'भाई, पहले OTP बता दो', जब रैपिडो राइडर निकला स्कूल टॉपर, दंग रह गया दोस्त

सोशल मीडिया पर वायरल एक कहानी में युवक का रैपिडो राइडर उसका पुराना स्कूल टॉपर निकला. इस मुलाकात ने साबित कर दिया कि डिग्री और मार्क्स जिंदगी की सफलता की गारंटी नहीं हैं.

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सोशल मीडिया पर एक हैरान कर देने वाली खबर वायरल हो रही है. यह कहानी महज एक इत्तेफाक नही बल्कि जिंदगी की कड़वी हकीकत को बयां करती है. एक युवक ने जल्दबाजी में रैपिडो से अपनी बाइक राइड बुक की और जब उसने स्क्रीन पर राइडर का नाम ‘चंदन’ देखा तो उसे अपने स्कूल के क्लास टॉपर की याद आ गई. पहले तो उसे लगा कि शायद यह नाम की समानता होगी लेकिन जब राइडर सामने आया तो वह हैरान रह गया. वह सच में वही चंदन था जो कभी पढ़ाई में सबसे आगे रहता था और जिससे सबको बड़ी उम्मीदें थी. इस अचानक हुई मुलाकात ने युवक को सोचने पर मजबूर कर दिया कि वक्त का पहिया कब और कैसे घूम जाता है इसका अंदाजा कोई नही लगा सकता.

जिंदगी की योजना और हकीकत का अंतर

राइड शुरू होने से पहले युवक ने हल्के अंदाज में उसे ‘रैपिडो भैया’ कहकर पुकारा जिस पर चंदन ने मुस्कुराते हुए सिर्फ ओटीपी मांगा. रास्ते में दोनों के बीच हुई बातचीत दिल को छू लेने वाली थी. जब युवक ने पूछा कि उसने यह काम कब शुरू किया तो चंदन ने बड़ी शांति और शालीनता से जवाब दिया कि जिंदगी हमेशा हमारी प्लानिंग के हिसाब से नही चलती. चंदन ने आगे कहा कि उसने कभी नही सोचा था कि वह राइडर बनेगा और उसका पुराना साथी उसका ग्राहक होगा. उसने बड़ी सादगी से स्वीकार किया कि जिंदगी अनिश्चित है और फिलहाल उसका मकसद अपने यात्री को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाना है.

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डिग्री और सफलता के बीच का संघर्ष

हम अक्सर यह मान लेते हैं कि जो पढ़ाई में अव्वल है वही करियर की रेस में सबसे आगे निकलेगा लेकिन हकीकत इससे काफी अलग होती है. कई बार शानदार डिग्री और अच्छे नंबर होने के बावजूद पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक तंगी या किस्मत का साथ न मिलने की वजह से इंसान को वैसी सफलता नही मिल पाती जैसी समाज उम्मीद करता है. हालात और मौके मिलकर इंसान का रास्ता तय करते हैं न कि सिर्फ मार्कशीट के नंबर. यह कहानी हमें सिखाती है कि किसी की मौजूदा स्थिति देखकर उसके पूरे सफर का अंदाजा लगाना गलत है. सबसे जरूरी मेहनत और आत्मसम्मान है क्योंकि कोई भी काम जो ईमानदारी से किया जाए वह छोटा नही होता.

सोशल मीडिया पर लोगों की भावुक प्रतिक्रियाएं

यह कहानी ‘भारत माता के सेवक’ नाम के अकाउंट से शेयर की गई और देखते ही देखते वायरल हो गई. पोस्ट के अंत में एक गहरा संदेश दिया गया कि टॉपर होना भविष्य की पक्की गारंटी नही है और ईमानदारी से किया गया हर काम सम्मानजनक होता है. इस पोस्ट पर लोगों ने जमकर अपनी राय दी और भावुक होकर लिखा कि सफलता कभी भी सीधी लाइन में नही मिलती. कई यूजर्स ने अपने स्कूल के उन टॉपर्स की कहानियां भी शेयर की जो आज अलग-अलग वजहों से सामान्य नौकरियां कर रहे हैं. कुल मिलाकर यह कहानी हमें हर इंसान और उसके काम का सम्मान करना सिखाती है क्योंकि वक्त की लहरें कभी भी किसी को भी कहीं भी ले जा सकती हैं.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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