Hazard Lights कब जलानी चाहिए और कब नहीं? गलत इस्तेमाल पड़ सकता है भारी, जानिए नियम
भारत में कई बार लोग बारिस, कोहरे या ओवरटेक करतने समय हैजर्ड लाइट्स ऑन करके कार चलाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा करना नियमों के खिलाफ हो सकता हैं. जानिए Hazard Lights कब जलानी चाहिए, कब नहीं और गलत इस्तेमाल करने पर कितना जुर्माना लग सकता है.
बारिश में Hazard Lights जलाकर चलाते हैं कार? जान लें नियम, वरना कट सकता है चालान.
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कार चलाते समय सड़क कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है, अब दूसरों को अपनी मौजूदगी या परेशानी के बारे में बताना जरूरी होता है. इसके लिए हर कार में में हैजर्ड लाइट्स दी जाती हैं, जिन्हें इमरजैंसी फ्लैशर्स या फोर-वे वार्निग लाइट्स भी कहते हैं. लेकिन कई लोग इनका इस्तेमाल गलत समय पर करते हैं. भारत में कोई बारिश में इन्हें ऑन करके गाड़ी चलाता है तो कोई ओवरटेक करते समय ऑन कर देता है. ऐसा करना न सिर्फ दूसरे ड्राइवर्स को भ्रमित कर सकता है बल्कि नियमों का उल्लंघन भी माना जाता है. जानते हैं इनका इस्तेमाल कब सही है.
कब जलाए हैजर्ड लाइट्स
कार खराब हो जाए या बीच सड़क पर रुक जाए
अगर आपकी कार अचानकर खराब हो गई है या किसी तकनीकि दिक्कत की वजहसे सड़क के बीच में रुक गई है तो सबसे पहले हैजर्ड लाइट्स ऑन करें. इससे पीछे आने वाले वाहन चालकों को समय रहते पता चल जाता है कि आगे को परेशानी है और वो अपनी स्पीड कम कर सकते हैं.
खतरनाक जगह पर गाड़ी रोकनी पड़े
अगर गाड़ी को कभी किसी अंधेरी सड़क, हाईवे के किनारे या ब्लाइड टर्न जैसी जगह पर रोकना पड़े, तो हैजर्ड लाइट्स जरूर जलानी चाहिए. इसके अलावा सेंट्रल मोटर्स व्हीकल रुल के मुताबकि वाहन 50 से 100 मीटर की दूसर पर रिफ्लेक्टिव बार्निंग ट्रेंगल लगाना जरूरी माना गया है.
Photo-AI
जब वाहन टो किया जा रहा हो
अगर आपकी कार को टो किया जा रहा है या आपकी गाड़ी किसी दूसरी वाहन को टो कर रही है, तो दोनों वाहनों की हैजर्ड लाइट्स ऑन होनी चाहिए. इससे सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों को पता चलता है कि गाड़ी सामान्य स्पीड में नहीं चल रही है और उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए.
कोहरा, धुंध या भारी बारिश में कब करें इस्तेमाल?
कम विजिबिलिटी वाले मौसम, जैसे घना कोहरा, धुंध या तेज बारिश में हैजर्ड लाइट्स का इस्तेमाल केवल तब करें जब गाड़ी पूरी तरह रुकी हुई हो. अगर वाहन चल रहा है, तो ऐसी स्थिति में हैजर्ड लाइन ऑन रखना नियमों के खिलाफ है.
इन परिस्थितियों में भूलकर भी न जलाएं हैजर्ड लाइट्स
बारिश में गाड़ी चलाते समय, ओवरटेक करते समय या स्पीड में ड्राइविंग के दौरान हैजर्ड लाइट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसके अलावा अगर आपने सड़क पर डबल पार्किंग की है, तो सिर्प हैजर्ड लाइट्स जलाने से वो सही नहीं मानी जाती है. ऐसे इस्तेमाल से दूसरे वाहन चालकों को गलत साइन मिल सकते हैं और एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है.
गलत इस्तेमाल पर लग सकता है जुर्माना
हैजर्ड लाइट्स का इस्तेमाल गलत तरीके से करने पर मोटर वाहन नियमों के तहत 100 रुपये से 500 रुपये तक का जुर्मान लगाया जा सकता है. अगर कोई ड्राइवर बार-बार नियमों को तोड़ता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो सकती है.
सुरक्षित ड्राइविंग के लिए रखें इन बातों का ध्यान
टाइम-टाइम पर अपनी कार की हैजर्ड लाइट्स सही तरीके से काम कर रही हैं या नहीं, इसको चेक करते रहें. अगर रात में किसी सुनसान या अंधेरी जगह पर गाड़ी रोकनी पेड़, तो हैजर्ड लाइट्स के साथ पार्किंग लाइट्स भी ऑन रखें. साथ ही हमेशा अपनी कार में रिफ्लेक्टिव वार्निंग जरूर रखें, क्योंकि कई परिस्थितियों में यह कानूनी रूप से भी जरूरी होता है.
