यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सैन्य मदद करने का फैसला किया है. जिसके अनुसार सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की संख्या को 15000 से बढ़ाकर 25000 किया जाएगा. पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत रक्षा सहयोग को बढ़ाने की पहल पाकिस्तान ने की है, ताकि सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों का सामना करने में मदद मिले. वहीं सैन्य सहायता केवल सैनिकों की तैनाती तक ही सीमित नहीं रहेगी. बल्कि पाकिस्तान एयर डिफेंस सिस्टम, रॉकेटो-मिसाइलों और ड्रोन के जरिए सऊदी अरब की डिफेंस पावर को मजबूत करेगा. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में इस्लाम के 2 सबसे पवित्र शहरों को निशाना बनाते हुए हमला किया, जिसके चलते सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई है.
मक्का रक्षा समझौता अभी सक्रिय नहीं हुआ
बता दें कि 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ हुआ था, जिसके तहत तीनों एक एक दूसरे को रक्षा सहयोग ही नहीं करेंगे, बल्कि अगर तीनों देशों में से किसी एक देश पर हमला होगा तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों देश मिलकर दुश्मन का सामना करेंगे. लेकिन मक्का संयुक्त रक्षा समझौता अभी पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है, लेकिन इसके सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले से चल रहा है. 25 सितंबर को तीनों देशों के सैन्य प्रमुख सऊदी अरब के रियाद में मिले और हूती विद्रोहियों के हमलों पर चर्चा की. हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई. इस्लाम के पवित्र स्थलों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता जताई और उसके बाद पाकिस्तान ने सैन्य तैनाती को बढ़ाने का फैसला किया.
रियाद में तीनों देशों आपातकालीन बैठक
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के अनुसार, अगले सप्ताह रियाद में तीनों देशों की इमरजेंसी बैठक होगी, जिसमें मक्का संयुक्त रक्षा समझौता फाइनल किया जा सकता है. हालांकि बैठक की तारीख अभी फाइनल नहीं हुई है, लेकिन 6 से अधिक देशों ने रक्षा समझौते में शामिल होने के इच्छा जताई है. लेकिन समझौते के पूरी तरह से लागू होने तक नए सदस्यों के अनुरोधों पर विचार नहीं कर सकते, इसलिए नए सदस्य जोड़ने में एक साल का समय लग सकता है. रियाद में होने वाली बैठक में हूती विद्रोहियों को लेकर ईरान के प्रस्ताव पर भी मंथन किया जा सकता है. हालांकि ईरान ने कोई औपचारिक लिखित प्रस्ताव नहीं दिया था, लेकिन पाकिस्तान और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच विचार-विमर्श हुआ तो हूती विद्रोहियों को लेकर एक प्रस्ताव रखा गया, जिस पर विचार करने का समय भी दिया गया.