दिवाली, छठ या गर्मी की छुट्टियों के दौरान घर जाने वाले हवाई यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है. त्योहारों के समय एयरलाइंस कंपनियों द्वारा टिकटों के दाम अचानक दोगुने-तिगुने बढ़ा दिए जाने के रवैये पर अब बहुत जल्द लगाम लगने वाली है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है और केंद्र सरकार ने भी अदालत को बताया है कि वे हवाई किराये और एक्स्ट्रा चार्जेस से जुड़े नए सख्त नियम बना रहे हैं, जो अगले 3 हफ्तों में सामने आ सकते हैं.

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सामान्य दिनों में 6 हजार का टिकट, त्योहारों में 14 हजार क्यों?

अक्सर देखा जाता है कि अगर दिल्ली से मुंबई का फ्लाइट टिकट सामान्य दिनों में 6000 रुपये का होता है, तो दिवाली, छठ या छुट्टियों के समय एयरलाइंस इसका किराया बढ़ाकर 12000 से 14000 रुपये या इससे भी अधिक कर देती हैं.

यात्रियों की इसी शिकायत को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की थी, जिसमें एयरलाइंस की मनमानी और अनुचित सरचार्ज पर रोक लगाने के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी और स्पष्ट नियमों की मांग की गई थी.

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नियम न मानें तो उड़ानें रोक दें - सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बेहद कड़े शब्दों में कहा क‍ि अगर एयरलाइंस सरकार के बनाए नियमों और किरायों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी उड़ानें ही रोक दी जानी चाहिए!

अदालत ने कहा कि त्योहारों के समय किराया तय करने में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी सीधे तौर पर यात्रियों के शोषण जैसी है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

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7 सितंबर को अगली सुनवाई, सामने आएंगे नए नियम
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराये और शुल्कों को नियंत्रित करने वाले नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे पूरा होने में करीब 3 हफ्ते लगेंगे.

अदालत ने सरकार की इस दलील को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 7 सितंबर तय की है. उम्मीद है कि 7 सितंबर को सरकार अपने नए नियम सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेगी.

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अगर सरकार के नए नियम 7 सितंबर तक लागू हो जाते हैं, तो इस बार दिवाली और छठ पूजा पर घर जाने वाले करोड़ों यात्रियों को राहत मिलेगी और एयरलाइंस कंपनियां अपनी मर्जी से 2 से 3 गुना ज्यादा किराया नहीं वसूल पाएंगी.

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