Crude Oil Price Hike: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और लाल सागर (Red Sea) में हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों की वजह से ब्रेंट क्रूड $101 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.
बाजार विशेषज्ञों और गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) जैसी दिग्गज संस्थाओं का अनुमान है कि अगर मिडिल ईस्ट में यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो साल के अंत तक कच्चा तेल $120 प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर सकता है. आइए, समझते हैं कि क्रूड ऑयल में लगी इस आग के पीछे क्या मुख्य वजहें हैं.
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क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?
होर्मुज और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में खतरा:
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और बाब अल-मंदेब दो ऐसे समुद्री रास्ते हैं, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है. अगर ये रास्ते पूरी तरह प्रभावित होते हैं, तो रोजाना लगभग 1.8 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति ठप हो सकती है.
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अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व (SPR) ऐतिहासिक निचले स्तर पर:
अमेरिका का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) इस समय काफी कम हो चुका है. यानी अगर बाजार में बड़ा सप्लाई शॉक आता है, तो अमेरिका के पास कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने रिजर्व से ज्यादा तेल जारी करने की गुंजाइश सीमित है.
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ईरान के तेल उत्पादन पर संकट:
अमेरिकी हमलों और तनाव के कारण अगर ईरान का लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन का तेल उत्पादन बाजार से बाहर होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के पास इसकी भरपाई के लिए पर्याप्त विकल्प नहीं हैं.
बाजार में बैकवर्डेशन (Backwardation) का माहौल:
सप्लाई घटने के डर से कच्चे तेल के वायदा बाजार में तुरंत डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स भविष्य के कॉन्ट्रैक्ट्स की तुलना में अधिक महंगे बिक रहे हैं. यह इस बात का संकेत है कि शॉर्ट-टर्म में सप्लाई की भारी किल्लत है.
कितना ऊपर जा सकता है ब्रेंट क्रूड?
गोल्डमैन सैक्स का आंकलन कहता है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव जारी रहता है और होर्मुज की खाड़ी से सप्लाई बाधित रहती है, तो ब्रेंट क्रूड $120 के पार जा सकता है. हालांकि, चीन में कच्चे तेल की कमजोर मांग इस तेजी पर थोड़ा ब्रेक लगा सकती है. अगर कूटनीतिक रास्तों से तनाव कम होता है, तो कीमतें फिर से नियंत्रण में आ सकती हैं.
भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए, जो अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करती हैं, $101 से ऊपर क्रूड का रहना पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और आयात बिल के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.