ईरान और अमेरिका के बीच हालात अभी भी कुछ ठीक नहीं हैं. वहीं, मिली जानकारी के अनुसार, बीते बुधवार को ईरान पर अमेरिका ने हमला करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था और सुरक्षा को देखते हुए कतर स्थित अमेरिकी एयरबेस अल उदैद को अमेरिकी सेनाओं ने खाली भी कराना शुरू कर दिया था.
वहीं, दूसरी ओर ईरान की सरकार भी अमेरिकी हमले को लेकर पूरी तरह से सतर्क थी और उसे यकीन था कि अमेरिका हमला करने वाला है जिसे देखते हुए ईरान ने पहले ही अपनी एयरस्पेस बंद कर दिया था.
ईरान पर अमेरिका ने क्यों नहीं किया हमला?
वहीं, इस बीच एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि 'यह नकली या किसी तरह की कोई चाल नहीं थी.' दूसरी ओर बुधवार की दोपहर में ही ट्रंप ने अपनी टॉप नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ एक बैठक बुलाई लेकिन घंटों बाद भी व्हाइट हाउस से ईरान पर हमले को लेकर कोई खबर बाहर नहीं आई. इस दौरान ट्रंप ने ईरान पर हमले को रोकने का फैसला कर लिया था.
अब सवाल ये है कि उस बैठक में आखिर ऐसा क्या हुआ होगा जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए जाने वाले हमले को रोकने का फैसला किया था.
ट्रंप के पास आए दो फोन
मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सावधानी बरतने की सलाह दी थी. इस दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायल ईरान के संभावित जवाबी हमले से खुद को बचाने के लिए अभी भी तैयार नहीं है, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिका के पास इस क्षेत्र में इतने हथियार नहीं हैं कि वह इजरायल को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में मदद कर सके.
इजरायली पीएम नेतन्याहू के एक सलाहकार ने बताया कि मौजूदा अमेरिकी प्लान नेतन्याहू को ज्यादा मजबूत और असरदार नहीं लगा.
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के अनुसार सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी ट्रंप से बात की और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके नतीजों को लेकर गहरी चिंता जताई.
हालांकि ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें किसी ने सलाह नहीं दी बल्कि उन्होंने खुद को मनाया.
कुछ अधिकारियों ने कहा कि "वॉर थिएटर तैयार नहीं था" और इससे अमेरिका के पास मौजूद ऑप्शन सीमित हो गए थे. अगर ईरान जवाबी हमला करता और युद्ध का विस्तार हो जाता तो मुश्किल पैदा हो सकती थी.
ईरान और अमेरिका के बीच हालात अभी भी कुछ ठीक नहीं हैं. वहीं, मिली जानकारी के अनुसार, बीते बुधवार को ईरान पर अमेरिका ने हमला करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था और सुरक्षा को देखते हुए कतर स्थित अमेरिकी एयरबेस अल उदैद को अमेरिकी सेनाओं ने खाली भी कराना शुरू कर दिया था.
वहीं, दूसरी ओर ईरान की सरकार भी अमेरिकी हमले को लेकर पूरी तरह से सतर्क थी और उसे यकीन था कि अमेरिका हमला करने वाला है जिसे देखते हुए ईरान ने पहले ही अपनी एयरस्पेस बंद कर दिया था.
ईरान पर अमेरिका ने क्यों नहीं किया हमला?
वहीं, इस बीच एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ‘यह नकली या किसी तरह की कोई चाल नहीं थी.’ दूसरी ओर बुधवार की दोपहर में ही ट्रंप ने अपनी टॉप नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ एक बैठक बुलाई लेकिन घंटों बाद भी व्हाइट हाउस से ईरान पर हमले को लेकर कोई खबर बाहर नहीं आई. इस दौरान ट्रंप ने ईरान पर हमले को रोकने का फैसला कर लिया था.
अब सवाल ये है कि उस बैठक में आखिर ऐसा क्या हुआ होगा जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए जाने वाले हमले को रोकने का फैसला किया था.
ट्रंप के पास आए दो फोन
मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सावधानी बरतने की सलाह दी थी. इस दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायल ईरान के संभावित जवाबी हमले से खुद को बचाने के लिए अभी भी तैयार नहीं है, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिका के पास इस क्षेत्र में इतने हथियार नहीं हैं कि वह इजरायल को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में मदद कर सके.
इजरायली पीएम नेतन्याहू के एक सलाहकार ने बताया कि मौजूदा अमेरिकी प्लान नेतन्याहू को ज्यादा मजबूत और असरदार नहीं लगा.
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के अनुसार सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी ट्रंप से बात की और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके नतीजों को लेकर गहरी चिंता जताई.
हालांकि ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें किसी ने सलाह नहीं दी बल्कि उन्होंने खुद को मनाया.
कुछ अधिकारियों ने कहा कि “वॉर थिएटर तैयार नहीं था” और इससे अमेरिका के पास मौजूद ऑप्शन सीमित हो गए थे. अगर ईरान जवाबी हमला करता और युद्ध का विस्तार हो जाता तो मुश्किल पैदा हो सकती थी.