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मुंबई से साइबर धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है. ठाकुरद्वार इलाके में 85 वर्षीय बुजुर्ग से जालसाजों ने करीब 9 करोड़ रुपये ठग लिए. जालसाजों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया था. उन्होंने बुजुर्ग को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा. बुजुर्ग पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग का झूठा आरोप लगाया. इसके बाद बुजुर्ग को कई बैंक अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया. पीड़ित बुजुर्ग अपनी बड़ी बेटी के साथ रहते हैं, जबकि छोटी बेटी अमेरिका में रहती है.

कॉल कर खुद को बताया इंस्पेक्टर

28 नवंबर 2025 को बुजुर्ग के मोबाइल पर एक कॉल आई. फोन करने वाले ने खुद को नासिक के पंचवटी पुलिस स्टेशन का इंस्पेक्टर दीपक शर्मा बताया. उसने बताया कि आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर उनके नाम पर एक बैंक अकाउंट खोला गया. साथ ही बताया कि उस अकाउंट का यूज बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा है. इसके अलावा, कॉल करने वाले ने कहा कि इस अकाउंट से ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (PFI) जैसे प्रतिबंधित संगठन को पैसे भेजे गए हैं.

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जालसाज ने यह भी कहा कि सीबीआई क्राइम ब्रांच और एक विशेष जांच दल (SIT) मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा.

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ऐसे किया ‘डिजिटल अरेस्ट’

फिर बुजुर्ग को व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आई. पुलिस की वर्दी पहने कॉलर ने उन्हें भरोसा दिया कि यदि वह जांच में सहयोग करते हैं, तो असली अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. जालसाजों ने यह भी कहा कि उन्हें पुलिस स्टेशन आने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ‘डिजिटल इंडिया’ के तहत ऑनलाइन जांच चल रही है. पीड़ित को बताया गया कि वह अब ‘डिजिटल अरेस्ट’ हैं और इसके बारे में किसी भी रिश्तेदार को नहीं बता सकते. डर और मानसिक दबाव में आकर बुजुर्ग ने अपनी बैंक डिटेल्स, बैंक अकाउंट्स में जमा राशि और म्यूचुअल फंड, शेयर मार्केट निवेश और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ी सारी जानकारी शेयर कर दी.

उनसे कहा गया कि इस केस से बाहर निकलने के लिए म्यूचुअल फंड, शेयर मार्केट और फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश की गई पूरी रकम कोर्ट में जमा करनी होगी. यह रकम जांच पूरी होने के बाद ब्याज सहित वापस कर दी जाएगी. इसी डर से पीड़ित ने अपने निवेश भुना लिए. 1 दिसंबर से 17 दिसंबर 2025 के बीच बुजुर्ग ने कई बैंक अकाउंट्स में कुल 9 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए.

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3 करोड़ और मांगे तो खुली पोल

बैंक कर्मचारी की सूझबूझ से यह पूरा मामला सामने आया है. 22 दिसंबर 2025 को जालसाजों ने पीड़ित से दूसरे खाते में 3 करोड़ रुपये और ट्रांसफर करने को कहा. जब बुजुर्ग बैंक ऑफ इंडिया की गिरगांव ब्रांच में गए, तो बैंक कर्मचारियों ने ट्रांजेक्शन रोक दी और अपने रिश्तेदारों को बुलाने के लिए कहा. इसके बाद पूरे परिवार को इस धोखाधड़ी का पता चला. फिर पीड़ित ने साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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First published on: Dec 24, 2025 05:16 PM

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