स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के ड्राफ्ट रोल में 13.39 करोड़ नाम अलग होने के बाद अब बड़ा सवाल है कि क्या चुनाव आयोग के विशेष अभियान के बाद इन आंकड़ों में बदलाव आएगा? 13 करोड़ का आंकड़ा वो है जिसमें डेड शिफ्ट और डुप्लीकेट के मामले शामिल हैं, जिसमें शिफ्ट केस सबसे ज्यादा करीब 6 करोड़ है. क्या जो शिफ्ट हुए उनके नाम कहीं और नहीं जुड़े ?
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तीन चरणों में हुई प्रक्रिया
SIR के तीन चरणों में कुल 95.40 करोड़ मतदाताओं के डेटा को शामिल किया गया है. ड्राफ्ट रोल स्टेज पर 13.39 करोड़ नाम अलग-अलग श्रेणियों में बाहर हैं. इनमें 3.01 करोड़ मतदाता अनुपस्थित या ट्रेस नहीं हो सके, 6.30 करोड़ स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके, 2.80 करोड़ मृत, 1.02 करोड़ डुप्लीकेट और 26 लाख अन्य श्रेणी में हैं. सबसे बड़ा आंकड़ा स्थायी रूप से शिफ्ट हुए मतदाताओं का है. इसके बाद अनट्रेसेबल और मृत मतदाताओं की संख्या है. यानी अनुपस्थित, स्थान परिवर्तन , दो जगह नाम और मृत और को मिलाकर 13.13 करोड़ नाम हैं, जो कुल बाहर किए गए नामों का करीब 98 फीसदी है.
क्या ये आंकड़े फाइनल हैं?
अब अहम सवाल यह है कि क्या ये आंकड़े फाइनल हैं? जवाब है-नहीं. ये अभी Draft Electoral Roll Stage के आंकड़े हैं. विशेष अभियान के दौरान अगर कोई पात्र मतदाता सामने आता है, दस्तावेज उपलब्ध कराता है या किसी मामले में स्थिति स्पष्ट होती है, तो ड्राफ्ट के आंकड़ों में बदलाव हो सकता है. लेकिन इसके लिए दावा और आपत्ति करना होगा. चुनाव आयोग के मुताबिक नए मतदाताओं और SIR के दौरान छूटे पात्र मतदाताओं के नाम भी लगातार जोड़े जा रहे हैं. इसलिए Final Electoral Roll प्रकाशित होने के बाद ही यह साफ होगा कि कितने नाम वास्तव में हटे और कितने नाम दोबारा शामिल किए गए.