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Kaalchakra: ‘योगिनी दशा’ क्या है, ‘महादशा’ से कितनी अलग है? जानिए पंडित सुरेश पांडेय से इससे बचाव के उपाय

Kaalchakra Today: भारतीय ज्योतिष शास्त्र में, कुंडली में महादशा के साथ योगिनी दशा भी अहम मानी जाती है. पंडित सुरेश पांडेय से जानिए 36 साल के इस दशा चक्र का रहस्य. समझें योगिनी दशा, महादशा से अंतर और बचाव के उपाय.

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Kaalchakra Today 10 July 2026: आपने कुंडली में चलने वाली विंशोत्तरी महादशा के बारे में तो जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि ज्योतिष में एक और खास दशा प्रणाली होती है, जिसे ‘योगिनी दशा’ कहा जाता है? कई बार लोग सिर्फ महादशा देखकर ही भविष्य की बातें जानने की कोशिश करते हैं, लेकिन पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, कुंडली को सही तरीके से समझने के लिए योगिनी दशा को भी देखना जरूरी होता है.

News24 के कालचक्र प्रोग्राम में पंडित जी ने बताया कि योगिनी दशा का एक पूरा चक्र 36 साल का होता है और इसे जीवन में आने वाले अच्छे-बुरे बदलावों को समझने का एक तरीका माना जाता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर योगिनी दशा क्या है, यह महादशा से कैसे अलग है और इससे बचाव के उपाय क्या हैं?

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क्या है योगिनी दशा?

योगिनी दशा वैदिक ज्योतिष की एक खास दशा प्रणाली है, जो जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति और नक्षत्र के आधार पर देखी जाती है. जहां विंशोत्तरी महादशा का पूरा चक्र 120 साल का माना जाता है, वहीं योगिनी दशा 36 साल में पूरी होती है. इसमें आठ योगिनियां होती हैं और हर योगिनी एक तय समय तक अपना प्रभाव दिखाती है.

महादशा और योगिनी दशा में फर्क

पंडित सुरेश पांडेय के मुताबिक, सिर्फ महादशा देखकर कुंडली का पूरा फल समझना मुश्किल हो सकता है. महादशा में मुख्य रूप से ग्रहों की स्थिति और उनके प्रभाव को देखा जाता है, जबकि योगिनी दशा को जीवन के छोटे और सूक्ष्म बदलावों को समझने का एक माध्यम माना जाता है.

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विंशोत्तरी दशा जहां ग्रहों पर आधारित होती है, वहीं योगिनी दशा में आठ योगिनियों के प्रभाव को देखा जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दोनों दशाओं को साथ देखकर कुंडली का ज्यादा बेहतर विश्लेषण किया जा सकता है.

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आठ योगिनियां और उनके प्रभाव

योगिनी दशा में कुल आठ योगिनियां मानी गई हैं. इनमें कुछ को शुभ और कुछ को चुनौती देने वाली माना जाता है. आइए जानते हैं इनके बारे में:

  • मंगला योगिनी (1 साल): इसका संबंध चंद्रमा से माना जाता है. इसे शुभ योगिनी माना जाता है. इस दौरान सुख, सम्मान, संपत्ति और रिश्तों में खुशियां मिलने की संभावना बताई जाती है.
  • पिंगला योगिनी (2 साल): इसका संबंध सूर्य से माना जाता है. इसे चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है. इस दौरान तनाव, खर्च या बदलाव जैसी परिस्थितियां आने की बात कही जाती है.
  • धान्या योगिनी (3 साल): इसके स्वामी गुरु माने जाते हैं. यह शुभ योगिनी मानी जाती है. ज्ञान, करियर और आर्थिक मामलों में प्रगति के संकेत बताए जाते हैं.
  • भ्रामरी योगिनी (4 साल): इसका संबंध मंगल से माना जाता है. इस समय को संघर्ष वाला दौर माना जाता है. काम में रुकावट, तनाव या स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों की संभावना बताई जाती है.
  • भद्रिका योगिनी (5 साल): इसके स्वामी बुध माने जाते हैं. इसे शुभ माना जाता है. बुद्धि, व्यापार, पढ़ाई और बातचीत की क्षमता में सुधार के संकेत बताए जाते हैं.
  • उल्का योगिनी (6 साल): इसका संबंध शनि से माना जाता है. इसे कठिन समय वाली योगिनी माना जाता है. मेहनत, आर्थिक परेशानी या नौकरी से जुड़ी चुनौतियां आने की बात कही जाती है.
  • सिद्धा योगिनी (7 साल): इसके स्वामी शुक्र माने जाते हैं. यह शुभ योगिनी मानी जाती है. कला, रचनात्मकता, सुख-सुविधा और रिश्तों में अच्छे परिणामों से इसे जोड़ा जाता है.
  • संकटा योगिनी (8 साल): इसका संबंध राहु से माना जाता है. इसे सबसे चुनौतीपूर्ण योगिनी माना जाता है. इस दौरान गलत फैसलों से बचने और धैर्य रखने की सलाह दी जाती है.

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योगिनी दशा के उपाय

पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, कठिन समय में कुछ धार्मिक उपाय किए जा सकते हैं:

  • मंगला योगिनी में माता-पिता का सम्मान और सेवा करने की सलाह दी जाती है.
  • भ्रामरी योगिनी में दुर्गा चालीसा का पाठ करने और ओपल रत्न धारण करने की बात कही जाती है.
  • संकटा योगिनी में लाल चंदन का तिलक लगाने, लोहे की वस्तु रखने और मां दुर्गा की पूजा करने की सलाह दी जाती है.
  • सामान्य रूप से राम रक्षा स्तोत्र का पाठ और धार्मिक स्थलों पर साधना करने की बात कही जाती है.

इन बातों का भी रखें ध्यान

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, योगिनी दशा जीवन में आने वाले बदलावों को समझने का एक तरीका है. शुभ समय में अच्छे अवसर मिलने की बात कही जाती है, वहीं कठिन समय में सावधानी और सही निर्णय लेने की सलाह दी जाती है. पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी कुंडली का सही तरीके से विश्लेषण करना जरूरी है.

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पूरा एपिसोड यहां देखें

10 जुलाई के कालचक्र कार्यक्रम में पंडित सुरेश पांडेय ने योगिनी दशा और इसके प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इस एपिसोड को देखकर आप इस विषय को और बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. देखें वीडियो:

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jul 10, 2026 12:15 PM

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श्यामनंदन कुमार पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक सक्रिय ज्योतिषविद हैं। जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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