पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट पर फंसा पेंच, 37 लाख लोगों की अपीलों का अब तक नहीं हुआ निपटारा

पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से जुड़े मामलों की 37 लाख से अधिक अपीलें अब भी पेंडिंग हैं. मौजूदा निपटारे की रफ्तार ऐसी ही रही तो सभी मामलों के निपटारे में 12 साल से ज्यादा समय लग सकता है. चुनाव आयोग ने ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने और प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी जोर दिया है.

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पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर अब अपीलों के निपटारे की रफ्तार बड़ी चुनौती बन गई है. (फोटो- फाइल फोटो News24)

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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अब अपीलों के निपटारे की रफ्तार बड़ी चुनौती बनती दिख रही है. चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, SIR से जुड़े मामलों में दाखिल 37 लाख से ज्यादा अपीलें अभी पेंडिंग हैं. मौजूदा रफ्तार से इन मामलों का निपटारा करने में 12 साल से भी अधिक समय लग सकता है. इससे उन मतदाताओं के सामने लंबा इंतजार खड़ा हो गया है, जिन्होंने मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाए जाने के फैसले को चुनौती दी है.

मामलों को निपटाने में लग सकता है 12 साल

चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार, 16 सितंबर तक कुल 38,31,429 अपीलें ट्रिब्यूनल के सामने पहुंची थीं. इनमें से 1,26,194 मामलों का निपटारा हो सका, जबकि 37,05,235 अपीलें अभी भी पेंडिंग हैं. पिछले करीब पांच महीनों में निपटारे की औसत रफ्तार लगभग 25 हजार मामले प्रति माह रही है. इसी दर को आधार मानें तो मौजूदा पेंडिंग मामलों को पूरा करने में करीब 146 महीने यानी 12 साल से अधिक का समय लग सकता है.

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बढ़ानी होगी ट्रिब्यूनलों की संख्या

इस स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है. आयोग का प्रस्ताव है कि पश्चिम बंगाल में अपीलीय ट्रिब्यूनलों की संख्या मौजूदा 24 से बढ़ाकर 42 की जाए. आयोग ने न्यायिक अधिकारियों को घर से सुनवाई और दूसरी न्यायिक प्रक्रियाएं पूरी करने की अनुमति देने का सुझाव भी दिया है, ताकि आने-जाने में लगने वाला समय बचाया जा सके और मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके.

दरअसल, SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम को लेकर दावे और आपत्तियां सामने आई थीं. चुनाव आयोग के मुताबिक, 17 दिसंबर 2025 से 7 अगस्त 2026 के बीच फॉर्म-6 के जरिए 34.13 लाख आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए मिले. इससे पहले दाखिल अपीलों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से विस्तृत जानकारी मांगी थी.

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मतदाताओं को करना पड़ सकता है लंबा इंतजार

चुनाव आयोग ने एक अलग हलफनामे में बताया है कि SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए ट्रिब्यूनल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप गठित किए गए हैं. इनकी कार्यप्रणाली के लिए SOP भी तैयार की गई है, जिसे कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति ने अंतिम रूप दिया है.

आयोग के मुताबिक, अगर ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाकर मामलों के निपटारे की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई, तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं को अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. इसका असर आगामी चुनावों में उनके मतदान के अधिकार पर भी पड़ सकता है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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