Parmod chaudhary
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World Latest News: स्वीडन में कूड़े से निपटने के लिए अनोखी पहल शुरू की गई है। जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। तेज दिमाग वाले कौवों को खास तौर पर ट्रेंड किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को कीप स्वीडन टिडी फाउंडेशन ने शुरू किया है। कौवों को दिमागी तौर पर काफी तेज माना जाता है। फ्रांस के बाद अब स्वीडन इन कौवों को पर्यावरण बचाने के काम में जुटा रहा है। पहले कौवे सिगरेट के टुकड़े सड़कों से उठाएंगे, बाद में इनको सेवा के बदले खाना दिया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक कौवों पर पहले 2018 में भी ऐसा एक्सपेरिमेंट किया जा चुका है। पहले फ्रांस में वेस्ट पुय डू फो थीम पार्क में कौवों को सिगरेट उठाने के काम में ट्रेंड किया गया था। यह प्रयोग सफल रहा था।
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दूसरी चीजों को भी ये कौवे उठा देते थे। इन टुकड़ों को उठाकर वे खाते नहीं थे। बल्कि एक मशीन के पास लेकर आते थे। उसमें सिगरेट और दूसरी चीजों के टुकड़े डाल देते थे। जिसके बाद मशीन से उनके लिए खाना निकलता था। जिसको वे खा लेते थे। पहले इन पक्षियों के ऊपर शोध किया गया। जिसके बाद इनको पर्यावरण संरक्षण के काम में जुटाया गया। 2022 में कौवों को ट्रेंड करने का काम स्वीडन में शुरू किया गया। अब यहां कौवे इधर-उधर पड़े बट्स उठाते हैं। बदले में इनको खाना दिया जाता है। सोशल मीडिया पर मशीन में सिगरेट के बट्स डालते कौवे के वीडियो को काफी लाइक मिल रहे हैं। लोग कमेंट कर इस मुहिम के ऊपर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
Crows (yes, crows!) are trained to pick up cigarette butts in a #Swedish city.
The method relies on reward-based training: the clever birds receive food after they place discarded cigarette butts into a machine. The project was designed by a startup near #Stockholm. pic.twitter.com/yBd1zOTiHq— DW Culture (@dw_culture) February 3, 2022
इन कौवों को बेकार सामान को उठाने के लिए ट्रेंड करने की मुहिम को कोर्विड क्लीनिंग का नाम दिया गया है। मुहिम को लेकर पर्यावरण प्रेमी क्रिश्चियन गुंथर-हैनसेन का कहना है कि कौवों को फोर्स नहीं किया गया। वे अपनी इच्छा से मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं। सिगरेट के टुकड़ों को प्लास्टिक प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक माना जाता है। 4.5 ट्रिलियन (4500000000000) टुकड़े दुनियाभर में फैले हुए हैं। 20 मिलियन स्वीडिश क्रोना (22 लाख टुकड़े) हल साल स्वीडन में फैल जाते हैं।
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