हैजर्ड लाइट्स का मकसद सिर्फ आपात स्थिति में दूसरे लोगों को सतर्क करना है. इन्हें सुविधा के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल करना सड़क सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है.
कार चलाते समय सड़क कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है, अब दूसरों को अपनी मौजूदगी या परेशानी के बारे में बताना जरूरी होता है. इसके लिए हर कार में में हैजर्ड लाइट्स दी जाती हैं, जिन्हें इमरजैंसी फ्लैशर्स या फोर-वे वार्निग लाइट्स भी कहते हैं. लेकिन कई लोग इनका इस्तेमाल गलत समय पर करते हैं. भारत में कोई बारिश में इन्हें ऑन करके गाड़ी चलाता है तो कोई ओवरटेक करते समय ऑन कर देता है. ऐसा करना न सिर्फ दूसरे ड्राइवर्स को भ्रमित कर सकता है बल्कि नियमों का उल्लंघन भी माना जाता है. जानते हैं इनका इस्तेमाल कब सही है.
कब जलाए हैजर्ड लाइट्स
कार खराब हो जाए या बीच सड़क पर रुक जाए
अगर आपकी कार अचानकर खराब हो गई है या किसी तकनीकि दिक्कत की वजहसे सड़क के बीच में रुक गई है तो सबसे पहले हैजर्ड लाइट्स ऑन करें. इससे पीछे आने वाले वाहन चालकों को समय रहते पता चल जाता है कि आगे को परेशानी है और वो अपनी स्पीड कम कर सकते हैं.
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खतरनाक जगह पर गाड़ी रोकनी पड़े
अगर गाड़ी को कभी किसी अंधेरी सड़क, हाईवे के किनारे या ब्लाइड टर्न जैसी जगह पर रोकना पड़े, तो हैजर्ड लाइट्स जरूर जलानी चाहिए. इसके अलावा सेंट्रल मोटर्स व्हीकल रुल के मुताबकि वाहन 50 से 100 मीटर की दूसर पर रिफ्लेक्टिव बार्निंग ट्रेंगल लगाना जरूरी माना गया है.
Photo-AI
जब वाहन टो किया जा रहा हो
अगर आपकी कार को टो किया जा रहा है या आपकी गाड़ी किसी दूसरी वाहन को टो कर रही है, तो दोनों वाहनों की हैजर्ड लाइट्स ऑन होनी चाहिए. इससे सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों को पता चलता है कि गाड़ी सामान्य स्पीड में नहीं चल रही है और उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए.
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कोहरा, धुंध या भारी बारिश में कब करें इस्तेमाल?
कम विजिबिलिटी वाले मौसम, जैसे घना कोहरा, धुंध या तेज बारिश में हैजर्ड लाइट्स का इस्तेमाल केवल तब करें जब गाड़ी पूरी तरह रुकी हुई हो. अगर वाहन चल रहा है, तो ऐसी स्थिति में हैजर्ड लाइन ऑन रखना नियमों के खिलाफ है.
इन परिस्थितियों में भूलकर भी न जलाएं हैजर्ड लाइट्स
बारिश में गाड़ी चलाते समय, ओवरटेक करते समय या स्पीड में ड्राइविंग के दौरान हैजर्ड लाइट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसके अलावा अगर आपने सड़क पर डबल पार्किंग की है, तो सिर्प हैजर्ड लाइट्स जलाने से वो सही नहीं मानी जाती है. ऐसे इस्तेमाल से दूसरे वाहन चालकों को गलत साइन मिल सकते हैं और एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है.
गलत इस्तेमाल पर लग सकता है जुर्माना
हैजर्ड लाइट्स का इस्तेमाल गलत तरीके से करने पर मोटर वाहन नियमों के तहत 100 रुपये से 500 रुपये तक का जुर्मान लगाया जा सकता है. अगर कोई ड्राइवर बार-बार नियमों को तोड़ता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो सकती है.
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सुरक्षित ड्राइविंग के लिए रखें इन बातों का ध्यान
टाइम-टाइम पर अपनी कार की हैजर्ड लाइट्स सही तरीके से काम कर रही हैं या नहीं, इसको चेक करते रहें. अगर रात में किसी सुनसान या अंधेरी जगह पर गाड़ी रोकनी पेड़, तो हैजर्ड लाइट्स के साथ पार्किंग लाइट्स भी ऑन रखें. साथ ही हमेशा अपनी कार में रिफ्लेक्टिव वार्निंग जरूर रखें, क्योंकि कई परिस्थितियों में यह कानूनी रूप से भी जरूरी होता है.
हैजर्ड लाइट्स का मकसद सिर्फ आपात स्थिति में दूसरे लोगों को सतर्क करना है. इन्हें सुविधा के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल करना सड़क सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है.