देश के हाईवे पर टोल भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाला FASTag अब सिर्फ टोल वसूली के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. बल्कि केंद्र सरकार इसकी मदद से वाहन चोरी, संगठित अपराध और आतंकी गतिविधियों पर भी निगरानी मजबूत करने की तैयारी में है. इसके तहत टोल प्लाजा पर FASTag के साथ लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल जांच और सुरक्षा एजेंसियां कर सकेंगी. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में पिछले सप्ताह दिशानिर्देश जारी किए हैं.
एजेंसियों को मिलेगा रियल टाइम अलर्ट
नई व्यवस्था में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED), पुलिस और परिवहन विभाग जैसी अधिकृत एजेंसियों को FASTag और वाहन से जुड़ा डेटा नियंत्रित तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा. खास बात यह है कि किसी संदिग्ध या ब्लैकलिस्टेड वाहन के टोल प्लाजा पर पहुंचते ही संबंधित एजेंसियों को रियल-टाइम अलर्ट मिल सकेगा. इससे संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने और किसी घटना के बाद उनके रास्ते का पता लगाने में मदद मिलेगी.
वाहन चोरी पर भी लगेगी लगाम
सरकार की योजना का एक अहम हिस्सा वाहन चोरी पर लगाम लगाना भी है. अधिकारियों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 1.5 लाख से 2 लाख वाहन चोरी होते हैं. इनमें आधे से ज्यादा मामले दिल्ली-एनसीआर से जुड़े होते हैं. चोरी के बाद वाहनों को कुछ ही घंटों में दूसरे राज्यों या सीमावर्ती इलाकों की ओर ले जाने की कोशिश की जाती है. कई मामलों में अपराधी किसी घटना को अंजाम देने के लिए फर्जी नंबर प्लेट या क्लोन FASTag का भी इस्तेमाल करते हैं.
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ANPR कैमरे करेंगे संदिग्ध वाहन की पहचान
ऐसे मामलों में ANPR कैमरे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. कैमरा केवल नंबर प्लेट की पहचान नहीं करेगा, बल्कि वाहन के रंग, कंपनी और मॉडल का भी मिलान किया जा सकेगा. अगर FASTag में दर्ज जानकारी और सड़क पर चल रहे वाहन के वास्तविक विवरण में अंतर मिलता है, तो सिस्टम संदिग्ध वाहन की पहचान में मदद करेगा.
इस तकनीक का इस्तेमाल हिट एंड रन मामलों की जांच में भी किया जा सकेगा. हादसे के आस-पास मौजूद टोल प्लाजा के टाइम-स्टैम्प और वाहन की आवाजाही के रिकॉर्ड से जांच एजेंसियां आरोपी वाहन के संभावित रूट का पता लगा सकेंगी. इसके अलावा लूट, डकैती, अपहरण और हथियारों की तस्करी जैसे मामलों में भी यह डेटा जांच में काम आएगा.
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुरोध पर ही मिलेगा डेटा
हालांकि, सरकार ने डेटा की पहुंच को पूरी तरह खुला नहीं रखा है. अधिकारियों के अनुसार आम लोगों के लिए यह जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी. डेटा साझा करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तय की गई है और वरिष्ठ अधिकारियों के अनुरोध पर ही संबंधित एजेंसियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.