अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हर महीने देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु करोड़ों रुपये का चढ़ावा चढ़ाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रामलला के चरणों में अर्पित होने वाले इन नोटों और सिक्कों की गिनती कौन करता है? दान पेटी को खोलने से लेकर बैंक में पैसा जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया किसकी कस्टडी में होती है? हाल ही में सोशल मीडिया पर चढ़ावे को लेकर उठी कुछ चर्चाओं के बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस पूरे पारदर्शी सिस्टम की जानकारी साझा की है। आइए, जानते हैं राम मंदिर के खजाने का पूरा गणित।
हर महीने आता है करोड़ों का चढ़ावा, ये हैं दान के माध्यम

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रामलला के दर्शन के लिए रोजाना हजारों भक्तों का तांता लगा रहता है, जिससे मंदिर को भारी मात्रा में दान मिलता है। श्रद्धालु मंदिर परिसर में रखी विशाल दान पेटियों (Donation Boxes) में नकद राशि डालते हैं। इसके अलावा मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन और सीधे बैंक ट्रांसफर (जैसे UPI या QR कोड) से भी भारी दान मिलता है। नकदी के अलावा कई भक्त रामलला के लिए सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं भी ट्रस्ट को समर्पित करते हैं।
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दान पेटी खोलते ही ऑन हो जाते हैं CCTV, कोई अकेला नहीं छू सकता पैसा

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मंदिर की दान पेटियों को खोलने की प्रक्रिया बेहद सख्त और सुरक्षित नियमों के तहत पूरी होती है। दान पेटियों को किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं खोला जाता। इसके लिए ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की एक विशेष टीम मौके पर मौजूद रहती है। पेटियां खोलने से लेकर पैसों को गिनती केंद्र (Counting Center) तक ले जाने की पूरी प्रक्रिया हाई-टेक तीसरी आंख यानी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की लाइव निगरानी में रिकॉर्ड की जाती है, ताकि सुरक्षा में रत्ती भर भी चूक न हो।
इस बड़े बैंक के कर्मचारी गिनते हैं नोट, मशीनों से होता है काम

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दान पेटियों से निकली भारी-भरकम नकदी को गिनने की जिम्मेदारी देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक को सौंपी गई है। राम मंदिर के चढ़ावे के नोटों की गिनती स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अनुभवी कर्मचारियों द्वारा की जाती है। बैंक की टीम विशेष रूप से मंदिर परिसर में बने काउंटिंग रूम में पहुंचती है। नोटों की गड्डियों को तेजी से और बिना किसी गलती के गिनने के लिए अत्याधुनिक नोट गिनने वाली मशीनों (Note Counting Machines) का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान पारदर्शिता के लिए सरकारी अफसर भी वहां मौजूद रहते हैं।
गिनती के तुरंत बाद बैंक खातों में जमा होता है पैसा, ऐसे होता है इस्तेमाल

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जैसे ही बैंक के कर्मचारी नोटों की गिनती पूरी कर फाइनल आंकड़े तैयार करते हैं, रकम को तुरंत सुरक्षित कर दिया जाता है। गिनती पूरी होने के बाद पूरी राशि को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकृत बैंक खातों में जमा (Deposit) करा दिया जाता है। इस चढ़ावे की पाई-पाई का इस्तेमाल राम मंदिर के बचे हुए निर्माण कार्यों, परिसर के रखरखाव, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त भोजन (भंडारा), चिकित्सा और अन्य विश्वस्तरीय सुविधाओं को बढ़ाने में किया जाता है।
सोशल मीडिया के दावों पर ट्रस्ट का जवाब: पूरी प्रक्रिया है 100% पारदर्शी

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पिछले दिनों सोशल मीडिया पर मंदिर के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर कुछ भ्रामक दावे किए जा रहे थे, जिस पर ट्रस्ट ने स्थिति साफ की है। ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राम मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह से ऑडिटेड और पारदर्शी है। बैंक और जिला प्रशासन की सीधी भागीदारी होने के कारण इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। हर एक पैसे का डिजिटल और ऑन-पेपर पूरा हिसाब रखा जाता है।