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रोते-बिलखते लोग, ढह चुकी बिल्डिंगें, हर तरफ चीख पुकार, ईंट-पत्थरों के बीच अपनों को तलाशते लोग, जहां देखो वहां तबाही का मंजर…यह तस्वीर है अफ्रीकी देश मोरक्को की, जो 7.2 की तीव्रता का भूकंप आने के बाद पूरी दुनिया ने देखी। बर्बादी का ऐसा मंजर कि लोगों की आंखों में आंसू आ गए। मलबे के नीचे दबे लोगों को बचाने की कोशिश जारी है। आपदा को देखते हुए सरकार ने 3 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित कर रखा है।

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वहीं भूकंप से अब तक 2 हजार लोगों की जान जा चुकी है। करीब 3 हजार लोग घायल हुए। सेना, पुलिस और सशस्त्र बल के जवान बचाव कार्यों में जुटे हैं। ज्यादातर इमारतें ध्वस्त हो चुकी हैं। सड़कों पर ही अस्पताल चल रहे हैं। एटलस पहाड़ी क्षेत्र में आए भूकंप ने मिट्टी से बने घरों को ताश के पत्तों की तरह ढेर घर दिया। किसी ने परिवार खोया तो किसी से सपनों का आशियाना छिन गया। 12वीं शताब्दी में बनी प्रसिद्ध कौतौबिया मस्जिद डैमेज हुई।

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प्रसिद्ध लाल दीवार को भी भूकंप ने हिलाकर रख दिया। कई जगह दीवार ढह गई है। संयुक्त राज्य भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, मोरक्को में आए भूकंप का केंद्र मराकेश से 72 किलोमीटर उत्तर पूर्व में 18.5 किलोमीटर की गहराई में था। करीब 60 साल बाद ऐसा विनाशकारी भूकंप आया। इससे पहले 1960 में भूकंप ने मोरक्को में तबाही मचाई थी। तब करीब 12 हजार लोग मारे गए थे। तीव्रता के लिहाज से इतिहास का सबसे भयानक भूकंप 1960 में चिली में आया था।

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