दिल्ली में पहली बार शुरू हुई हाइड्रोजन बस सर्विस, क्या यह सचमुच CNG की जगह ले पाएगी?

दिल्ली में पहली बार हाइड्रोजन बस सेवा शुरू हो गई है, जिसके बाद सवाल उठने लगा है कि क्या अब CNG बसों का दौर खत्म होने वाला है? जानिए हाइड्रोजन और CNG बसों में कितना बड़ा फर्क है और क्यों अभी पूरी तरह बदलाव आसान नहीं दिख रहा.

BUS.jpg_05f89c

दिल्ली में शुरू हुई Hydrogen बस.

विज्ञापन

Hydrogen Bus in Delhi: दिल्ली की सड़कों पर अब एक नई तकनीक वाली बस दौड़ने लगी है. राजधानी में पहली बार हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस सेवा शुरू की गई है, जिसे सेंट्रल विस्टा इलाके में चलाया जा रहा है. इसे दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC ने क्लीन मोबिलिटी मिशन के तहत शुरू किया है. ऐसे में अब बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में हाइड्रोजन बसें दिल्ली समेत देशभर में चल रही CNG बसों की जगह ले पाएंगी? फिलहाल इसका जवाब इतना आसान नहीं है, क्योंकि जहां हाइड्रोजन बसें प्रदूषण कम करती हैं, वहीं उनकी लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर अभी बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

दिल्ली में शुरू हुई हाइड्रोजन बस सेवा

दिल्ली में शुरू हुई यह नई शटल बस सेवा हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर बेस्ड है. इसका मकसद शहर में प्रदूषण कम करना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ज्यादा क्लीन बनाना है. खास बात यह है कि इन बसों से धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप निकलती है, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होता है.

Advertisment

CNG और हाइड्रोजन बसों में क्या फर्क है?

कई लोग सोचते हैं कि हाइड्रोजन बसें सिर्फ CNG बसों का एडवांस वर्जन हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. CNG बसों में पारंपरिक इंजन होता है, जिसमें गैस जलाकर गाड़ी चलाई जाती है. यही वजह है कि दिल्ली में डीजल बसों के मुकाबले CNG बसों को ज्यादा बेहतर विकल्प माना गया था. वहीं हाइड्रोजन बसें बिल्कुल अलग तरीके से काम करती हैं. इनमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल के जरिए बिजली बनाई जाती है, जो इलेक्ट्रिक मोटर को चलाती है. यानी इसमें ईंधन जलता नहीं है, बल्कि केमिकल रिएक्शन से ऊर्जा तैयार होती है.

क्यों खास मानी जा रही हैं हाइड्रोजन बसें?

हाइड्रोजन बसों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये काफी शांत होती हैं और लोकल लेवल पर लगभग जीरो प्रदूषण करती हैं. इसके अलावा इनकी रीफ्यूलिंग भी बैटरी वाली इलेक्ट्रिक बसों की तुलना में तेजी से हो जाती है. यही कारण है कि दुनियाभर में अब इस तकनीक पर तेजी से काम हो रहा है. घनी आबादी वाले शहरों में जहां हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, वहां हाइड्रोजन बसों को फ्यूचर का बेहतर विकल्प माना जा रहा है.

विज्ञापन

सबसे बड़ी चुनौती है लागत

तकनीक भले ही आधुनिक हो, लेकिन असली दिक्कत इसकी लागत है. दिल्ली में CNG का नेटवर्क पिछले कई सालों में काफी मजबूत हो चुका है. शहरभर में CNG स्टेशन मौजूद हैं और मैकेनिक से लेकर ऑपरेटर तक इस सिस्टम से अच्छी तरह परिचित हैं.

लेकिन हाइड्रोजन के मामले में अभी ऐसा नहीं है. हाइड्रोजन बसें महंगी हैं, उनके लिए अलग स्टोरेज सिस्टम चाहिए और रीफ्यूलिंग स्टेशन भी बहुत कम हैं. यही वजह है कि फिलहाल यह तकनीक बड़े स्तर पर इस्तेमाल होने की बजाय पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित दिखाई देती है.

विज्ञापन

क्या CNG बसों की जगह ले पाएंगी?

फिलहाल ऐसा होना आसान नहीं दिखता. देशभर में हजारों CNG बसें पहले से चल रही हैं और उन्हें पूरी तरह बदलने के लिए भारी निवेश की जरूरत पड़ेगी. इसके साथ ही बड़े स्तर पर हाइड्रोजन सप्लाई नेटवर्क भी तैयार करना होगा.
सरकार अभी इस तकनीक को टेस्ट कर रही है ताकि भविष्य में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन मौजूदा स्थिति को देखें तो आने वाले कई सालों तक CNG बसें भारतीय शहरों में बनी रहेंगी.

विज्ञापन

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

First published on:

Read more: About our editorial guidelines and standards here.

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