मुख्य बिंदु
- 19.3 किलोमीटर लंबा धुबरी-फूलबाड़ी पुल असम और मेघालय को जोड़ेगा.
- यात्रा का समय 5 घंटे से घटकर लगभग 15 मिनट रह जाएगा.
- 4,997 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
- ये पुल JICA की फंडिंग से नेशनल हाईवे 127B पर बनाया जा रहा है.
- ये मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के बाद पानी पर बना भारत का दूसरा सबसे लंबा पुल होगा.
Dhubri–Phulbari Bridge: भारत ब्रह्मपुत्र नदी पर 19.3 किलोमीटर लंबे धुबरी-फूलबाड़ी पुल पर तेजी से काम कर रहा है. ये एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिससे असम और मेघालय के बीच रोड कनेक्टिविटी में काफी सुधार होने की उम्मीद है. नेशनल हाईवे 127B के हिस्से के तौर पर बन रहा ये पुल हर मौसम में काम आने वाला एक भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर देगा और पूर्वोत्तर में संपर्क को मजबूत करेगा.
इन 2 जगहों को करेगा कनेक्ट
शुरू होने के बाद, ये चार-लेन वाला स्टील का पुल असम के धुबरी को मेघालय के फूलबाड़ी से जोड़ेगा. इससे अभी सड़क से तय की जाने वाली 200 किलोमीटर की दूरी और उसमें लगने वाले लगभग 5 घंटे के वक्त की जरूरत नहीं रहेगी. नया रास्ता दूरी को घटाकर तकरीबन 19 किलोमीटर कर देगा, जिससे यात्री लगभग 15 मिनट में सफर पूरा कर सकेंगे.
यह भी पढ़ें- बाढ़ से तबाह होने वाला मनाली-लेह हाइवे फिर खुला,लद्दाख रोड ट्रिप करने से पहले जरूर पढ़े ये अपडेट्स
इलाके को होगा जबरदस्त फायदा
इस प्रोजेक्ट से सामान की ढुलाई बेहतर होने, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम होने और बाजारों तक तेजी से पहुँचने से बड़े आर्थिक फायदे होने की उम्मीद है. ये पश्चिमी मेघालय और असम के कुछ हिस्सों से कोलकाता पोर्ट तक सबसे छोटा सड़क मार्ग भी बनाएगा, जिससे बिजनेस, टूरिज्म और रिजनल बिजनेस एक्टिविटीज को बढ़ावा मिलेगा.
यह भी पढ़ें- अब 4 घंटे में पहुंच सकेंगे मुंबई से वडोदरा, इस दिन चालू होगा 157 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे
कब शुरू हुआ था काम?
इस पुल की आधारशिला केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 2021 में रखी थी. इस प्रोजेक्ट को नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) की वित्तीय मदद से पूरा कर रहा है. सिविल कंस्ट्रक्शन वर्क 2019-20 के दौरान शुरू हुआ था.
कब तक बनकर होगा तैयार?
4,997 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस पुल के सितंबर 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है. इसे बाढ़ के हाइएस्ट लेवल से 10.5 मीटर ऊपर वर्टिकल क्लीयरेंस और 12.625 किलोमीटर लंबे नेविगेशनल चैनल के साथ डिजाइन किया गया है, ताकि नेशनल वॉटरवे-2 पर जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सके.
यह भी पढ़ें- 32 सालों से अटका इस पुल का प्रोजेक्ट फिर होगा शुरू, 2 राज्यों को जोड़ने की तैयारी
पानी पर भारत का दूसरा सबसे लंबा पुल
पूरा होने के बाद, धुबरी-फूलबाड़ी ब्रिज मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के बाद पानी पर बना भारत का दूसरा सबसे लंबा पुल बन जाएगा. ये पूर्वोत्तर में संपर्क बेहतर बनाने के मकसद से ब्रह्मपुत्र पर प्रस्तावित 6 पुलों में से एक है. इस प्रोजेक्ट से तुरा, नोंगस्टोइन और पश्चिमी और मध्य मेघालय के अन्य हिस्सों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है, साथ ही इससे लंबे समय तक क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.
निष्कर्ष
धुबरी-फूलबाड़ी पुल पूर्वोत्तर के सबसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक बनने जा रहा है. यात्रा के समय में भारी कमी और असम और मेघालय के बीच रोड कनेक्टिविटी में सुधार करके, ये क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा. ये पुल अहम बाजारों और बंदरगाहों से संपर्क मजबूत करेगा और साथ ही ट्रांसपोर्ट की क्षमता को भी बढ़ाएगा. 2028 में पूरा होने पर, इस प्रोजेक्ट के भारत के नॉर्थ-ईस्ट रीजन में विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है.
