सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार (24 जुलाई) को भारतीय शेयर बाजार में सुबह-सुबह जोरदार बिकवाली देखने को मिली. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 1-1 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई.बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स intraday ट्रेडिंग में करीब 800 अंक टूटकर 75,613 के निचले स्तर पर आ गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 200 से ज्यादा अंक फिसलकर 23,647 के स्तर तक आ गया. इस भारी बिकवाली में सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1-1% तक टूट गए.
इस गिरावट की वजह से महज कुछ ही मिनटों में BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 477 लाख करोड़ रुपये से घटकर 473 लाख करोड़ रुपये रह गया. यानी निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. आइए, समझते हैं कि आज भारतीय शेयर बाजार में यह बवंडर क्यों आया.
शेयर बाजार में गिरावट की 4 मुख्य वजहें
क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) $101 के पार पहुंचा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें लगातार छठे दिन बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं. जुलाई महीने में ही कच्चा तेल लगभग 40% तक महंगा हो चुका है. लाल सागर (Red Sea) में साउदी टैंकरों पर हुए हमलों की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर क्रूड ऑयल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश में महंगाई और व्यापार घाटा (BoP) बढ़ने की चिंता गहरा गई है.
अमेरिका और ईरान के बीच गहराता युद्ध
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे हैं. पिछले 13 दिनों से लगातार अमरीकी सेना ईरान पर एयरस्ट्राइक कर रही है. इस वैश्विक तनाव (Geopolitical Tension) की वजह से दुनिया भर के बाजारों में डर का माहौल है.
अमरीकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और विदेशी फंड्स की निकासी
अमेरिका में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (US Bond Yield) बढ़कर 4.71% पर पहुंच गई है. जब अमरीकी बॉन्ड में रिटर्न बढ़ता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिका के सुरक्षित बांड्स में लगाने लगते हैं. इस फंड आउटफ्लो (Foreign Capital Outflow) का सीधा असर भारतीय बाजार पर दिख रहा है.
ट्रम्प का ट्रेड वॉर 2.0
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दुनिया भर के देशों पर टैरिफ (आयात शुल्क) का चाबुक चला दिया है. पिछले दो हफ्तों में ब्राजील, कनाडा और जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के बाद, अब 60 से ज्यादा व्यापारिक साझेदार देशों पर 10% से 12.5% तक का नया टैरिफ लागू कर दिया गया है. भारत को 10% वाली श्रेणी में रखा गया है. इस ट्रेड वॉर से ग्लोबल ट्रेड वारंट बिगड़ने की आशंका बन गई है.
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार (24 जुलाई) को भारतीय शेयर बाजार में सुबह-सुबह जोरदार बिकवाली देखने को मिली. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 1-1 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई.बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स intraday ट्रेडिंग में करीब 800 अंक टूटकर 75,613 के निचले स्तर पर आ गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 200 से ज्यादा अंक फिसलकर 23,647 के स्तर तक आ गया. इस भारी बिकवाली में सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1-1% तक टूट गए.
इस गिरावट की वजह से महज कुछ ही मिनटों में BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 477 लाख करोड़ रुपये से घटकर 473 लाख करोड़ रुपये रह गया. यानी निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. आइए, समझते हैं कि आज भारतीय शेयर बाजार में यह बवंडर क्यों आया.
शेयर बाजार में गिरावट की 4 मुख्य वजहें
क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) $101 के पार पहुंचा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें लगातार छठे दिन बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं. जुलाई महीने में ही कच्चा तेल लगभग 40% तक महंगा हो चुका है. लाल सागर (Red Sea) में साउदी टैंकरों पर हुए हमलों की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर क्रूड ऑयल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश में महंगाई और व्यापार घाटा (BoP) बढ़ने की चिंता गहरा गई है.
अमेरिका और ईरान के बीच गहराता युद्ध
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे हैं. पिछले 13 दिनों से लगातार अमरीकी सेना ईरान पर एयरस्ट्राइक कर रही है. इस वैश्विक तनाव (Geopolitical Tension) की वजह से दुनिया भर के बाजारों में डर का माहौल है.
अमरीकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और विदेशी फंड्स की निकासी
अमेरिका में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (US Bond Yield) बढ़कर 4.71% पर पहुंच गई है. जब अमरीकी बॉन्ड में रिटर्न बढ़ता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिका के सुरक्षित बांड्स में लगाने लगते हैं. इस फंड आउटफ्लो (Foreign Capital Outflow) का सीधा असर भारतीय बाजार पर दिख रहा है.
ट्रम्प का ट्रेड वॉर 2.0
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दुनिया भर के देशों पर टैरिफ (आयात शुल्क) का चाबुक चला दिया है. पिछले दो हफ्तों में ब्राजील, कनाडा और जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के बाद, अब 60 से ज्यादा व्यापारिक साझेदार देशों पर 10% से 12.5% तक का नया टैरिफ लागू कर दिया गया है. भारत को 10% वाली श्रेणी में रखा गया है. इस ट्रेड वॉर से ग्लोबल ट्रेड वारंट बिगड़ने की आशंका बन गई है.