32 सालों से अटका इस पुल का प्रोजेक्ट फिर होगा शुरू, 2 राज्यों को जोड़ने की तैयारी

Bridge Between Kerala and Karnataka: केरल के वायनाड जिले और कर्नाटक के बीच कबानी नदी पड़ती है, जिसके बीच एक पुल बनाने की बात पिछले 32 सालों से चल रही थी, लेकिन अब प्रशासन की मदद से इसका काम फिर से शुरू होने की उम्मीदें जग गई हैं.

Bairakuppa Bridge

AI Generated Image

मुख्य बिंदु

विज्ञापन
  • 32 साल की देरी के बाद बैराकुप्पा पुल प्रोजेक्ट फिर से शुरू हुआ.
  • ये पुल कबानी नदी के पार वायनाड (केरल) को कर्नाटक से जोड़ेगा.
  • कल्पेट्टा और मैसूरु के बीच दूरी 110 किलोमीटर तक कम हो सकती है.
  • प्रोजेक्ट में देरी का कारण बनी वन विभाग से मंजूरी की समस्याएं काफी हद तक सुलझा ली गई हैं.
  • इस पुल से स्कूलों, अस्पतालों, नौकरियों और बाजारों तक पहुंचना आसान हो जाएगा.

Bairakuppa Bridge Project: दक्षिण भारत में कबानी नदी पर बनने वाला बैराकुप्पा पुल प्रोजेक्ट, जो 3 दशकों से ज्यादा समय से रुका हुआ था, आखिरकार फिर से शुरू होने की राह पर है. पूरा होने पर, ये पुल केरल के वायनाड जिले और पड़ोसी कर्नाटक के बीच एक जरूरी रोड कनेक्टिविटी देगा, जिससे हजारों लोगों का सफर आसान हो जाएगा.

विज्ञापन

प्रियंका गांधी ने की अपील

हाल ही में वायनाड दौरे के दौरान, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस प्रोजेक्ट में तेजी लाने की गुजारिश की है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुल ‘सेंट्रल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड’ के तहत पूरा किया जाएगा. इससे पहले, कर्नाटक के नेताओं ने भी केरल के अधिकारियों को भरोसा दिलाया था कि निर्माण कार्य में तेजी लाने की कोशिश की जाएगी.

1994 से चल रही कोशिश

बैराकुप्पा और मुल्लनकोली कडावु के बीच बनने वाले इस पुल का प्रपोजल पहली बार 1994 में दिया गया था. उस वक्त, उम्मीद थी कि ये एचडी कोटे के रास्ते मैसूरु और बेंगलुरु के लिए एक छोटा रास्ता देगा, जिससे कल्पेट्टा-मैसूरु का सफर तकरीबन 110 किलोमीटर कम हो जाएगा.

विज्ञापन

अभी नाव से होता है सफर

अभी, कबानी नदी के दोनों ओर रहने वाले लोग रोजाना आने-जाने के लिए छोटी नावों पर निर्भर हैं. सैकड़ों लोग, जिनमें छात्र और मजदूर शामिल हैं, रोजाना नदी पार करते हैं और अक्सर उन्हें देरी और सुरक्षा संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, खासकर मॉनसून के मौसम में जब पानी का लेवल बढ़ जाता है.

विज्ञापन

क्यों रुका रहा प्रोजेक्ट?

स्थानीय प्रतिनिधियों के मुताबिक, वन विभाग से मंजूरी न मिलने के कारण ये प्रोजेक्ट रुका हुआ था. हालांकि, रेवेन्यू लैंड से होकर गुजरने वाले नए सड़क अलाइनमेंट से पुरानी बाधा दूर हो गई है, जिससे प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने की संभावना बढ़ गई है.

लोकल लोगों को होगा फायदा

स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि इस पुल से स्कूलों, अस्पतालों, बाजारों और काम की जगहों तक पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा. इससे बिजनेस, टूरिज्म और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही साल भर जर्नी सेफ हो जाएगी. अगर ये पुल पूरा हो जाता है, तो केरल-कर्नाटक सीमा के पास रहने वाले समुदायों के जीवन में काफी सुधार हो सकता है.

विज्ञापन

निष्कर्ष

बैराकुप्पा ब्रिज प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करना केरल और कर्नाटक के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है. पूरा होने पर, ये पुल यात्रा का समय कम करेगा, ट्रांसपोर्टेशन को बेहतर बनाएगा और जरूरी सेवाओं तक सुरक्षित पहुंच देगा. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि लंबे समय से रुका हुआ ये प्रोजेक्ट आखिरकार हकीकत बनेगा और इलाके में आर्थिक विकास और बेहतर जीवन-स्तर में योगदान देगा.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