जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी के साथ ही देश में त्यौहारों का सीजन शुरू हो चुका है. बाजार गुलजार हैं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर Amazon Great Indian Festival और Flipkart Big Billion Days जैसी बंपर सेल्स का दौर शुरू होने वाला है. टीवी, स्मार्टफोन, कपड़ों से लेकर होम अप्लायंसेज पर मिलने वाले लुभावने डिस्काउंट हर किसी को खरीदारी के लिए आकर्षित कर रहे हैं.
लेकिन सेल्स के इस दौर में अक्सर अंधाधुंध छूट और ऑफर के चक्कर में हमारा बजट बिगड़ जाता है. त्यौहार खत्म होते-होते जेब खाली हो जाती है और क्रेडिट कार्ड का भारी-भरकम बिल सामने आ खड़ा होता है. अगर आप चाहते हैं कि इस फेस्टिवल सीजन खुशियां भी पूरी रहें और बैंक बैलेंस भी सुरक्षित रहे, तो यूटिलिटी और फाइनेंस से जुड़े ये 5 स्मार्ट टिप्स आपके बहुत काम आएंगे.
शॉपिंग से पहले तय करें फेस्टिवल बजट
सेल में मिलने वाले डिस्काउंट का सबसे पहला नियम है, अपनी सीमा तय करना. खरीदारी की शुरुआत करने से पहले एक निश्चित बजट बनाएं. गिफ्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और घर की सजावट जैसी अलग-अलग कैटेगरी के लिए खर्च की लिमिट तय कर लें. जब आपके पास बजट का साफ आंकड़ा होगा, तो आप बेवजह की खरीदारी (Impulse Buying) से बच सकेंगे.
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No-Cost EMI के हिडन चार्जेस का गणित समझें
अक्सर महंगा सामान खरीदते वक्त No Cost EMI का विकल्प बहुत आकर्षक लगता है. लेकिन ध्यान रखें कि नो-कॉस्ट EMI में भले ही आपसे ब्याज न लिया जा रहा हो, लेकिन बैंक आपसे प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee) और उस पर 18% GST जरूर वसूलते हैं. इसके अलावा, अगर आप नो-कॉस्ट EMI के बजाय एक बार में पेमेंट करते हैं, तो बैंक अक्सर आपको 5% से 10% का फ्लैट इंस्टेंट डिस्काउंट देते हैं. इसलिए EMI चुनने से पहले दोनों के अंतर की गणना जरूर कर लें.
क्रेडिट कार्ड ऑफर्स का सही और सीमित इस्तेमाल
त्यौहारों पर बैंक क्रेडिट कार्ड्स पर 10% तक का इंस्टेंट डिस्काउंट देते हैं. बैंक डिस्काउंट और रिवॉर्ड पॉइंट्स का फायदा उठाना समझदारी है, लेकिन क्रेडिट कार्ड से उतना ही स्वाइप करें जितना आप अगले महीने बिल आने पर एक बार में चुका सकें. केवल मिनिमम ड्यू (Minimum Amount Due) भरने की गलती कभी न करें, वरना 36% से 42% तक का सालाना ब्याज लग सकता है.
Buy 1 Get 1 और Flash Deals के जाल से बचें
30 मिनट की फ्लैश सेल या एक खरीदें, एक फ्री पाएं जैसे ऑफर्स ग्राहकों के मन में सामान छूट जाने का डर (FOMO) पैदा करते हैं. किसी भी ऑफर को देखकर तुरंत कार्ड स्वाइप करने के बजाय खुद से पूछें- क्या मुझे सच में इस चीज की जरूरत है? सिर्फ सस्ती चीज समझकर खरीदारी करने से बचें.
Price Tracker से जांचें असली डिस्काउंट
सेल के दौरान कई बार कंपनियां MRP बढ़ाकर दिखाती हैं और फिर उस पर बड़ा डिस्काउंट देती हैं. ऐसे में किसी भी सामान को खरीदने से पहले प्राइस ट्रैकर टूल्स या अलग-अलग ई-कॉमर्स साइट्स पर उस प्रोडक्ट की कीमत की तुलना (Price Comparison) जरूर कर लें. इससे आपको पता चल जाएगा कि आपको वाकई में डिस्काउंट मिल रहा है या नहीं.
तो कुल मिलाकर बात ये है कि त्यौहारों की असली रंगत अपनों के साथ वक्त बिताने में है, न कि बजट से बाहर जाकर कर्ज के बोझ में दबने में. थोड़े से वित्तीय अनुशासन और इन स्मार्ट यूटिलिटी टिप्स को अपनाकर आप अपने त्यौहार को खुशहाल और पॉकेट-फ्रेंडली बना सकते हैं.