मुख्य बिंदु
- 19.3 किलोमीटर लंबा धुबरी-फूलबाड़ी पुल असम और मेघालय को जोड़ेगा.
- यात्रा का समय 5 घंटे से घटकर लगभग 15 मिनट रह जाएगा.
- 4,997 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
- ये पुल JICA की फंडिंग से नेशनल हाईवे 127B पर बनाया जा रहा है.
- ये मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के बाद पानी पर बना भारत का दूसरा सबसे लंबा पुल होगा.
Dhubri–Phulbari Bridge: भारत ब्रह्मपुत्र नदी पर 19.3 किलोमीटर लंबे धुबरी-फूलबाड़ी पुल पर तेजी से काम कर रहा है. ये एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिससे असम और मेघालय के बीच रोड कनेक्टिविटी में काफी सुधार होने की उम्मीद है. नेशनल हाईवे 127B के हिस्से के तौर पर बन रहा ये पुल हर मौसम में काम आने वाला एक भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर देगा और पूर्वोत्तर में संपर्क को मजबूत करेगा.
इन 2 जगहों को करेगा कनेक्ट
शुरू होने के बाद, ये चार-लेन वाला स्टील का पुल असम के धुबरी को मेघालय के फूलबाड़ी से जोड़ेगा. इससे अभी सड़क से तय की जाने वाली 200 किलोमीटर की दूरी और उसमें लगने वाले लगभग 5 घंटे के वक्त की जरूरत नहीं रहेगी. नया रास्ता दूरी को घटाकर तकरीबन 19 किलोमीटर कर देगा, जिससे यात्री लगभग 15 मिनट में सफर पूरा कर सकेंगे.
यह भी पढ़ें- बाढ़ से तबाह होने वाला मनाली-लेह हाइवे फिर खुला,लद्दाख रोड ट्रिप करने से पहले जरूर पढ़े ये अपडेट्स
इलाके को होगा जबरदस्त फायदा
इस प्रोजेक्ट से सामान की ढुलाई बेहतर होने, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम होने और बाजारों तक तेजी से पहुँचने से बड़े आर्थिक फायदे होने की उम्मीद है. ये पश्चिमी मेघालय और असम के कुछ हिस्सों से कोलकाता पोर्ट तक सबसे छोटा सड़क मार्ग भी बनाएगा, जिससे बिजनेस, टूरिज्म और रिजनल बिजनेस एक्टिविटीज को बढ़ावा मिलेगा.
यह भी पढ़ें- अब 4 घंटे में पहुंच सकेंगे मुंबई से वडोदरा, इस दिन चालू होगा 157 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे
कब शुरू हुआ था काम?
इस पुल की आधारशिला केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 2021 में रखी थी. इस प्रोजेक्ट को नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) की वित्तीय मदद से पूरा कर रहा है. सिविल कंस्ट्रक्शन वर्क 2019-20 के दौरान शुरू हुआ था.
कब तक बनकर होगा तैयार?
4,997 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस पुल के सितंबर 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है. इसे बाढ़ के हाइएस्ट लेवल से 10.5 मीटर ऊपर वर्टिकल क्लीयरेंस और 12.625 किलोमीटर लंबे नेविगेशनल चैनल के साथ डिजाइन किया गया है, ताकि नेशनल वॉटरवे-2 पर जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सके.
यह भी पढ़ें- 32 सालों से अटका इस पुल का प्रोजेक्ट फिर होगा शुरू, 2 राज्यों को जोड़ने की तैयारी
पानी पर भारत का दूसरा सबसे लंबा पुल
पूरा होने के बाद, धुबरी-फूलबाड़ी ब्रिज मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के बाद पानी पर बना भारत का दूसरा सबसे लंबा पुल बन जाएगा. ये पूर्वोत्तर में संपर्क बेहतर बनाने के मकसद से ब्रह्मपुत्र पर प्रस्तावित 6 पुलों में से एक है. इस प्रोजेक्ट से तुरा, नोंगस्टोइन और पश्चिमी और मध्य मेघालय के अन्य हिस्सों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है, साथ ही इससे लंबे समय तक क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.
निष्कर्ष
धुबरी-फूलबाड़ी पुल पूर्वोत्तर के सबसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक बनने जा रहा है. यात्रा के समय में भारी कमी और असम और मेघालय के बीच रोड कनेक्टिविटी में सुधार करके, ये क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा. ये पुल अहम बाजारों और बंदरगाहों से संपर्क मजबूत करेगा और साथ ही ट्रांसपोर्ट की क्षमता को भी बढ़ाएगा. 2028 में पूरा होने पर, इस प्रोजेक्ट के भारत के नॉर्थ-ईस्ट रीजन में विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है.