क्या आप भी रिलीज होते ही नई फिल्में या वेब सीरीज ढूंढने के लिए टेलीग्राम (Telegram) के सर्च बार में पहुंच जाते हैं? अगर जवाब हां है, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी खबर है. फ्री में कंटेंट परोसने वाले ऐसे टेलीग्राम चैनल्स और पाइरेसी वेबसाइट्स के खिलाफ सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल कार्रवाई शुरू कर दी है.

आइए समझते हैं कि सरकार ने क्या कदम उठाया है, सिनेमा और OTT इंडस्ट्री को इससे क्या राहत मिलेगी और क्या वाकई भारत में फिल्मों की पाइरेसी खत्म हो सकती है.

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7000 से ज्यादा URLs पर गिरा हथौड़ा: आंकड़े क्या कहते हैं?

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में संसद (लोकसभा) में एक रिपोर्ट पेश की है. इसके मुताबिक, सरकार ने ऑनलाइन पाइरेसी फैलाने वाले डिजिटल ठिकानों को चिन्हित कर उन्हें ब्लॉक करने का आदेश जारी किया है:

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  • ब्लॉक किए गए टेलीग्राम चैनल्स: लगभग 5000
  • ब्लॉक की गई वेबसाइट्स: 1263
  • कुल हटाए गए URLs: 7393

सरकार का साफ कहना है कि ये प्लेटफॉर्म बिना किसी इजाजत या कॉपीराइट के फिल्में और शो लीक कर रहे थे, जिससे देश के मनोरंजन उद्योग को भारी आर्थिक चोट पहुंच रही थी.

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किस कानून के तहत हुई यह कार्रवाई?
इस डिजिटल स्ट्राइक का सबसे बड़ा हथियार बना है सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023 (Cinematograph Amendment Act 2023).

कैसे काम करता है यह नियम? जब भी कोई फिल्म निर्माता या प्रोडक्शन हाउस अपने कंटेंट के लीक होने की शिकायत करता है, तो मंत्रालय के अधिकृत अधिकारी तुरंत उस प्लेटफॉर्म (जैसे टेलीग्राम या वेबसाइट हॉस्टिंग सर्विस) को नोटिस जारी करते हैं. नोटिस मिलते ही उस पायरेटेड कंटेंट, लिंक या पूरे चैनल को भारत में ब्लॉक कर दिया जाता है.

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पाइरेसी रुकने से OTT और सिनेमा का क्या फायदा?
हर साल बॉलीवुड, साउथ सिनेमा और OTT प्लेटफॉर्म्स को पाइरेसी की वजह से हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है. जब लोगों को फ्री में HD क्वालिटी में फिल्में नहीं मिलेंगी, तो वे लीगल ऐप्स (जैसे Netflix, Prime, Hotstar) का सब्सक्रिप्शन लेंगे. कंपनियों की कमाई बढ़ेगी, तो वे दर्शकों के लिए और भी शानदार बजट और अच्छी कहानियों वाले शो बना सकेंगी.

क्या सिर्फ चैनल बैन करने से रुकेगी पाइरेसी?
इंडस्ट्री के जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ बैन लगा देने से पाइरेसी पूरी तरह खत्म नहीं होगी. एक चैनल बंद होता है, तो दूसरा तुरंत नया लिंक बनाकर सामने आ जाता है.

असली समाधान क्या है?
OTT प्लेटफॉर्म्स को अपने प्लान्स आम जनता की जेब के हिसाब से सस्ते और फ्लेक्सिबल रखने होंगे. जब यूजर को सही दाम पर, बिना किसी वायरस/विज्ञापन के झंझट के ओरिजिनल कंटेंट मिलेगा, तो वह खुद ब खुद पायरेटेड लिंक्स से दूरी बना लेगा. फ्री में फिल्में देखने का दौर अब धीरे-धीरे खत्म होने की ओर है. सरकार का यह कदम कॉपीराइट होल्डर्स के अधिकारों की रक्षा करने के लिए बेहद जरूरी था. बतौर दर्शक, हमें भी पाइरेसी को बढ़ावा देने के बजाय लीगल प्लेटफॉर्म्स के जरिए ही सिनेमा का लुत्फ उठाना चाहिए.