क्या है 3500 करोड़ का 'बॉलरूम' प्रोजेक्ट? जिस पर कोर्ट ने लगाई रोक, जानें कांग्रेस क्यों नहीं दे रही ट्रंप के प्रस्ताव को मंजूरी?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बॉलरूम प्रोजेक्ट पर कोर्ट ने फिर से रोक लगा दी है और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है. क्योंकि बॉलरूम प्रोजेक्ट राष्ट्रपति ट्रंप का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसे कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिल पा रही है.

donald trump ballroom project

फेडरल कोर्ट के फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति ट्रंप सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ से दुनिया को डराते हैं, लेकिन अमेरिका अदालतें राष्ट्रपति ट्रंप को झटके देती हैं. पहले टैरिफ और बर्थ राइट सिटीजनशिप मामले में कोर्ट ने ट्रंप के खिलाफ फैसला दिया. अब अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने प्रोजेक्ट पर रोक लगाते हुए कहा है कि वे व्हाइट हाउस के किरायेदार हैं, मालिक नहीं इसलिए उनकी सरकार कांग्रेस की मंजूरी के बिना व्हाइट हाउस में इतना बड़ा बदलाव नहीं कर सकती. कांग्रेस की मंजूरी मिल जाए तो बॉलरूम बनने से कोई प्रॉब्लम नहीं, लेकिन मंजूरी के बिना प्रोजेक्ट को आगे न बढ़ाएं.

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क्या है व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में ‘ईस्ट विंग’ की जगह बॉलरूम बनाना चाहते हैं. इस प्रोजेक्ट पर करीब 400 मिलियन डॉलर (3500 करोड़ रुपये) खर्च होंगे. बॉलरूम 90000 वर्ग फुट एरिया में बना विशालकाय सिक्योरिटी कैंपस होगा, जिसके अंदर व्हाइट हाउस के ऑफिशियल प्रोग्राम, ऑफिशियल इवेंट, ऑफिशियल डिनर होंगे. इसके अंदर करीब 1000 मेहमानों के बैठने की क्षमता होगी. बॉलरूम के अंदर अंडरग्राउंड बम शेल्टर, मिसाइल, ड्रोन से बचाव करने वाला सिस्टम और मेडिकल फैसिलिटीज होंगी. इस प्रोजेक्ट के लिए ट्रंप सरकार ने अक्टूबर 2025 में पुराने पूर्वी विंग को ध्वस्त कर दिया था.

कोर्ट के फैसले पर ट्रंप की प्रतिक्रिया

फेडरल कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर लिखा कि बॉलरूम प्रोजेक्ट सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी है और इसके लिए वे फेडरल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे. फेडरल कोर्ट का फैसला राजनीतिक भावनाओं से प्रेरित है, जबकि व्हाइट हाउस के मंत्री, सांसद, अधिकारी और खुद राष्ट्रपति हमलों के खतरे के दायरे में हैं. सुप्रीम कोर्ट को इस अन्यायपूर्ण फैसले को पलटना होगा. बॉलरूम न सिर्फ एक प्रोजेक्ट है, बल्कि देश के राष्ट्रपतियों और विदेशों से आने वाले मेहमानों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम है, क्योंकि देश अपने कई राष्ट्रपति हमलों में खो चुका है.

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पिछले साल कोर्ट में दर्ज हुआ था केस

वॉशिंगटन में ‘US कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट’ ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति व्हाइट हाउस का मालिक नहीं होता, बल्कि अस्थायी किरायेदार होता है. इसलिए कोर्ट ‘नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन’ के स्थगन आदेश (इंजंक्शन) को बरकरार रखती है. पिछले साल ट्रंप सरकार ने कांग्रेस से मंजूरी लिए बिना ‘ईस्ट विंग’ को गिरा दिया और 90000 वर्ग फीट (8360 वर्ग मीटर) का बॉलरूम बनाना शुरू कर दिया. ट्रंप की इस वर्किंग के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर अब फैसला आया है, जिसके खिलाफ ट्रंप सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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