अमेरिका के टेक्सास में भारतीय मूल के काउंटी जज केपी जॉर्ज को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी ठहराया गया है, उनपर चुनावी फंड्स का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है. जूरी ने फोर्ट बेंड काउंटी के जज केपी जॉर्ज को दो मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया. यह फैसला एक हफ्ते तक चली सुनवाई के बाद आया. वकीलों ने आरोप लगाया कि जॉर्ज ने अपने चुनावी अभियान के लिए मिले पैसों का निजी इस्तेमाल किया. जांच के दौरान सामने आया कि उन्होंने अपने कैंपेन फंड से करीब 46,000 डॉलर से ज्यादा की राशि अपने प्राइवेट अकाउंट में ट्रांसफर की. इस पैसे का इस्तेमाल घर से जुड़े खर्चों और बाकी जरूरतों के लिए किया गया.
16 जून को होगा सजा का ऐलान
हालांकि बचाव पक्ष का कहना था कि ये पैसा जॉर्ज का ही था और उन्होंने इसे अपने अभियान को दिए गए पर्सनल लोन की वापसी के तौर पर लिया. लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और उन्हें दोषी करार दिया. कानून के मुताबिक, ये तीसरी श्रेणी का अपराध है, जिसमें 2 से 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. सजा का ऐलान 16 जून को किया जाएगा. फैसले के बाद जॉर्ज को हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया. फिलहाल उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना पड़ा है और वो सजा सुनाए जाने तक पद पर बने रह सकते हैं.
केरल के रहने वाले हैं जॉर्ज
केपी जॉर्ज मूल रूप से केरल के रहने वाले हैं और 1993 में अमेरिका गए थे. उनका जन्म एक ऐसे गांव कक्कुडु में हुआ था जहां बिजली नहीं थी. वो बचपन से ही मलयालम बोलते थे, घास-फूस की झोपड़ी में रहते थे और उनके पिता ट्रक ड्राइवर के रूप में रोजाना सिर्फ कुछ अमेरिकी डॉलर कमाते थे. स्थानीय समाचार आउटलेट ह्यूस्टन पब्लिक मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मूल निवासी केपी जॉर्ज ने 2018 में इतिहास रच दिया, जब वो फोर्ट बेंड काउंटी के न्यायाधीश के रूप में चुने जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बने. उन्हें भारतीय-अमेरिकी समुदाय में एक प्रभावशाली नेता माना जाता रहा है. जॉर्ज को दोषी ठहराने का मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ये अमेरिकी राजनीति में पारदर्शिता और फंडिंग के नियमों पर सवाल उठाता है. अगर सजा के बाद उन्हें पद से हटाया जाता है, तो ये भारतीय मूल के नेताओं के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा.










