परमाणु ठिकानों के पास ड्रोन और सेना तैनात
सैटेलाइट तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों को सुरक्षित कर रहा है और इनके आस-पास करीब 1000 ड्रोन तैनात कर चुका है. टैंकों और फाइटर जेट के साथ सेना भी तैनात है. तस्वीरें ईरान के फोर्डो और नतांज परमाणु ठिकानों की है, जिनके चारों को मिट्टी के ढेरों से किलेबंदी की गई है. ठिकानों की छतें भी मिट्टी और मलबे से बनाई गई है, यानी ईरान ने अपने यूरेनियम स्टॉक को मिट्टी के नीचे गहराई में दबा दिया है, जिसे अमेरिका इस बार शायद भेद न पाए.
अमेरिका पर परमाणु हमला कर सकता ईरान
बता दें कि जून 2025 में जब ईरान और इजरायल की जंग छिड़ी थी, उस समय भी 12 जून को अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी. तब अमेरिका ने ईरान के फोर्डो और नतांज परमाणु ठिकानों को तबाह किया था. वहीं उस समय अमेरिका ने अचानक हमला किया था, लेकिन इस बार अमेरिका पहले से हमला करने की जानकारी दे चुका है, ऐसे में ईरान भी जवाबी हमले की तैयारी कर चुका है और जिस तरह से ईरान जवाबी कार्रवाई की धमकी दे रहा है तो हो सकता है कि वह परमाणु हथियारों से हमला करे, क्योंकि आज तक यह क्लीयर नहीं हुआ है कि ईरान के पास परमाणु हथियार हैं या नहीं.
ईरान से आखिर क्या चाहता है अमेरिका?
बता दें कि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम प्रोसेसिंग प्रोग्राम को बिल्कुल बंद कर दे. बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रोग्राम पर भी रोक लगा दे. हमास, हिज़्बुल्लाह तथा हूती जैसे चरमपंथी संगठनों को समर्थन देना बंद कर दे. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इस समय बुरे हालातों से गुजर रहा है. ऐसे में अगर अमेरिका दबाव डालता रहा और ईरान पर हमला करता है तो नुकसान उठाना पड़ सकता है.
क्योंकि सभी जानते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने की टेक्नोलॉजी है और अगर उसने परमाणु हथियार बना भी लिए तो भी, उसे अभी तक इसका इस्तेमाल किसी के खिलाफ नहीं किया है. ऐसे में अमेरिका का हमला यह साबित कर देगा कि संयम बरतना और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने से भी सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती.