ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जहां प्रशासन छात्रों को ‘अपराधी’ या ‘लापरवाह’ समझने के बजाय उनकी यात्रा और मानसिक शांति में मदद करे. परीक्षा के दिनों में ट्रैफिक मैनेजमेंट को दुरुस्त करना, आपातकालीन स्थिति में छात्रों को पुलिस सहायता मिलना और परीक्षा केंद्रों के आस-पास शोर-शराबे पर रोक लगाना जैसे कदम भारत में भी उठाए जा सकते हैं.
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