1990 बनाम 2026 खाड़ी युद्ध: कैसे बदले हालात, क्यों इस बार दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा बड़ा असर?

US-Iran War Impact: अमेरिका-ईरान युद्ध ने ग्लोबल इकॉनमी को झकझोर कर रख दिया है. 1990 के खाड़ी युद्ध और 2026 के संकट के बीच क्या हैं बड़े अंतर, जानिए इस एक्सप्लेनर में

Iran Israel War

Credit: Social Media

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अमेरिका और ईरान के युद्ध ने सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है. आखिर ऐसी क्या वजह है कि वर्तमान में हो रहे इस युद्द ने अर्थव्यवस्था को खोखला करना शुरु कर दिया है. क्या इससे पहले हुए खाड़ी देशों मे हुए युद्द के दौरान भी इस तरह के हालात पैदा हुए थे. न्यूज 24 आपको बारीकी से खाड़ी युद्ध की नीति और रणनीति के बारे में जानकारी दे रहा है. विदेश मामलों के जानकार रवि अरोड़ा के मुताबिक 90 के दशक में भी खाड़ी युद्ध हुआ था. उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हुआ करते थे. उनकी ताकत ऐसी थी कि उन्होंने किसी भी युद्द में भाग नही लेते हुए और ना ही युद्द के दौरान किसी भी देश का सपोर्ट करते हुए उस वक्त खाड़ी देश में फंसे लगभग 1 लाख 75 हजार भारतीयों को सकुशल देश वापसी करा ली थी. लेकिन अब अगर साल 2026 की बात करें तो वर्तमान सरकार बातचीत के आधार पर खाड़ी देश में फंसे भारतीय नागरिकों को घर वापसी करवाने में लगी हुई है. वर्तमान में जो हालात तेल और गैस संकट के लिए हो रहे है उसे ठीक करने में लगी हुई है.

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2026 के युद्ध में क्या हो रहा है?

न्यूज 24 आपको साल 1990 में खाड़ी देश में हुए युद्ध और साल 2026 में हो रहे खाड़ी देशों के युद्ध के बीच क्या हालात और अंतर है, यह बता रहा है. जब कुवैत को अपना प्रांत मानते हुए सद्दाम हुसैन ने बड़ा हमला किया था तब मौजूदा प्रधानमंत्री ने विदेशी कूटनीति का इस्तेमाल करते हुए लगभग पौने दो लाख भारतीय को सकुशल भारत में वापसी कराई थी. और युद्ध के हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अमेरिका के साथ सैन्य ताकत साझा करने से मना कर दिया था. वहीं अगर साल 2026 में हुए ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध ने तेल,गैस आपूर्ति के साथ ही आयात-निर्यात पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है. जिससे करोड़ों का नुकसान हो रहा है. लेकिन अब तक एक करोड़ से ज्यादा भारतीय को सुरक्षित निकाला जा चुका है. तेल और गैस की किल्लत से महंगाई आसमान छू रही है. 1990 का युद्ध इराक और कुवैत तक ही सीमित था, लेकिन वर्तमान के युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले लिया है. पहले फोकस नागरिकों को सही सलामत घर वापसी कराने पर था तो अब फोकस घर वापसी कराने के साथ ही अपने व्यापार को भी नुकसान होने से बचाने का है.

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