8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को 10 महीने पूरे हो चुके हैं. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बना यह आयोग मई-जून 2027 तक अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप सकता है. इस बीच, देशभर के केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन लगातार वेतन और पेंशन बढ़ोतरी को लेकर आयोग के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं. कर्मचारी यूनियनों की सबसे बड़ी मांगों में से एक है सिविलियन कर्मचारियों के लिए वन रैंक वन पेंशन (OROP) लागू करना.
सिविलियन कर्मचारी क्यों मांग रहे हैं One Rank One Pension?
फिलहाल वन रैंक वन पेंशन की व्यवस्था सिर्फ भारतीय सेना (Armed Forces) के लिए लागू है. सिविलियन (गैर-सैन्य) कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था नहीं है. कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि एक ही पद (Rank) और समान वर्षों तक सेवा देने वाले दो कर्मचारियों की पेंशन में सिर्फ इसलिए बड़ा अंतर आ जाता है, क्योंकि उनके रिटायर्ड होने का साल अलग-अलग होता है.
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एक उदाहरण से इस बात को समझते हैं. मान लीजिए लेवल 6 का एक कर्मचारी 2016 (7वें वेतन आयोग) में रिटायर हुआ. उसे लगभग 24500 रुपये बेसिक पेंशन और महंगाई राहत (DR) मिलाकर हर महीने करीब 38710 रुपये मिलते हैं.
वहीं, उसी पद (लेवल-6) पर समान सेवा देने वाला दूसरा कर्मचारी अगर 2026 में 8वें वेतन आयोग के तहत रिटायर होता है, तो उसकी पेंशन पुराने पेंशनर के मुकाबले काफी ज्यादा होगी. इसी असमानता को दूर करने के लिए सिविलियन कर्मचारी भी ओआरओपी की तर्ज पर पेंशन में बराबरी की मांग कर रहे हैं ताकि रिटायरमेंट की तारीख चाहे जो हो, एक ही रैंक वाले कर्मचारियों की पेंशन समान हो.
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फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) और पेंशन का गणित
नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NCJCM) ने 8वें वेतन आयोग के सामने 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा है. साथ ही, हर 10 साल के बजाय हर 5 साल में वेतन और पेंशन संशोधन की मांग की है. अगर 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो 2026 में रिटायर होने वाले लेवल-6 के कर्मचारी की पेंशन बढ़कर करीब 93900 रुपये तक पहुंच सकती है.
अगर प्री-2026 (पहले रिटायर हुए) कर्मचारियों की पेंशन का नोशनल फिक्सेशन (Notional Fixation) नहीं किया गया, तो 2016 में रिटायर हुए कर्मचारी की पेंशन 38710 रुपये के आसपास ही रह जाएगी, जिससे दोनों के बीच बहुत बड़ी खाई बन जाएगी.
आगे क्या होगा?
आयोग आने वाले हफ्तों में चंडीगढ़ (16-18 सितंबर) और बेंगलुरु (7-8 अक्टूबर) में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलने वाला है. इन बैठकों में पेंशन विषमता और ओआरओपी का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा. हालांकि, सिविलियन कर्मचारियों को ओआरओपी मिलेगा या नहीं, यह आयोग की अंतिम सिफारिशों और केंद्र सरकार के फैसले के बाद ही साफ हो पाएगा.