Electric Car Range: 1 बार फुल चार्ज पर आपकी EV कितनी दूर चलेगी? पेट्रोल-डीजल के संकट में जानिए कितनी भरोसेमंद हैं ये इलेक्ट्रिक कारें
EV Car Millage: लोग अक्सर पूछते हैं कि क्या EV खरीदना एक फायदेमंद निवेश होगा. एक आम सवाल यह है कि एक इलेक्ट्रिक वाहन एक बार चार्ज करने पर कितनी दूरी तय कर सकता है? आइए, इसकी पूरी सच्चाई जानते हैं.
Written By: Azhar Naim|Updated: May 14, 2026 12:48
Edited By : Azhar Naim|Updated: May 14, 2026 12:48
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ईवी कार कितना माइलेज देती है. (Image: AI)
हाइलाइट्स
News24 AI द्वारा निर्मित • संपादकीय टीम द्वारा जांचा गया
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) रेंज के मुख्य बिंदु
टाटा पंच ईवी की 40 kWh बैटरी की सर्टिफाइड रेंज 468 किमी है, जबकि वास्तविक रेंज लगभग 335-355 किमी होती है.
टाटा हैरियर ईवी की कंपनी द्वारा बताई गई रेंज 627 किमी है, लेकिन वास्तविक दुनिया में यह 420 किमी से 500+ किमी तक हो सकती है.
भारत में मुख्य रूप से LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट) और NMC (निकेल मैंगनीज कोबाल्ट) बैटरी केमिस्ट्री का उपयोग होता है.
EV रेंज को प्रभावित करने वाले कारक
ड्राइविंग स्टाइल, एसी/हीटर का उपयोग, बाहरी तापमान, पहाड़ी रास्ते और कार में अतिरिक्त सामान EV की वास्तविक रेंज को कम कर सकते हैं.
Electric Car Range in India: देश में हर तरफ पेट्रोल-डीजल की बात हो रही है, जिसे परेशान लोग EV कार खरीदने की सोच रहे हैं, ऐसे में मन में सवाल उठता है कि य कारें कितना रेंज दे सकती है. लोगों के मन में सवाल आता है कि हाईवे में कदम रखते ही क्या फुल चार्ज होने के बावजूद सफर बिना रुके पूरा होगा? भारत में टाटा (Tata) और एमजी (MG) जैसी दिग्गज कंपनियों ने ऐसी कारें पेश की हैं जो अब लंबी दूरी तय करने का भरोसा देती हैं. रेंज का असली मतलब सिर्फ किलोमीटर नहीं, बल्कि आपकी ड्राइविंग स्टाइल और कार की टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है. आइए, भारतीय सड़कों पर ईवी कितनी रेंज दे सकती है, इसकी बारे में आसान शब्दों में समझते हैं.
जब आप शोरूम में कार देखते हैं, तो कंपनियां एक 'सर्टिफाइड रेंज' (Certified Range) बताती हैं, जो एक आदर्श स्थिति में टेस्ट की जाती है.
सर्टिफाइड रेंज: उदाहरण के लिए, 40 kWh वाली बैटरी की सर्टिफाइड रेंज 468 किमी है.
रियल-वर्ल्ड रेंज: असल सड़क पर ट्रैफिक और एसी (AC) के इस्तेमाल के कारण यह दूरी कम हो सकती है. रिपोर्ट बताते हैं कि 40 kWh वाली ईवी की रियल-वर्ल्ड रेंज यानी सड़कों पर करीब 335-355 किमी के आसपास रहती है.
भारतीय ईवी में इस्तेमाल होने वाली बैटरियां कैसे होती हैं?
भारत के मौसम और सुरक्षा को देखते हुए यहां मुख्य रूप से दो तरह की बैटरी केमिस्ट्री इस्तेमाल होती है:
LFP (Lithium Iron Phosphate): यह बैटरी भारतीय गर्मी के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है और इसकी उम्र भी लंबी होती है.
NMC (Nickel Manganese Cobalt): यह बैटरी ज्यादा शक्तिशाली होती है और कम वजन में ज्यादा ताकत देती है, जो परफॉर्मेंस वाली कारों के लिए अच्छी है.
आखिर कंपनियां कैसे तय करती हैं फासला?
जब भी आप कोई नई इलेक्ट्रिक कार देखते हैं, तो शोरूम में आपको 'ARAI रेंज' या 'WLTP' जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं. दरअसल, ये एक खास लैब में टेस्ट की गई दूरी होती है.
सर्टिफाइड रेंज: कंपनियां आदर्श स्थितियों में टेस्ट करती हैं जहां कोई ट्रैफिक या ऊबड़-खाबड़ रास्ता नहीं होता.
