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RBI का बड़ा फैसला, अब अनिवासी भारतीयों को मिलेगा बैंक जमा पर ज्यादा ब्याज; जानिए आपकी जेब पर क्या होगा असर

आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई एनआरआई अपने नॉन-रेसिडेंट ऑर्डिनरी (NRO) अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करके NRE अकाउंट में डालता है, तो उसे इस बढ़ी हुई ब्याज दर का फायदा नहीं मिलेगा। यह नियम सिर्फ विदेशों से आने वाले नए फंड या वैध रिन्यूअल पर ही लागू होगा।

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश में विदेशी फंड (विदेशी मुद्रा) के प्रवाह को बढ़ाने और रुपये को मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने अनिवासी भारतीयों (NRIs) के चुनिंदा बैंक डिपॉजिट पर ब्याज दरों की ऊपरी सीमा (Rate Caps) को अस्थायी रूप से हटा दिया है। इस फैसले के बाद अब भारतीय बैंक विदेशों में रहने वाले भारतीयों को आकर्षित करने के लिए अपनी मर्जी से ज्यादा ब्याज दरों का ऑफर दे सकेंगे।

आरबीआई का यह नया नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और आगामी 30 सितंबर तक लागू रहेगा।

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क्या बदलाव हुआ है?

अब तक भारतीय बैंकों पर यह नियम था कि वे एनआरआई डिपॉजिट पर एक तय सीमा से ज्यादा ब्याज नहीं दे सकते थे। लेकिन अब नियमों में ढील मिलने के बाद 3 साल या उससे ज्यादा समय (मच्योरिटी) के लिए जमा किए जाने वाले नए नॉन-रेसिडेंट एक्सटर्नल (NRE) डिपॉजिट पर बैंक अब घरेलू जमा से भी ज्यादा ब्याज ऑफर कर सकेंगे। 3 से 5 साल की अवधि वाले नए फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट पर भी ब्याज दरों की तय सीमा हटा ली गई है। यह छूट इस अवधि के दौरान खुलने वाले नए खातों और मैच्योर होने वाले पुराने खातों के रिन्यूअल (Eligible Renewals) दोनों पर लागू होगी।

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डॉलर जमा पर मिलने लगा 7% तक ब्याज
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले के बाद बैंकों के बीच एनआरआई फंड जुटाने के लिए कॉम्पिटिशन (प्रतिस्पर्धा) बढ़ेगा। खासकर छोटे और प्राइवेट बैंक, बड़े बैंकों के मुकाबले ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दरें देंगे।

इसकी शुरुआत भी हो चुकी है; कई बैंकों ने अमेरिकी डॉलर में जमा होने वाले FCNR(B) डिपॉजिट पर ब्याज दरों को पहले के 3% से बढ़ाकर सीधे 6% से 7% तक कर दिया है। आने वाले दिनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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RBI ने क्यों लिया यह फैसला?
दुनिया भर के बाजारों में चल रहे उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भारतीय रुपये पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रिजर्व बैंक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मजबूत करना चाहता है। इस छूट के जरिए आरबीआई चाहता है कि अनिवासी भारतीय (NRIs) और ओवरसीज सिटीजन्स ऑफ इंडिया (OCIs) अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा भारतीय बैंकों में जमा करें। केंद्रीय बैंक ने यह भी साफ किया है कि 30 सितंबर तक आने वाले इस फंड पर करेंसी के उतार-चढ़ाव के जोखिम (Hedging Cost) का पूरा खर्च एक स्पेशल स्वैप फैसिलिटी के जरिए खुद आरबीआई उठाएगा, जिससे बैंकों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

इस नियम पर रहेगी पाबंदी
आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई एनआरआई अपने नॉन-रेसिडेंट ऑर्डिनरी (NRO) अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करके NRE अकाउंट में डालता है, तो उसे इस बढ़ी हुई ब्याज दर का फायदा नहीं मिलेगा। यह नियम सिर्फ विदेशों से आने वाले नए फंड या वैध रिन्यूअल पर ही लागू होगा।

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बैंकरों का मानना है कि इस कदम से आने वाले महीनों में भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अरबों डॉलर आ सकते हैं, जिससे देश के बाजारों में कैश (लिक्विडिटी) बढ़ेगी और घरेलू लोन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

First published on: Jun 18, 2026 03:18 PM

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