Who is Rajendra Bharti, Defeated Narottam Mishra From Datia: राजनीति में कभी भी किसी का पासा पलट सकता है। कुछ ऐसा ही हाल मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ हुआ। वह बीजेपी की आंधी में भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। उन्हें दतिया से कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने 7742 वोटों ने शिकस्त दी। एमपी की सियासत में नरोत्तम मिश्रा बड़ा नाम रहे हैं। वह कद्दावर नेता के तौर पर इस सीट से लगातार चुनाव जीत रहे थे, लेकिन इस बार उन्हें राजेंद्र भारती ने पटकनी दे दी। आइए जानते हैं राजेंद्र भारती कौन हैं...
कांग्रेस ने काटा था राजेंद्र भारती का टिकट
राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा के बीच आपसी दुश्मनी किसी से छुपी नहीं है। लंबे समय से दोनों के बीच अदावत रही है। खास बात यह है कि कांग्रेस ने इस बार राजेंद्र भारती का टिकट काट दिया था, लेकिन प्रत्याशी अवधेश नायक का विरोध हो जाने की वजह से कांग्रेस आखिरकार बैकफुट पर आई और राजेंद्र भारती को टिकट देना पड़ा। पिछले चुनाव में भारती को मिश्रा ने शिकस्त दी थी। हालांकि इससे पहले भारती 2008 में भी नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ चुनाव जीत चुके हैं।
64 साल के भारती ने एलएलबी तक पढ़ाई की है। वह दतिया में कृषि ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष (1984-2007) भी रह चुके हैं। साथ ही राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक के पांच साल तक उपाध्यक्ष रहे हैं। इसके अलावा अनुशासन समिति में प्रशासनिक विभागों के सदस्य, आरोप-पत्र समिति और मप्र कांग्रेस समिति में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
https://twitter.com/ANI/status/1731587971076567313?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1731587971076567313%7Ctwgr%5Ee244dbe53bda74dfaba5d91c9dea1b92a4e09cac%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.jagran.com%2Fmadhya-pradesh%2Fbhopal-mp-chunav-video-narottam-mishra-accepted-defeat-bjp-worker-interrupted-in-sabha-23596363.html
कैसे हुई नरोत्तम मिश्रा की हार?
कहा जा रहा है कि नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ जमीनी स्तर पर सत्ता विरोधी लहर चल रही थी, जिसे वे भांप नहीं पाए। जबकि राजेंद्र भारती लगातार मजबूत होते रहे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब कांग्रेस ने उनका टिकट काटने की कोशिश की, तो कार्यकर्ताओं ने अवधेश नायक का भारी विरोध कर जगह-जगह प्रदर्शन किए। यहां तक कि उनके पुतले भी फूंके गए।
मध्य प्रदेश: किस सीट से कौन जीता, यहां देखें
इसके साथ ही नरोत्तम मिश्रा लगातार विवादों में चल रहे थे। कुछ साल पहले मिश्रा के निर्वाचन क्षेत्र दतिया में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दावा किया था कि वह पुलिस का इस्तेमाल डराने-धमकाने के लिए करते हैं।
Who is Rajendra Bharti, Defeated Narottam Mishra From Datia: राजनीति में कभी भी किसी का पासा पलट सकता है। कुछ ऐसा ही हाल मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ हुआ। वह बीजेपी की आंधी में भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। उन्हें दतिया से कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने 7742 वोटों ने शिकस्त दी। एमपी की सियासत में नरोत्तम मिश्रा बड़ा नाम रहे हैं। वह कद्दावर नेता के तौर पर इस सीट से लगातार चुनाव जीत रहे थे, लेकिन इस बार उन्हें राजेंद्र भारती ने पटकनी दे दी। आइए जानते हैं राजेंद्र भारती कौन हैं…
कांग्रेस ने काटा था राजेंद्र भारती का टिकट
राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा के बीच आपसी दुश्मनी किसी से छुपी नहीं है। लंबे समय से दोनों के बीच अदावत रही है। खास बात यह है कि कांग्रेस ने इस बार राजेंद्र भारती का टिकट काट दिया था, लेकिन प्रत्याशी अवधेश नायक का विरोध हो जाने की वजह से कांग्रेस आखिरकार बैकफुट पर आई और राजेंद्र भारती को टिकट देना पड़ा। पिछले चुनाव में भारती को मिश्रा ने शिकस्त दी थी। हालांकि इससे पहले भारती 2008 में भी नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ चुनाव जीत चुके हैं।
64 साल के भारती ने एलएलबी तक पढ़ाई की है। वह दतिया में कृषि ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष (1984-2007) भी रह चुके हैं। साथ ही राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक के पांच साल तक उपाध्यक्ष रहे हैं। इसके अलावा अनुशासन समिति में प्रशासनिक विभागों के सदस्य, आरोप-पत्र समिति और मप्र कांग्रेस समिति में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
कैसे हुई नरोत्तम मिश्रा की हार?
कहा जा रहा है कि नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ जमीनी स्तर पर सत्ता विरोधी लहर चल रही थी, जिसे वे भांप नहीं पाए। जबकि राजेंद्र भारती लगातार मजबूत होते रहे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब कांग्रेस ने उनका टिकट काटने की कोशिश की, तो कार्यकर्ताओं ने अवधेश नायक का भारी विरोध कर जगह-जगह प्रदर्शन किए। यहां तक कि उनके पुतले भी फूंके गए।
मध्य प्रदेश: किस सीट से कौन जीता, यहां देखें
इसके साथ ही नरोत्तम मिश्रा लगातार विवादों में चल रहे थे। कुछ साल पहले मिश्रा के निर्वाचन क्षेत्र दतिया में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दावा किया था कि वह पुलिस का इस्तेमाल डराने-धमकाने के लिए करते हैं।