उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है. दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने साफ लफ्जों में कहा कि गठबंधन में बराबर का सम्मान और बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए. उन्होंने 150 सीटों की चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा, “150 सीटों की मांग किसने की? हमने तो असल में 200 सीटों की बात की थी. कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी है. जब तक हमें सीटें नहीं मिलेंगी और हम चुनाव नहीं लड़ेंगे, तब तक जीतेंगे कैसे?”
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‘बिना लड़े कोई कैसे जीत सकता है?’
कांग्रेस प्रभारी ने आगे जोर देकर कहा कि चुनाव में मजबूती से उतरना ही जीत का रास्ता तय करता है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “हम तभी जीत सकते हैं जब हमें सीटें मिलेंगी. हम तभी जीत सकते हैं जब हम चुनाव लड़ेंगे. क्या कोई बिना चुनाव लड़े भी कभी जीतता है?” सीटों का बंटवारा अक्टूबर के महीने में ही अंतिम रूप से तय हो जाना चाहिए, ताकि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को जमीन पर तैयारी करने का पूरा वक्त मिल सके. उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस बातचीत में लचीला रुख रखेगी. उन्होंने कहा, “जब सीटों के बंटवारे की बात आती है, तो हम संविधान की तरह लचीले हैं. थोड़ा झुकना भी पड़े, तो हम झुकेंगे.”
‘बात सीट की नहीं जीत की है’
दूसरी ओर, सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने कांग्रेस के इस दबाव पर सधे हुए अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए साफ किया कि प्राथमिकता सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीत है. अखिलेश यादव ने लिखा, “मक़सद जब साफ़ हो तो हाथ में हाथ होता है. निगाह मंज़िल पर हो तो सफ़र आसान होता है! बात बड़ी ये नहीं है कि गठबंधन में कितनी सीटें या कौन सी सीट किसके पास जा रही है, बात बड़ी ये है कि हम सबको ये सुनिश्चित करना है कि जीत गठबंधन की हो. फिर दोहराते हैं: बात सीट की नहीं जीत की है.”
अखिलेश ने आगे कहा कि यह जीत गठबंधन के दलों से बढ़कर संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए जरूरी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि सीटों की यह रस्साकशी बातचीत की मेज पर क्या रुख लेती है.