नेपाल की तरह तिब्बत में तबाही की तस्वीरें क्यों नहीं आई सामने, आखिर क्या छिपा रहा है चीन?
Why China Limits Tibet Flood Footage: नेपाल में आई तबाही का मंजर दुनिया ने देखा, कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, लेकिन चीन के कब्जे वाले इलाके तिब्बत का सिर्फ एक फुटेज सामने आया है जिसमें ग्यिरोंग पोर्ट बाढ से तबाह होते दिख रहा है, ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि चीन आखिर क्या छिपाना चाह रहा है.
ग्यिरोंग पोर्ट में बाढ़ की तस्वीर (Photo-X/@shen_shiwei
)
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Tibet Flash Floods: नेपाल और तिब्बत के बीच एक अहम रास्ते, ग्यिरोंग पोर्ट से बाढ़ के पानी के बहने की चौंकाने वाली तस्वीरें बड़े पैमाने पर फैली हैं. फुटेज में इलाके से पानी की तेज धाराएं बहती हुई दिख रही हैं और लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं. हालांकि, खबर है कि चीन के लोगों ने ये फुटेज बहुत कम देखी हैं. चीन के स्टेट ब्रॉडकास्टर ने इस आपदा की सिर्फ एक फोटो दिखाई है, जबकि देश के कड़े नियंत्रण वाले इंटरनेट पर इसके वीडियो और चश्मदीदों के बयान मिलना मुश्किल रहा है.
पीड़ितों के बारे में कम जानकारी
चीनी अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया है और प्रभावित इलाकों में इमरजेंसी टीम को तैनात किया गया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी एक इमरजेंसी मीटिंग की अध्यक्षता की है, जबकि पीएम ली कियांग राहत कार्यों की देखरेख के लिए उस इलाके में गए हैं. आधिकारिक अपडेट खास तौर से रेस्क्यू ऑपरेशंस, लापता लोगों और बाढ़ से बनी बैरियर लेक से पैदा हुए खतरे पर फोकस्ड रहे हैं. हालांकि, बचे हुए लोगों और लापता लोगों के परिवारों की स्वतंत्र जानकारी बहुत कम मिल रही है. विदेशी पत्रकारों को भी सरकार की मंजूरी के बिना तिब्बत जाने पर पाबंदियों का सामना करना पड़ता है, जिससे इंडिपेंडेंट रिपोर्टिंग मुश्किल हो जाती है.
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This is horrify! Pray🙏🙏🙏 A mudslide in🇳🇵#Nepal caused severe casualties at🇨🇳#China's border port of Gyirong (吉隆), Shigatse in southwestern Xizang Autonomous Region at around 10:30 a.m. on August 26.
इंफॉर्मेशन के लिमिटेड फ्लो ने तिब्बत से जुड़े कंटेंट पर बीजिंग के कड़े कंट्रोल की तरफ फिर से ध्यान खींचा है. इस इलाके का चीनी सरकार के साथ राजनीतिक तनाव का लंबा इतिहास रहा है, और सरकार को वहां अपनी नीतियों के लिए अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा है. राइट्स ग्रुप्स ने आरोप लगाया है कि बाढ़ के वीडियो और चश्मदीदों के अन्य बयान सोशल मीडिया से हटा दिए गए हैं. ‘इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत’ ने हताहतों और तबाही के बारे में पूरी और सत्यापित जानकारी की मांग की है.
क्या है बीजिंग की प्रायोरिटी?
चीनी अधिकारियों ने साथ ही स्थानीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों से राहत कार्यों में मदद करने और लोगों का भरोसा और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने की गुजारिश की है. जानकारी की कमी के कारण, इस इलाके के बाहर रहने वाले तिब्बतियों के लिए बाढ़ से प्रभावित अपने रिश्तेदारों से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है. हालांकि बीजिंग का कहना है कि उनका फोकस लोगों की सुरक्षा और सामान्य स्थिति बहाल करने पर है, लेकिन इंडिपेंडेंट रिपोर्टिंग पर भारी पाबंदियों का मतलब है कि तिब्बत में आपदा का असर आम लोगों पर कितना पड़ा है, ये क्लियर नहीं है.