ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर भीषण हमला, इजरायल ने यूरेनियम प्रोसेसिंग यूनिट को बनाया निशाना, कितना हुआ नुकसान?

ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर भीषण हमला, इजरायल ने यूरेनियम प्रोसेसिंग यूनिट को बनाया निशाना, कितना हुआ नुकसान?

Iran Nuclear Plant

हमले के बाद यूनिट से उठता काला धुंआ।

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US-Israel Iran War Update: मिडिल ईस्ट की जंग में अब तक का सबसे बड़ा हमला ईरान पर हुआ है। इजरायल ने ईरान के खोंदाब परमाणु केंद्र पर भीषण हमला किया है। परमाणु केंद्र में यूरेनियन प्रोसेसिंग यूनिट को टारगेट करके करीब 10 हमले किए गए। हमले के बाद धमाके से जहां पीले रंग की रोशनी निकली, वहीं काला धुंआ भी उठते देखा गया। हालांकि हमले में किसी तरह का जानी नुकसान या रेडिएशन का फैलाव नहीं हुआ, लेकिन IRGC ने चेतावनी जरूर जारी कर दी है।

IRGC का रेड अलर्ट और खाली कराया इलाका

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने खोंदाब प्लांट पर इजरायल के हमले के बाद रेड अलर्ट जारी किया। वैज्ञानिकों और कर्मियों को खोंदाब प्लांट खाली करने का निर्देश दिया। अमेरिका और इजरायल की फैक्ट्रियों और कंपनियों को भी खाली करने का आग्रह किया गया। खोंदाब के आस-पास एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों से क्षेत्र खाली करने को कहा गया है। क्योंकि एक तो रिसाव होने का खतरा है, दूसरा IRGC इजरायली और अमेरिकी ठिकानों पर हमला करेगी।

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जून 2025 के हमले के बाद से अराक प्लांट बंद

IRGC के एयरोस्पेस फोर्स कमांडर सैयद माजिद मूसावी ने न्यूक्लियर प्लांट पर हमले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अराक में शाहिद खोंदाब हेवी वाटर कॉम्प्लेक्स और यज्द प्रांत में अर्दकान येलोकेक प्रोडक्शन प्लांट पर हमला हुआ है, जिसमें न तो कोई जान गई और न ही किसी तरह का रेडिऐशन फैला। जून 2025 में इजरायल के हमले के बाद से ही अराक प्लांट बंद पड़ा हुआ है। लेकिन इस बार इजरायल ने अराक के पास स्थित खोंदाब न्यूक्लियर प्लांट को टारगेट करके 10 हमले किए हैं।

खोंदाब से न्यूक्लियर रेडिएशन फैलने का खतरा

खोंदाब प्लांट को पहले अराक हेवी वाटर रिएक्टर (IR-40) के नाम से जानते थे, लेकिन साल 2017 में इसका नाम बदल दिया गया। यह इलेक्ट्रिसिटी पलांट नहीं, बल्कि एक रिसर्च रिएक्टर है, जो नेचुरल यूरेनियम पर चलते हैं और प्लूटोनियम का उत्पादन भी करते हैं। इसलिए यहां ये न्यूक्लियर रेडिएशन हो सकता है। इजरायल ने हेवी-वॉटर प्लांट और येलोकेक प्रोडक्शन प्लांट पर हमला किया है, जो परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के महत्वपूर्ण प्लांट हैं। इन पर हमला मतलब न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा

हेवी-वॉटर प्लांट से परमाणु रिएक्टरों में न्यूट्रॉन की गति कम की जाती है। येलोकेक प्लांट में यूरेनियम की प्रोसेसिंग से निकला सबसे पहला यूरेनियम स्टोर होता है, जो पीले रंग का पाउडर होता है। इस पाउडर का उत्पादन परमाणु ईंधन बनाने की पहली स्टेज है। येलोकेक के यूरेनियम को प्रोसेस करके ही परमाणु बम बनाया जाता है। इसलिए यह प्लांट बेहद संवेदनशील है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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