मस्क की एंट्री से कूटनीतिक गलियारों में खलबली
2 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बातचीत में मस्क की मौजदूगी में कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। क्योंकि एलन मस्क अब न तो ट्रंप सरकार का हिस्सा हैं। न ही किसी सरकारी पद पर हैं और न ही उनका मिडिल ईस्ट की जंग से कोई कनेकशन है तो जंग खत्म कराने के लिए जब 2 महाशक्तियों के राष्ट्राध्यक्ष आपस में फोन पर बात कर रहे हैं तो बीच में तीसरे शख्स के तौर पर एलन मस्क कॉल से कनेक्ट क्यों हुए?
व्हाइट हाउस का टिप्पणी करने से साफ इनकार
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ओर से मामले में कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं दी गई है, लेकिन व्हाइट हाउस से जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया गया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि फोन कॉल में मस्क की मौजूदगी पर सीधे टिप्पणी नहीं करेंगे, ट्रंप के मोदी के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और दोनों की बातचीत पॉजिटिव रही।
मिडिल ईस्ट की जंग और होर्मुज स्ट्रेट पर बात हुई
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईरान युद्ध, मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बातचीत हुई थी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर की भी बात हुई थी। ट्रंप-मोदी की बातचीत में एलन मस्क की मौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन अभी तक तक उनकी मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई है और न ही मामले में उनकी भूमिका क्लीयर हो पाई है।
बैकचैनल डिप्लोमेसी के संकेत मस्क की मौजूदगी
बता दें कि अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप के संबंध सुधर सकते हैं। मस्क अपने बिजनेस स्पेस और एनर्जी के लिए मिडिल ईस्ट और भारत की मार्केट में जाना चाहते हैं, लेकिन जंग के कारण दोनों मार्केट प्रभावित हो रही हैं। एलन मस्क भारत में अपना कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस के लिए उन्हें भारत सरकार से मंजूरी का इंतजार है। फोन कॉल में उनकी मौजूदगी को बिजनेस स्ट्रेटजी कहा जा सकता है।