Why Donald Trump change plane: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) समिट के बाद तुर्किए से अमेरिका लौटते समय सुरक्षा कारणों और सीक्रेट सर्विस के विशेष प्रोटोकॉल के तहत अचानक अपना नया 'एयर फोर्स वन' विमान बदल दिया। कतर से उपहार में मिले अत्याधुनिक बोइंग विमान के बजाय वह पुराने और परखे हुए राष्ट्रपति विमान में सवार हुए। इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन के मिलडेनहॉल एयरबेस पर रुककर एक बार फिर विमान बदला, जिसका मुख्य उद्देश्य संभावित सर्विलांस, तकनीकी खामी या साइबर-सुरक्षा जोखिम को टालना था।
तीन महत्वपूर्ण और अनदेखे पहलू
- 'बगिंग' और सर्विलांस का जोखिम : कतर से मिले नए विमान को हाल ही में अमरीकी बेड़े में शामिल किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी विदेशी देश से मिले या हाल ही में मॉडिफाई किए गए विमानों में गुप्त लिसनिंग डिवाइसेस या सिग्नल इंटरसेप्शन का जोखिम रहता है।
- 'ट्रिपल रिडंडेंसी' प्रोटोकॉल: अमेरिकी सीक्रेट सर्विस राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान हमेशा दो समान 'वी-25ए' (VC-25A) विमानों को साथ लेकर चलती है। जब भी किसी अप्रत्याशित खतरे या रडार ट्रेसिंग का अंदेशा होता है, तो राष्ट्रपति का कॉलसाइन और प्लेन 'मिड-रूट' बदल दिया जाता है।
- यूके के मिलडेनहॉल बेस का रणनीतिक महत्व: ब्रिटेन का RAF Mildenhall एयरबेस अमेरिका का एक प्रमुख रिफ्यूलिंग और री-इक्विपमेंट हब है। वहां विमान बदलना यह दर्शाता है कि सीक्रेट सर्विस ने अटलांटिक महासागर पार करने से पहले पूरी तरह से सैनिटाइज्ड (Sanitised) और सुरक्षित अमेरिकी कमांड सिस्टम वाले प्लेन को प्राथमिकता दी।
क्या कतर से मिले प्लेन को लेकर छिड़ी बहस
कतर द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति बेड़े को उपहार में दिए गए इस लग्जरी बोइंग विमान को लेकर सुरक्षा हलकों में शुरुआत से ही बहस छिड़ी हुई है। पुराने और परखे हुए विमान से यात्रा करने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीक्रेट सर्विस राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थी।
एयर फोर्स वन, हवा में उड़ता हुआ 'व्हाइट हाउस'
एयर फोर्स वन केवल एक प्लेन नहीं है, बल्कि यह हवा में उड़ता हुआ 'व्हाइट हाउस' और कमांड सेंटर है। इस पर न्यूक्लियर अटैक के दौरान भी राष्ट्रपति को देश संचालित करने की सुविधा मिलती है। विदेशी मूल के या हालिया जेट में अमेरिकी रक्षा विभाग के अत्याधुनिक एन्क्रिप्टेड सिस्टम पूरी तरह फिट हुए हैं या नहीं, इसे लेकर सीक्रेट सर्विस हमेशा सतर्क रहती है।
व्हाइट हाउस की चुप्पी और रणनीति
हालांकि व्हाइट हाउस ने इस फेरबदल पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पेंटागन के पूर्व सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह कोई आपातकाल नहीं, बल्कि सीक्रेट सर्विस की एक पूर्व-नियोजित 'टैक्टिकल डिसेप्शन' रणनीति हो सकती है ताकि संभावित विरोधियों को राष्ट्रपति की सटीक लोकेशन का पता न चले।
Why Donald Trump change plane: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) समिट के बाद तुर्किए से अमेरिका लौटते समय सुरक्षा कारणों और सीक्रेट सर्विस के विशेष प्रोटोकॉल के तहत अचानक अपना नया ‘एयर फोर्स वन’ विमान बदल दिया। कतर से उपहार में मिले अत्याधुनिक बोइंग विमान के बजाय वह पुराने और परखे हुए राष्ट्रपति विमान में सवार हुए। इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन के मिलडेनहॉल एयरबेस पर रुककर एक बार फिर विमान बदला, जिसका मुख्य उद्देश्य संभावित सर्विलांस, तकनीकी खामी या साइबर-सुरक्षा जोखिम को टालना था।
तीन महत्वपूर्ण और अनदेखे पहलू
- ‘बगिंग’ और सर्विलांस का जोखिम : कतर से मिले नए विमान को हाल ही में अमरीकी बेड़े में शामिल किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी विदेशी देश से मिले या हाल ही में मॉडिफाई किए गए विमानों में गुप्त लिसनिंग डिवाइसेस या सिग्नल इंटरसेप्शन का जोखिम रहता है।
- ‘ट्रिपल रिडंडेंसी’ प्रोटोकॉल: अमेरिकी सीक्रेट सर्विस राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान हमेशा दो समान ‘वी-25ए’ (VC-25A) विमानों को साथ लेकर चलती है। जब भी किसी अप्रत्याशित खतरे या रडार ट्रेसिंग का अंदेशा होता है, तो राष्ट्रपति का कॉलसाइन और प्लेन ‘मिड-रूट’ बदल दिया जाता है।
- यूके के मिलडेनहॉल बेस का रणनीतिक महत्व: ब्रिटेन का RAF Mildenhall एयरबेस अमेरिका का एक प्रमुख रिफ्यूलिंग और री-इक्विपमेंट हब है। वहां विमान बदलना यह दर्शाता है कि सीक्रेट सर्विस ने अटलांटिक महासागर पार करने से पहले पूरी तरह से सैनिटाइज्ड (Sanitised) और सुरक्षित अमेरिकी कमांड सिस्टम वाले प्लेन को प्राथमिकता दी।
क्या कतर से मिले प्लेन को लेकर छिड़ी बहस
कतर द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति बेड़े को उपहार में दिए गए इस लग्जरी बोइंग विमान को लेकर सुरक्षा हलकों में शुरुआत से ही बहस छिड़ी हुई है। पुराने और परखे हुए विमान से यात्रा करने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीक्रेट सर्विस राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थी।
एयर फोर्स वन, हवा में उड़ता हुआ ‘व्हाइट हाउस’
एयर फोर्स वन केवल एक प्लेन नहीं है, बल्कि यह हवा में उड़ता हुआ ‘व्हाइट हाउस’ और कमांड सेंटर है। इस पर न्यूक्लियर अटैक के दौरान भी राष्ट्रपति को देश संचालित करने की सुविधा मिलती है। विदेशी मूल के या हालिया जेट में अमेरिकी रक्षा विभाग के अत्याधुनिक एन्क्रिप्टेड सिस्टम पूरी तरह फिट हुए हैं या नहीं, इसे लेकर सीक्रेट सर्विस हमेशा सतर्क रहती है।
व्हाइट हाउस की चुप्पी और रणनीति
हालांकि व्हाइट हाउस ने इस फेरबदल पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पेंटागन के पूर्व सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह कोई आपातकाल नहीं, बल्कि सीक्रेट सर्विस की एक पूर्व-नियोजित ‘टैक्टिकल डिसेप्शन’ रणनीति हो सकती है ताकि संभावित विरोधियों को राष्ट्रपति की सटीक लोकेशन का पता न चले।