रियल-वर्ल्ड रेंज: असल सड़क पर रेंज लैब के मुकाबले 10% से 20% तक कम हो सकती है.
बैटरी की क्षमता: आपकी कार की बैटरी कितनी बड़ी है (kWh में), यह तय करता है कि वह कितनी ऊर्जा स्टोर कर सकती है.
आपके पैर तय करेंगे बैटरी की रेंज
इलेक्ट्रिक कार चलाने का तरीका पेट्रोल कार से काफी अलग होता है. अगर आप अचानक तेज रफ्तार पकड़ते हैं, तो बैटरी तेजी से खत्म होती है.
स्मूद ड्राइविंग: अगर आप धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाते हैं, तो मोटर कम बिजली खपत करती है और माइलेज बढ़ जाता है. वहीं ईवी कारों में एक खास तकनीक का इस्तेमाल होता है, रिजेंटिव ब्रेकिंग (Regenerative Braking). यह ईवी की एक खास खूबी है, जहां ब्रेक लगाने पर कार की बैटरी खुद-ब-खुद थोड़ी चार्ज हो जाती है. इको मोड: ज्यादातर कारों में 'Eco' मोड होता है, जो अनावश्यक पावर को बचाकर रेंज को 10-15 किलोमीटर तक बढ़ा देता है.
मौसम में डालता है ईवी कारों की रेंज में असर
आपको शायद इसकी जानकारी न हो, लेकिन बाहर का तापमान आपकी इलेक्ट्रिक कार की रेंज को सीधे प्रभावित करता है. लिथियम-आयन बैटरियां एक निश्चित तापमान पर सबसे अच्छा काम करती हैं.
एसी और हीटर का इस्तेमासल: अगर आप चिलचिलाती गर्मी में फुल एसी चलाकर चलते हैं, तो रेंज में 10% तक की गिरावट आ सकती है. वहीं, अगर बहुत ज्यादा ठंड है, तो बैटरी के अंदर के केमिकल धीमे हो जाते हैं, जिससे कार कम दूरी तय कर पाती है. पहाड़ी रास्ते: चढ़ाई वाले रास्तों पर मोटर को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जिससे बिजली की खपत दोगुनी हो जाती है. याद रखें कि अक्सर हम कार में जरूरत से ज्यादा सामान भर लेते हैं, जिसका सीधा असर उसकी क्षमता पर भी पड़ता है.
क्या ईवी लंबी यात्रा के लिए तैयार है?
आज की आधुनिक ईवी गाड़ियां शहर के अंदर और लंबी दूरी की यात्रा, दोनों के लिए सक्षम हैं. 2026 तक भारत में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी काफी मजबूत हो चुका है, जहां फास्ट चार्जर की मदद से टाटा पंच ईवी जैसी गाड़ियां महज 26 मिनट में 20% से 80% तक चार्ज हो जाती हैं. अगर आप सही बैटरी साइज और अच्छी ड्राइविंग तकनीक अपनाते हैं, तो इलेक्ट्रिक कार पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कहीं ज्यादा किफायती और सुकून भरा सफर प्रदान करती है.
Electric Car Range in India: देश में हर तरफ पेट्रोल-डीजल की बात हो रही है, जिसे परेशान लोग EV कार खरीदने की सोच रहे हैं, ऐसे में मन में सवाल उठता है कि य कारें कितना रेंज दे सकती है. लोगों के मन में सवाल आता है कि हाईवे में कदम रखते ही क्या फुल चार्ज होने के बावजूद सफर बिना रुके पूरा होगा? भारत में टाटा (Tata) और एमजी (MG) जैसी दिग्गज कंपनियों ने ऐसी कारें पेश की हैं जो अब लंबी दूरी तय करने का भरोसा देती हैं. रेंज का असली मतलब सिर्फ किलोमीटर नहीं, बल्कि आपकी ड्राइविंग स्टाइल और कार की टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है. आइए, भारतीय सड़कों पर ईवी कितनी रेंज दे सकती है, इसकी बारे में आसान शब्दों में समझते हैं.
जब आप शोरूम में कार देखते हैं, तो कंपनियां एक ‘सर्टिफाइड रेंज’ (Certified Range) बताती हैं, जो एक आदर्श स्थिति में टेस्ट की जाती है.
सर्टिफाइड रेंज: उदाहरण के लिए, 40 kWh वाली बैटरी की सर्टिफाइड रेंज 468 किमी है.
