ट्रेन को टकराने से बचाने वाले 'कवच' सिस्टम को इस रूट पर लगाने की तैयारी, सेंट्रल रेलवे ने किया ऐलान

Kavach System: इंडियन रेलवे में ‘कवच’ एक ऐसा सिस्टम है जिसके जरिए एक ही ट्रैक पर 2 ट्रेनों की टक्कर को रोका जा सकता है. सेंट्रल रेलवे ने नागपुर डिवीजन एक साथ रेल रूट पर ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन को चालू करने जा रही है.

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Kavach System (AI Image)

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मुख्य बिंदु

  • सेंट्रल रेलवे ने गोधानी-टीगांव सेक्शन पर स्टैंडर्ड कवच सिस्टम शुरू किया है.
  • ये रूट बिजी इटारसी-नागपुर रेलवे कॉरिडोर का हिस्सा है.
  • कवच इंसानी गलती से होने वाले एक्सीडेंट को रोकने में मदद करता है.
  • ये सिस्टम ऑटोमैटिकली स्पीड कंट्रोल करता है और जरूरत पड़ने पर ब्रेक लगाता है.
  • ये प्रोजेक्ट इंडियन रेलवे के आत्मनिर्भर भारत सेफ्टी मॉडर्नाइजेशन इनिशिएटिव को सपोर्ट करता है.

Automatic Train Protection: सेंट्रल रेलवे ने नागपुर डिवीजन के गोधानी-टीगांव सेक्शन पर स्वदेशी स्टैंडर्ड कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम चालू किया है. इससे इस इलाके के सबसे बिजी और ऑपरेशन के लिहाज से सबसे ज्यादा मुश्किल रूट में से एक पर रेलवे सेफ्टी मजबूत होगी. उम्मीद है कि इस नए सेफ्टी सिस्टम से इंसानी गलती से होने वाले हादसों की संभावना कम होगी और पैसेंजर और माल ढुलाई सेवाओं की एफिशिएंसी में सुधार होगा, जिससे ट्रेन ऑपरेशन बेहतर होंगे.

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इस रूट पर कवच लगाने की वजह?

गोधानी-टीगांव स्ट्रेच हाई-डेंसिटी इटारसी-नागपुर रेलवे कॉरिडोर का हिस्सा है, जो एक जरूरी रूट है जिस पर हर दिन बड़ी मात्रा में ट्रेन ट्रैफिक आता-जाता है. इस सेक्शन में एक मुश्किल घाट सेगमेंट भी शामिल है जिसमें खड़ी ढलान और मुश्किल ऑपरेटिंग कंडीशन हैं, जिससे रेलवे ऑपरेशन को आसान बनाने के लिए एडवांस्ड सेफ्टी टेक्नोलॉजी जरूरी हो जाती है.

कवच की खासियत

नया चालू किया गया स्टैंडर्ड कवच सिस्टम भारत में ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सॉल्यूशन के तौर पर डेवलप किया गया है. ये लगातार ट्रेन की मूवमेंट पर नजर रखता है और ये पक्का करके लोको पायलटों की मदद करता है कि ट्रेनें तय स्पीड लिमिट के अंदर चलें. ये टेक्नोलॉजी सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) घटनाओं को रोकने के लिए भी डिजाइन की गई है, जो रेलवे हादसों के बड़े कारणों में से एक है.

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खुद लगेगा ब्रेक

अगर कोई ट्रेन खतरे वाले सिग्नल के पास पहुंचती है या तय स्पीड से ज्यादा स्पीड पकड़ती है, तो कवच सिस्टम जरूरत पड़ने पर अपने आप ब्रेक लगा सकता है. सुरक्षा की ये एक्स्ट्रा लेयर टक्कर की संभावना को कम करने और पूरी ऑपरेशनल सेफ्टी को बेहतर बनाने में मदद करती है, खासकर उन बिजी रेलवे कॉरिडोर पर जहां पैसेंजर और माल ढुलाई ज्यादा होती है.

‘बढ़ेगा भरोसा’

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि गोधानी-तीगांव सेक्शन पर कवच लगाने से भरोसा बढ़ेगा, ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी और इस जरूरी रूट पर ट्रेनों की आवाजाही सुरक्षित होगी. उम्मीद है कि ये टेक्नोलॉजी ट्रेन ड्राइवरों को रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जरूरत पड़ने पर समय पर दखल देकर मदद करेगी.

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बेहतर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की कोशिश

ये कमीशनिंग ‘आत्मनिर्भर भारत’ की पहल के तहत एडवांस्ड स्वदेशी टेक्नोलॉजी के जरिए अपने सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बनाने की भारतीय रेलवे की बड़ी कोशिश का हिस्सा है. भारतीय रेलवे रेल सेफ्टी को मजबूत करने और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए देश के खास रूट पर कवच सिस्टम को धीरे-धीरे बढ़ा रहा है.

रेलवे का बड़ा कदम

एक और जरूरी कॉरिडोर पर इस एडवांस्ड सेफ्टी टेक्नोलॉजी को शुरू करके, सेंट्रल रेलवे ने फ्यूचर में बढ़ते पैसेंजर और माल ढुलाई ट्रैफिक को सपोर्ट करने में सक्षम एक सुरक्षित, स्मार्ट और ज्यादा एफिशिएंट रेलवे नेटवर्क बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है.

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निष्कर्ष

गोधानी-टीगांव सेक्शन पर स्टैंडर्ड कवच सिस्टम शुरू होना इंडियन रेलवे के सेफ्टी मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम में एक और जरूरी मील का पत्थर है. ट्रेन ऑपरेशन को मॉनिटर करने और एक्सीडेंट को रोकने के लिए देसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, यह सिस्टम हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर पर पैसेंजर सेफ्टी, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रिलायबिलिटी में सुधार करेगा. जैसे-जैसे कवच को और ज्यादा रूट पर शुरू किया जाएगा, उम्मीद है कि ये भारत की बढ़ती ट्रांसपोर्टेशन जरूरतों को पूरा करने में सक्षम एक सुरक्षित, ज्यादा टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड रेलवे नेटवर्क बनाने में अहम रोल अदा करेगा.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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