Pok Rawalakot False Flag JAAC Protest: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में पिछले एक महीने से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस्लामाबाद के कथित अवैध कब्जे और बुनियादी अधिकारों के हनन के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस जनआंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और रेंजर्स द्वारा की गई गोलीबारी में अब तक 30 से अधिक आम नागरिकों की मौत और 200 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया है.
यह पूरा आंदोलन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसने 'मुजफ्फराबाद चलो' अभियान का आह्वान किया है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएं, महंगाई पर लगाम लगे और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का दमन खत्म हो. PoK में बाजार, परिवहन और सरकारी दफ्तर पूरी तरह बंद हैं और एक व्यापक बंद की स्थिति बनी हुई है.
रावलकोट में 'फॉल्स-फ्लैग' साजिश का आरोप
आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने रावलकोट के पास एक 'फॉल्स-फ्लैग' घटना को अंजाम दिया है. दावा किया जा रहा है कि बलूचिस्तान में अलग-अलग हमलों में मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों के शवों को रावलकोट लाया गया और उन्हें PoJK में उग्रवादी हमले का शिकार बताकर पेश किया गया. इस साजिश का मकसद आम नागरिकों पर की जा रही हिंसक कार्रवाई और सैन्य ऑपरेशन को सही ठहराना था.
मीरवाइज उमर फारूक ने की निंदा
नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों की कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता और पूर्व हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार से संयम बरतने की अपील करते हुए मौतों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है. वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने क्षेत्र में इंटरनेट, जरूरी सामान की आपूर्ति और मीडिया पर लगाई गई पाबंदियों पर गंभीर चिंता जताई है.
JAAC नेताओं का कहना है कि जून के शुरुआत में संगठन पर बैन लगाने और नेताओं को हिरासत में लेने के बाद से यह आंदोलन और अधिक उग्र हो गया है. अपनों को खो चुके परिवार अब इंसाफ और जवाबदेही तय होने तक पीछे न हटने का संकल्प ले चुके हैं.
Pok Rawalakot False Flag JAAC Protest: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में पिछले एक महीने से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस्लामाबाद के कथित अवैध कब्जे और बुनियादी अधिकारों के हनन के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस जनआंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और रेंजर्स द्वारा की गई गोलीबारी में अब तक 30 से अधिक आम नागरिकों की मौत और 200 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया है.
यह पूरा आंदोलन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसने ‘मुजफ्फराबाद चलो’ अभियान का आह्वान किया है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएं, महंगाई पर लगाम लगे और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का दमन खत्म हो. PoK में बाजार, परिवहन और सरकारी दफ्तर पूरी तरह बंद हैं और एक व्यापक बंद की स्थिति बनी हुई है.
रावलकोट में ‘फॉल्स-फ्लैग’ साजिश का आरोप
आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने रावलकोट के पास एक ‘फॉल्स-फ्लैग’ घटना को अंजाम दिया है. दावा किया जा रहा है कि बलूचिस्तान में अलग-अलग हमलों में मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों के शवों को रावलकोट लाया गया और उन्हें PoJK में उग्रवादी हमले का शिकार बताकर पेश किया गया. इस साजिश का मकसद आम नागरिकों पर की जा रही हिंसक कार्रवाई और सैन्य ऑपरेशन को सही ठहराना था.
मीरवाइज उमर फारूक ने की निंदा
नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों की कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता और पूर्व हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार से संयम बरतने की अपील करते हुए मौतों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है. वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने क्षेत्र में इंटरनेट, जरूरी सामान की आपूर्ति और मीडिया पर लगाई गई पाबंदियों पर गंभीर चिंता जताई है.
JAAC नेताओं का कहना है कि जून के शुरुआत में संगठन पर बैन लगाने और नेताओं को हिरासत में लेने के बाद से यह आंदोलन और अधिक उग्र हो गया है. अपनों को खो चुके परिवार अब इंसाफ और जवाबदेही तय होने तक पीछे न हटने का संकल्प ले चुके हैं.