अमेरिका पर ईरान का पलटवार, लारक द्वीप पर हमले के जवाब में जॉर्डन में US मिलिट्री बेस को बनाया निशाना

मिडिल ईस्ट में तनाव गहरा गया है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका-ईरान भिड़ रहे हैं. अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया था तो पलटवार करते हुए ईरान ने जॉर्डन में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला करके भारी नुकसान पहुंचाया.

Middle East War | Donald Trump | Hormuz Strait

जंग में इजरायल से ज्यादा अमेरिका का नुकसान हुआ है. (Credit- X/AI)

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान में तनाव फिर गहराया है. अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री खदानें होने की आशंका के चलते ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया तो ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया. हमले में कई सैन्य कर्मियों और आम लोगों को मारे जाने की खबर है. IRGC ने जॉर्डन के अजराक में US मिलिट्री बेस के टेक्निकल स्ट्रक्चर को निशाना बनाया. मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस और किंग हुसैन एयर बेस पर लड़ाकू विमानों पर हमला किया.

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अमेरिका ने लारक द्वीप पर हमला क्यों किया था?

बता दें कि अमेरिकी सेना ने रविवार को लारक द्वीप पर बने ईरान के मिसाइल लॉन्चरों पर हमला किया था, क्योंकि IRGC के जवान होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री खदानें बनाने के लिए रॉकेट लॉन्च करने वाले थे. जुलाई के आखिर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमलों पर रोक लगा दी थी, लेकिन उसके बाद अब अमेरिका ने ईरान में पहला हमला किया है. होर्मुज के जिस इलाके में समुद्री खदानें होने की आशंका है, उस पर अमेरिकी सेना बारीकी से नजर रख रही है. क्योंकि अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से तेल-गैस और अन्य समुद्री व्यापार बिना किसी खतरे और डर के आराम से हो सके.

समुद्री खदानों को लेकर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी

अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री खदानें हटा दी थीं, लेकिन ईरान फिर से समुद्री खदानें बनाने का काम कर रहा था. ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि नई खदानें बिछाने का प्रयास किया तो अंजाम भुगतना होगा. अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री खदानें को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ पॉलिसी लागू की है. लेकिन ईरान नहीं माना तो अमेरिका ने समुद्री खदानें बनाने से पहले ही ईरान के दोनों मिसाइल लॉन्चर तबाह कर दिए. इसके जवाब में ही ईरान ने जॉर्डन में किंग हुसैन और अजराक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया. हमले में 2 लोगों की मौत हुई है और 2 अन्य घायल हुए हैं.

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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देश में विवाद क्या?

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद किया हुआ है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि होर्मुज स्ट्रेट ओपन रहेगी, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का अधिकार है. लेकिन ईरान ने अमेरिका के दावे को सिरे से खारिज किया और कहा कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान की थी, है और रहेगी. अमेरिका इसे कब्जाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन उसे अंजाम भुगतना होगा. इसी विवाद के चलते अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं करेगा, तब तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगी और होर्मुज से गुजरने वालों को ईरान को टैक्स देना होगा.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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