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अफगानिस्तान में गुलामी हुई वैध, अपराध पर मौलवियों को नहीं मिलेगी सजा, तालिबान सरकार ने लागू किए नए कानून

अफगानिस्तान में नए कानून लागू हुए हैं। इसमें अब गुलामी प्रथा को फिर से वैध करार दिया गया है। साथ ही मुस्लिम धर्मगुरुओं को भारी फायदा पहुंचाते हुए अपराध करने पर भी सजा से मुक्त रखा गया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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Edited By : Raghav Tiwari Updated: Jan 28, 2026 14:20

अफगानिस्तान एक बार फिर चर्चा में है। तालिबान सरकार ने ऐसे कानून लागू किए हैं जिसको लेकर विवाद शुरू हो गया है। अफगानिस्तान में एक बार फिर गुलामी प्रथा को मान्यता मिल गई है। तालिबान सरकार ने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड फॉर कोर्ट के तहत नए कानून लागू किए। इसमें बताया गया कि अब देश में मौलवियों पर केस नहीं चलाया जाएगा। चाहे वे अपराध ही क्यों न करें। इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है।

बता दें कि तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने नए कानून लागू किए हैं। तालिबान सरकार ने नए क्रिमिनल प्रोसीजर कोड को मंजूरी दी है। कोर्ट में इसे लागू करने के आदेश भी दे दिए। ये 58 पन्नों का दस्तावेज है। इसमें ई जगह पर गुलाम और मालिक जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। नए कानून में अफगान सोसाइटी में मौलवी को सबसे ऊपर रखा गया है।

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सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि अगर कोई मुस्लिम धर्म गुरु कोई अपराध भी करते हैं तो उनपर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। यानी कि नए कानून के तहत अब अपराध करने पर भी मौलवी को सजा नहीं दी जाएगी।

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शारीरिक हिंसा अलग से परिभाषित

नए कानून में शारीरिक हिंसा की नई परिभाषा दी गई। अफगान इंटरनेशनल आउटलेट के अनुसार, नई सहिंता को तहत शारीरिक हिंसा भी तभी माना जाएगा, जब हड्डियां टूट जाए या स्कीन फट जाए। बताया कि एक पिता अपने 10 वर्षीय बेटे को नमाज न पढ़ने जैसी गलतियों के लिए दंडित कर सकता है। नेशनल रजिस्टेंस फ्रंट के मीडिया सेल ने बताया कि तालिबान ने गुलामी का कानूनी दर्जा दे दिया है। जानकारी के अनुसार, अब कोर्ट आरोपियों की सामाजिक स्थिति के आधार पर फैसला सुनाएगी।

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First published on: Jan 28, 2026 07:07 AM

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