अध्यक्ष पद छीनकर ममता बनर्जी को TMC से निष्कासित कर सकता है बागी गुट? जानें नियम-प्रावधान और चुनाव आयोग की भूमिका

TMC Crisis Impact: क्या ममता बनर्जी को पार्टी से निकाला जा सकता है‌? क्या ममता बनर्जी से TMC और अध्यक्ष पद छिन सकता है? क्या बागी गुट पार्टी कब्जा सकता है? अगर ऐसा हुआ तो कैसे होगा और इसमें चुनाव आयोग की क्या भूमिका हो सकती है? आइए जानते हैं…

mamata banerjee

TMC को ममता बनर्जी से छीनने की कोशिश है।

पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) बगावत और टूट से जूझ रही है। ममता बनर्जी का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है। उनके हाथ से TMC की डोर और अध्यक्ष पद छूटने, निष्कासन का खतरा है, क्योंकि 58 विधायक और 20 सांसद बागी हैं। 100 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं। ऋतबत बनर्जी और काकोली घोष ने बागी गुट की कमान संभाली हुई है। लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या बागी गुट TMC का कब्जा सकता है? ममता बनर्जी से अध्यक्ष पद छीनकर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर सकता है क्या? इसके लिए नियम और संभावनाएं क्या हैं? क्या चुनाव आयोग की भूमिका भी होगी?

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कौन-कौन बागी और कौन ममता के साथ?

TMC के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी, जिनके साथ संदीपान साहा, जावेद अहमद खान, शिउली साहा, अखरुज्जैन जैन समेत करीब 58 बागी विधायक हैं। TMC के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद बागी होकर काकोली घोष के साथ हैं। इन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग की है। NDA में शामिल होने की इच्छा जताई है। इन विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुनकर विस अध्यक्ष से मंजूरी ले ली हैं।

काकोली घोष के साथ ने 20 सांसदों का साथ होने का दावा किया, लेकिन 14 सांसदों शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक के नाम ही सामने आए हैं। वहीं ममता बनर्जी के साथ बगावत के बावजूद अभिषेक बनर्जी, सायनी घोष, कीर्ति आजाद, महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय और कल्याण बनर्जी हैं।

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ममता बनर्जी को पार्टी से निकालना असंभव

ममता बनर्जी को कानूनी और संवैधानिक रूप से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बाहर या निष्कासित करना असंभव है। क्योंकि पार्टी के संगठन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर उनका नियंत्रण है। बेशक विधायकों-सांसदों की बगावत के बाद बागी गुट असली TMC पर अपना दावा ठोक रहे हैं। ममता बनर्जी से पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न (सिंबल) छीनकर उन्हें बेदखल करने की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन जब तक बागी गुट विधायकों का बहुमत, सांसदों का बहुमत और संगठन-राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर अधिकार साबित नहीं करता। जब तक ममता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं होता, तब तक न उन्हें TMC से निकाला जा सकता और न ही चुनाव आयोग पार्टी का नाम और सिंबल बागी गुट को देगा।

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ऐसे साबित करना होगा बागी गुट को बहुमत

बता दें कि TMC के बागी गुट ने अभी तक ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने और पार्टी से निकालने का दावा नहीं किया है। लेकिन अगर ऐसा करना है तो बागी गुट को विधानसभा और संसद में दो तिहाई बहुमत अपने पक्ष में साबित करना होगा। इससे बागी गुट दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) से बच जाएगा। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में तख्तापलट करना होगा। इसके लिए TMC की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाकर पार्टी का आंतरिक संविधान बदलना होगा। ममता बनर्जी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करके उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाना होगा। सर्वसम्मति से ममता बनर्जी की जगह किसी अन्य को पार्टी का नया अध्यक्ष चुनना होगा।

मामले में चुनाव आयोग की क्या भूमिका रहेगी?

अगर बागी गुट ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर TMC से निष्कासित करना चाहता है तो चुनाव आयोग के सामने बहुमत साबित करना होगा। तब चुनाव आयोग देखेगे का पार्टी का आंतरिक संविधान क्या कहता है? विधायकों और सांसदों का बहुमत किसके पास है? TMC की राष्ट्रीय और राज्य कार्यकारिणी किसके पक्ष में हैं? चुनाव आयोग इलेक्शन सिंबल्स (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के तहत जांच करेगा। अगर सब कुछ बागी गुट के पक्ष में हुआ तो चुनाव आयोग पार्टी नाम और सिंबल बागी गुट के नाम कर देगा और ममता बनर्जी से TMC छिन जाएगी।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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