मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली में रविवार को विरोध-प्रदर्शन काफी उग्र हो गया. जंतर-मंतर और इंडिया गेट के आसपास छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ तीखी झड़प देखने को मिली. इस दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए, जिसे पुलिस अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया.
आइसा का आरोप: प्राइवेट गाड़ी में ले जाया गया
AISA ने दावा किया कि उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने एक ऐसी निजी गाड़ी में हिरासत में लिया जिस पर कोई आधिकारिक नंबर प्लेट नहीं थी. संगठन का कहना था कि गाड़ी में कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी और उन्हें किसी अज्ञात जगह ले जाया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है. हालांकि बाद में नेहा बोरा को नरेला इंडस्ट्रियल एरिया थाने से रिहा कर दिया गया. संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि रिहाई के वक्त उनका फोन और बैग वापस नहीं दिया गया था.
पुलिस ने दावों को नकारा
दिल्ली पुलिस ने आइसा के इन आरोपों को पूरी तरह गलत करार दिया है. डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि नेहा बोरा को सरकारी गाड़ी में ही ले जाया गया था और गाड़ी के पीछे दो महिला पुलिसकर्मी मौजूद थीं. प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें रिहा भी कर दिया गया.
बैरिकेड्स पर धक्का-मुक्की, आप नेता भी हिरासत में
जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे. रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पैरामिलिट्री फोर्स समेत करीब 5,000 जवान तैनात रहे. अशोक रोड के पास प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स लांघने की कोशिश की, जहां नेहा बोरा बैरिकेड पर चढ़ती दिखीं और पुलिस से उनकी धक्का-मुक्की हुई.
उधर, इंडिया गेट की ओर मार्च कर रहे आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज और अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया. पुलिस बस के भीतर से भारद्वाज ने आरोप लगाया कि उनके साथ बदसलूकी की गई. यह पूरा विरोध मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर हो रहा है.