रियल-वर्ल्ड रेंज: असल सड़क पर ट्रैफिक और एसी (AC) के इस्तेमाल के कारण यह दूरी कम हो सकती है. रिपोर्ट बताते हैं कि 40 kWh वाली ईवी की रियल-वर्ल्ड रेंज यानी सड़कों पर करीब 335-355 किमी के आसपास रहती है.
भारतीय ईवी में इस्तेमाल होने वाली बैटरियां कैसे होती हैं?
भारत के मौसम और सुरक्षा को देखते हुए यहां मुख्य रूप से दो तरह की बैटरी केमिस्ट्री इस्तेमाल होती है:
LFP (Lithium Iron Phosphate): यह बैटरी भारतीय गर्मी के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है और इसकी उम्र भी लंबी होती है.
NMC (Nickel Manganese Cobalt): यह बैटरी ज्यादा शक्तिशाली होती है और कम वजन में ज्यादा ताकत देती है, जो परफॉर्मेंस वाली कारों के लिए अच्छी है.
आखिर कंपनियां कैसे तय करती हैं फासला?
जब भी आप कोई नई इलेक्ट्रिक कार देखते हैं, तो शोरूम में आपको ‘ARAI रेंज’ या ‘WLTP’ जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं. दरअसल, ये एक खास लैब में टेस्ट की गई दूरी होती है.
सर्टिफाइड रेंज: कंपनियां आदर्श स्थितियों में टेस्ट करती हैं जहां कोई ट्रैफिक या ऊबड़-खाबड़ रास्ता नहीं होता.
रियल-वर्ल्ड रेंज: असल सड़क पर रेंज लैब के मुकाबले 10% से 20% तक कम हो सकती है.
बैटरी की क्षमता: आपकी कार की बैटरी कितनी बड़ी है (kWh में), यह तय करता है कि वह कितनी ऊर्जा स्टोर कर सकती है.
आपके पैर तय करेंगे बैटरी की रेंज
इलेक्ट्रिक कार चलाने का तरीका पेट्रोल कार से काफी अलग होता है. अगर आप अचानक तेज रफ्तार पकड़ते हैं, तो बैटरी तेजी से खत्म होती है.
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स्मूद ड्राइविंग: अगर आप धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाते हैं, तो मोटर कम बिजली खपत करती है और माइलेज बढ़ जाता है. वहीं ईवी कारों में एक खास तकनीक का इस्तेमाल होता है, रिजेंटिव ब्रेकिंग (Regenerative Braking). यह ईवी की एक खास खूबी है, जहां ब्रेक लगाने पर कार की बैटरी खुद-ब-खुद थोड़ी चार्ज हो जाती है. इको मोड: ज्यादातर कारों में ‘Eco’ मोड होता है, जो अनावश्यक पावर को बचाकर रेंज को 10-15 किलोमीटर तक बढ़ा देता है.
मौसम में डालता है ईवी कारों की रेंज में असर
आपको शायद इसकी जानकारी न हो, लेकिन बाहर का तापमान आपकी इलेक्ट्रिक कार की रेंज को सीधे प्रभावित करता है. लिथियम-आयन बैटरियां एक निश्चित तापमान पर सबसे अच्छा काम करती हैं.
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एसी और हीटर का इस्तेमासल: अगर आप चिलचिलाती गर्मी में फुल एसी चलाकर चलते हैं, तो रेंज में 10% तक की गिरावट आ सकती है. वहीं, अगर बहुत ज्यादा ठंड है, तो बैटरी के अंदर के केमिकल धीमे हो जाते हैं, जिससे कार कम दूरी तय कर पाती है. पहाड़ी रास्ते: चढ़ाई वाले रास्तों पर मोटर को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जिससे बिजली की खपत दोगुनी हो जाती है. याद रखें कि अक्सर हम कार में जरूरत से ज्यादा सामान भर लेते हैं, जिसका सीधा असर उसकी क्षमता पर भी पड़ता है.
क्या ईवी लंबी यात्रा के लिए तैयार है?
आज की आधुनिक ईवी गाड़ियां शहर के अंदर और लंबी दूरी की यात्रा, दोनों के लिए सक्षम हैं. 2026 तक भारत में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी काफी मजबूत हो चुका है, जहां फास्ट चार्जर की मदद से टाटा पंच ईवी जैसी गाड़ियां महज 26 मिनट में 20% से 80% तक चार्ज हो जाती हैं. अगर आप सही बैटरी साइज और अच्छी ड्राइविंग तकनीक अपनाते हैं, तो इलेक्ट्रिक कार पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कहीं ज्यादा किफायती और सुकून भरा सफर प्रदान करती है.