पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से एक बेहद भावुक और राहत देने वाली खबर सामने आई है. पुरुलिया के लौलाड़ा गांव में रहने वाले साइकिल मैकेनिक कृष्णा बाउरी का परिवार पिछले 12 सालों से अंधेरे में रहने को मजबूर था. जमीन के एक पुराने विवाद के कारण उनके पड़ोसी घर तक बिजली की लाइन नहीं बिछाने दे रहे थे. कृष्णा बाउरी ने कई सालों तक अधिकारियों के चक्कर काटे लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला. आखिरकार उनकी पत्नी कल्पना बाउरी और बेटी 13 जुलाई को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थिति मुख्यमंत्री के 'जनता दरबार' पहुंचीं. वहां उन्होंने अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ गया.

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जनता दरबार की शिकायत पर तुरंत एक्शन

जनता दरबार में मामला दर्ज होते ही अधिकारियों ने पुंछा पुलिस स्टेशन और स्थानीय ब्लॉक प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इसके बाद पुलिस, प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से मामले की जांच शुरू की. गुरुवार को दोनों पक्षों को बुलाकर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सुनवाई हुई और जमीन विवाद का निपटारा किया गया. इसके तुरंत बाद शुक्रवार को बिजली विभाग की टीम पुलिस बल के साथ कृष्णा बाउरी के घर पहुंची और नया बिजली कनेक्शन लगा दिया. करीब 12 साल बाद जब पहली बार उनके घर में बल्ब जला, तो पूरे परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए.

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बच्चों की पढ़ाई और नई उम्मीदों का सवेरा

बिजली न होने की वजह से कृष्णा बाउरी के बच्चों की पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ा था. उनकी बेटी ने संघर्ष करके नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर ली, लेकिन बेटा माध्यमिक परीक्षा के बाद आगे नहीं पढ़ सका. घर में रोशनी आते ही परिवार ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग का दिल से धन्यवाद किया. कृष्णा बाउरी ने बताया कि सरकार में बदलाव की खबर मिलने के बाद ही उन्होंने उम्मीद के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय का दरवाजा खटखटाया था. मात्र 12 दिनों के भीतर मिली इस बड़ी राहत ने उनके जीवन में नई उम्मीदें और खुशियां भर दी हैं. अब उनका परिवार एक बेहतर जीवन जीने की राह पर आगे बढ़ सकता है.

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