केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 6 के छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर आई है. अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया है कि मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों पर अभी थ्री लैंग्वेज पॉलिसी सख्ती से लागू नहीं की जाएगी. उन्हें भी कक्षा 7 के छात्रों की तरह इस नीति से छूट दी जाएगी.
दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब नए शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 के छात्रों पर तीन भाषाओं की अनिवार्यता लागू की गई. याचिकाकर्ताओं और कई स्कूलों ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि कई बच्चे पहले से अपनी पसंद की दूसरी भाषाएं पढ़ते आ रहे हैं. सत्र के बीच में अचानक उन पर नई या तीसरी भाषा चुनने का दबाव बनाना उनकी पढ़ाई को प्रभावित करेगा.
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अनावश्यक परेशानी में न डालें बच्चे: सुप्रीम कोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के मानसिक दबाव और शैक्षणिक संतुलन को सर्वोपरि माना. कोर्ट ने साफ कहा कि विद्यार्थियों को बेवजह किसी तरह की परेशानी या कठिनाई में डालने के बजाय उन्हें सुविधा और समय मिलना चाहिए. सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पक्ष रखा गया कि लगभग 99 फीसदी स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी हो चुकी है और केवल करीब 1.2 फीसदी स्कूलों में ही कुछ दिक्कतें हैं. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा बैच के बच्चों को कक्षा 7 के विद्यार्थियों के समान ही छूट मिलनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त तनाव के अपनी नियमित पढ़ाई जारी रख सकें.
क्या है थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का विवाद?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के तहत सीबीएसई ने कक्षा 6 से तीन भाषाओं (R1, R2 और R3) का फॉर्मूला तय किया है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ना जरूरी किया गया था. इसी नियम को वर्तमान सत्र में तुरंत अनिवार्य करने पर विरोध शुरू हुआ था, याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बच्चे कक्षा 4 से ही अपनी पसंद की भाषाएं पढ़ रहे हैं. ऐसे में सत्र के बीच में अचानक तीसरी भाषा बदलने से पढ़ाई प्रभावित होगी, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश आया है.
सरकार की दलील बनाम कोर्ट का रुख
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि 99% स्कूलों में तैयारी पूरी है और 2,800 में से महज 1.2% स्कूलों में ही दिक्कत है, इसलिए छूट न दी जाए. हालांकि, बेंच ने बच्चों के हित को सर्वोपरि रखा. सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अदालत बच्चों को परेशानी में डालने के बजाय सुविधा देना चाहती है. याचिकाकर्ताओं ने यह भी उठाया कि वेबसाइट पर ऑनलाइन किताबें होना और बच्चों के हाथों में असली किताबें होने में बड़ा फर्क है. जमीनी स्तर पर R3 किताबों की उपलब्धता पूरी नहीं है.
छात्रों के लिए अब आगे क्या?
यह राहत केवल मौजूदा कक्षा 6 के बैच के लिए है, नीति पूरी तरह रद्द नहीं हुई है. मामले की अगली सुनवाई 6 सप्ताह बाद होगी, जिसमें पक्षों को जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है. नई व्यवस्था पर आगे 1 अप्रैल 2027 से विचार हो सकता है, जिससे छात्रों को तैयारी का पूरा समय मिल सके.