पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहली बार हुगली में जनसभा करने जा रहीं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को श्रीरामपुर में आयोजित कार्यक्रम से पहले अपने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. श्रीरामपुर कोर्ट मैदान में होने वाली सभा में शामिल होने जा रहे तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष की गाड़ी पर उत्तरपाड़ा के सखेर बाजार मोड़ के पास हमला किए जाने का आरोप सामने आया है. इस घटना में गाड़ी के शीशे टूटने की बात कही गई है.
घटना के बाद कालीघाट स्थित अपने आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सभा में जाने से रोका जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि रास्ते जाम कर दिए गए हैं और कई लोगों को घेरकर रखा गया है. ममता ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन उनके मुताबिक, घटनास्थल पर पुलिस की प्रभावी मौजूदगी दिखाई नहीं दे रही है.
हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद श्रीरामपुर में सभा
ममता बनर्जी की श्रीरामपुर के कोर्ट मैदान में शनिवार को जनसभा प्रस्तावित थी. उनके मुताबिक, सभा की अनुमति लेने के लिए तृणमूल कांग्रेस को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा और करीब 15 दिन पहले से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी. उन्होंने कहा कि अदालत से अनुमति मिलने के बावजूद पार्टी के लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि जब किसी राजनीतिक दल को सभा करने के लिए अदालत से अनुमति लेनी पड़ती है, तो उसके बाद भी नेताओं और कार्यकर्ताओं को रास्ते में क्यों रोका जा रहा है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक तरीके से सभा, जुलूस और विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को सभा आयोजित करने के लिए जगह और हॉल तक आसानी से उपलब्ध नहीं कराए जाते. ऐसी परिस्थितियों में विपक्षी दल जनता के बीच कैसे जाएंगे और लोगों से संवाद कैसे करेंगे, यह भी उन्होंने सवाल के रूप में उठाया.
कुणाल घोष की गाड़ी पर हमले का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई, जब विधायक कुणाल घोष श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की सभा में शामिल होने के लिए जा रहे थे. आरोप है कि उत्तरपाड़ा में सखेर बाजार मोड़ के पास कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी का रास्ता रोक दिया और हंगामा किया. कुणाल घोष की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, उनकी गाड़ी पर अंडे, पत्थर और ईंटें फेंकी गईं. इसके अलावा लाठी और रॉड से भी हमला किए जाने का आरोप है. घटना में उनकी गाड़ी के शीशे टूट गए.
ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कुणाल घोष का विशेष रूप से जिक्र किया. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के विधायक की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई है और उसके शीशे टूटकर बिखर गए हैं. उन्होंने दावा किया कि कुणाल घोष समेत पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया है. हालांकि, घटना में शामिल लोगों की पहचान, हमले के पीछे की वजह और पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. फिलहाल, हमले से संबंधित आरोप तृणमूल कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं.
‘पुलिस की वर्दी का सम्मान होता है’, प्रशासन पर ममता का सवाल
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के असामाजिक तत्वों द्वारा उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने पुलिस पर इन घटनाओं को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए. उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘अगर पुलिस इसी तरह काम करेगी, तो उसे वर्दी छोड़कर बीजेपी का झंडा थाम लेना चाहिए.’ यह बयान ऐसे समय में आया है, जब श्रीरामपुर में तृणमूल कांग्रेस की जनसभा से पहले राजनीतिक तनाव और हमले के आरोपों को लेकर विवाद सामने आया है.
लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है या खतरे का संकेत
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने सवाल किया कि यदि राजनीतिक दलों को जनता का समर्थन प्राप्त है, तो फिर विपक्षी दलों को सभा और जुलूस आयोजित करने से क्यों रोका जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘अगर आप लोगों के वोटों से जीत ही रहे हैं, तो विपक्षी दलों को सभा-जुलूस क्यों नहीं करने दे रहे हैं?’ उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने और जनता के बीच जाने का अधिकार होना चाहिए. उनके मुताबिक, सभा करने के लिए अदालत से अनुमति लेने के बावजूद यदि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोका जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.
ममता बनर्जी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपनी बात रखने, विरोध दर्ज कराने और जनता से मिलने से नहीं रोका जाना चाहिए. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा सवाल बताते हुए मीडिया से भी पूछा कि ऐसी स्थिति को लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत माना जाना चाहिए या खतरे का संकेत.
‘हमारे लोगों का घेराव किया गया, गाड़ियां तोड़ी गईं’
ममता बनर्जी ने दावा किया कि उत्तरपाड़ा और जीटी रोड के आसपास से उन्हें लगातार घटनाओं की जानकारी मिल रही थी. उन्होंने कहा कि पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को घेरकर रखा गया है तथा उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई है. उन्होंने कहा, ‘हमारे लोगों को बुरी तरह पीटा जा रहा है और उन्हें रास्ते में रोक दिया गया है. उन्हें उस स्थान पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है.’ ममता ने यह भी कहा कि वह खुद घटनास्थल की ओर जा रही हैं और वहां की स्थिति देखना चाहती हैं. उन्होंने मीडिया से घटनाक्रम को रिकॉर्ड करने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी के लोगों के साथ हुई कथित घटनाओं को सामने लाना जरूरी है. हालांकि, उनके घटनास्थल की ओर रवाना होने और वहां पहुंचने के बाद की स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी की पुष्टि होना बाकी है.
बंगाल में सभा करने के लिए बार-बार अदालत क्यों जाना पड़े?
ममता बनर्जी ने सभा की अनुमति के लिए बार-बार अदालत का रुख करने की जरूरत पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अदालतों पर पहले से ही कई मामलों का बोझ है और राजनीतिक कार्यक्रमों की अनुमति के लिए उन्हें बार-बार अदालत जाने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मुझे हर बार कोर्ट से अनुमति क्यों लेनी पड़े? कोर्ट के पास पहले से ही बहुत सारे मामले हैं. वे बहुत व्यस्त हैं.’ उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को सभा आयोजित करने के लिए 15 से 30 दिन पहले से अनुमति की प्रक्रिया में जुटना पड़ता है. उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी राजनीतिक दल को सभा करने के लिए जगह ही नहीं मिलेगी, तो वह जनता के बीच कैसे पहुंचेगा.
ममता ने उत्तर प्रदेश और बिहार का जिक्र करते हुए भी पश्चिम बंगाल की स्थिति पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि बंगाल में उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वैसी स्थिति अन्य राज्यों में नहीं है. ये टिप्पणियां उनके राजनीतिक संबोधन का हिस्सा थीं.
श्रीरामपुर की सभा से पहले बढ़ा राजनीतिक विवाद
श्रीरामपुर कोर्ट मैदान में होने वाली जनसभा से पहले कुणाल घोष की गाड़ी पर हमले का आरोप और उसके बाद ममता बनर्जी के बयान ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है. एक ओर तृणमूल कांग्रेस ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाते हुए बीजेपी और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं घटना की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जांच से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी. ममता बनर्जी ने अपने संबोधन के अंत में लोगों से सहयोग करने और बंगाल में परेशानी पैदा नहीं करने की अपील की. उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के अनुसार उनकी पार्टी श्रीरामपुर में सभा कर रही है और प्रशासन को कानून के अनुरूप काम करना चाहिए.
फिलहाल, इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि कुणाल घोष की गाड़ी पर कथित हमले के लिए कौन जिम्मेदार है, घटना के दौरान पुलिस की क्या भूमिका रही और श्रीरामपुर की सभा में शामिल होने जा रहे अन्य नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. इन सवालों पर पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई का इंतजार है.