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पति-पत्‍नी के जॉइंट अकाउंट का सेपरेशन के बाद कैसे होगा बंटवारा? जानें बैंकिंग और कानूनी नियम

Husband Wife Joint Account Rules: तलाक या सेपरेशन के बाद जॉइंट बैंक खाते में जमा पैसों पर किसका कितना हक होता है? जानें RBI और फैमिली कोर्ट के नियम.

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पति-पत्‍नी के जॉइंट बैंक अकाउंट में जमा पैसों का बंटवारा कैसे होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि अकाउंट का प्रकार (Mode of Operation) क्या है और उस खाते में किसका कितना आर्थिक योगदान (Contribution) रहा है.

भारतीय कानून और बैंकिंग नियमों (RBI Guidelines) के अनुसार जॉइंट अकाउंट के बंटवारे से जुड़े जरूरी नियमों पर गाज‍ियाबाद कोर्ट की सीन‍ियर एडवोकेट रेणु अग्रवाल के अनुसार इसके ल‍िए न‍ियम बहुत साफ हैं. जॉइंट अकाउंट में मौजूद पैसों का बंटवारा यहां दी गई बातों पर न‍िर्भर करेगा:

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ऑपरेटिंग मोड (Mode of Operation) के अनुसार नियम
इस मोड में पति या पत्नी में से कोई भी एक व्यक्ति बिना दूसरे की अनुमति के पूरा पैसा निकाल सकता है. अगर सेपरेशन या विवाद के दौरान कोई एक पार्टनर खाते से सारे पैसे निकाल लेता है, तो बैंक उसे रोकने के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

संयुक्त रूप से:
इस मोड में बैंक से पैसा निकालने या चेक साइन करने के लिए पति और पत्नी दोनों के हस्ताक्षर (Signatures) अनिवार्य होते हैं. सेपरेशन के दौरान अगर एक पार्टनर सहमत न हो, तो दूसरा पैसा नहीं निकाल सकता.

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पैसों के बंटवारे (Ownership) का कानूनी सिद्धांत
बैंकिंग नियमों के तहत जॉइंट अकाउंट में जमा पैसे पर दोनों खाताधारकों का समान कानूनी अधिकार माना जाता है, लेकिन सेपरेशन या तलाक (Divorce) के मामले में अदालत यहां दी गईं बातों को ध्यान में रखती है:

फंड का सोर्स
कानूनी तौर पर यह देखा जाता है कि खाते में जमा पैसा किसका है. अगर खाते में पूरी रकम सिर्फ पति या सिर्फ पत्नी की सैलरी/कमाई से आई है, तो वही व्यक्ति उस पैसे का मुख्य दावेदार होता है.

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बराबर का हक
यदि दोनों पार्टनर नौकरीपेशा हैं या दोनों ने खाते में योगदान दिया है, तो अदालत आमतौर पर जमा राशि को 50-50 के अनुपात में बांटने का आदेश देती है.

गृहणी (Homemaker) का अधिकार:
अगर पत्‍नी हाउसवाइफ है और उसका कोई स्वतंत्र आय का जरिया नहीं है, तब भी फैमिली कोर्ट अलमोनी (Maintenance) और जीवन-यापन के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए जॉइंट अकाउंट के पैसों में से पत्नी के हिस्से का फैसला करती है.

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विवाद या सेपरेशन की स्थिति में क्या करें?
अगर सेपरेशन के दौरान आपको डर है कि आपका पार्टनर जॉइंट अकाउंट से सारे पैसे निकाल सकता है, तो आप ये कदम उठा सकते हैं:

बैंक को लिखित सूचना:
आप अपनी बैंक शाखा (Bank Branch) में लिखित आवेदन देकर अनुरोध कर सकते हैं कि खाते में से लेनदेन रोक दिया जाए (Debit Freeze). इसके बाद बिना दोनों की लिखित सहमति के पैसा नहीं निकाला जा सकेगा.

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ऑपरेटिंग मोड बदलवाएं:
आप बैंक से Either or Survivor मोड को बदलकर Jointly करने का आवेदन कर सकते हैं.

कोर्ट का स्टे ऑर्डर (Stay Order):
तलाक या सेपरेशन का केस दर्ज होने पर आप फैमिली कोर्ट से जॉइंट बैंक अकाउंट के फ्रीज करने या पैसों के ट्रांसफर पर रोक लगाने के लिए स्टे ऑर्डर ले सकते हैं.

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इनकम टैक्स और टीडीएस (TDS) का नियम
इनकम टैक्स विभाग के अनुसार, जॉइंट अकाउंट में जमा पैसे पर मिलने वाले ब्याज (Interest Income) पर टैक्स की देनदारी प्राथमिक खाताधारक (First Holder) की होती है. यदि फर्स्ट होल्डर पति है, तो उस ब्याज पर टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी पति की होगी.

First published on: Sep 03, 2026 03:10 PM

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