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उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

आदि कैलाश यात्रा 2026 का शंखनाद… CM पुष्कर धामी बोले- PM के दौरे के बाद बना आस्था का नया केंद्र

उत्तराखंड के आदि कैलाश और ॐ पर्वत यात्रा 2026 का शुभारंभ पिथौरागढ़ से हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद बढ़ी लोकप्रियता, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे; प्रशासन ने सुरक्षा व सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए. पढ़िए पिथौरागढ़ से अधीर यादव की रिपोर्ट.

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Edited By : Bhawna Dubey Updated: May 1, 2026 17:22

उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से आस्था का सबसे पवित्र सफर एक बार फिर शुरू हो गया है. एक मई से आदि कैलाश यात्रा का शुभारंभ हो गया है… जहां भगवान शिव के धाम के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचें. प्रशासन भी इस यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
धारचूला से आज ‘आदि कैलाश यात्रा 2026’ का शुभारंभ भव्य रूप से किया गया. इस अवसर पर उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी द्वारा हरी झंडी दिखाकर 200 यात्रियों को विधिवत रवाना किया गया.

सीमांत जिला पिथौरागढ़ में आदि कैलाश और ऊं पर्वत यात्रा की शुरुआत हो गई है. सीमांत धारचूला से एसडीएम आशीष जोशी ने हरी झंडी दिखाकर करीब 200 यात्रियों को रवाना किया. यात्रा के लिए अब तक 500 यात्रियों के आवेदन आ चुके हैं, जिनमें से 350 इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं. यात्रा के शुभारंभ के दौरान शिवभक्तों ने हर-हर महादेव से गूज उठा. प्रशासन की ओर से यात्रा को लेकर सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं.वही सभी श्रद्धालुओं को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बधाई दी है. उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद इस धाम की तस्वीर बदल गई है. तीन साल पहले जहां सालभर में 2 हजार यात्री भी नहीं आते थे, अब ये संख्या कई गुना पार कर चुकी है.

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धारचूला से रवाना हुए यात्री करीब 140 किलोमीटर की यात्रा कर गुंजी और कुटी होते हुए ज्योलिंगकांग पहुंचेंगे. यहां पार्वती सरोवर से आदि कैलाश के दर्शन करेंगे. इसके बाद गुंजी लौटकर नाभिढांग जाएंगे, जहां से ऊं पर्वत के दर्शन होंगे. यात्रा शुरू होते ही धारचूला, गुंजी, कुटी और ज्योलिंगकांग तक गतिविधियां तेज हो गई हैं. टूर ऑपरेटर, होमस्टे संचालक और होटल व्यवसायियों में उत्साह देखा जा रहा है.

अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद इस क्षेत्र की पहचान तेजी से बढ़ी. तीन साल पहले जहां पर्यटकों की संख्या 2 हजार से कम थी, अब यह 30 हजार के पार पहुंच चुकी है. इस साल एक लाख पर्यटकों के आने का अनुमान है. आदि कैलाश को अब कैलाश मानसरोवर के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. जहां चारधाम यात्रा में 5 से 11 दिन लगते हैं, वहीं आदि कैलाश यात्रा 5 से 7 दिन में पूरी हो जाती है. कम भीड़ और प्राकृतिक अनुभव के कारण युवा इसे तेजी से पसंद कर रहे हैं. आदि कैलाश यात्रा यह यात्रा 3,000 से 5,500 मीटर की ऊंचाई तक जाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा रहता है.

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(आदि कैलाश का महत्व)

आदि कैलाश को भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है, जिसे “छोटा कैलाश” भी कहा जाता है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान हैं. तिब्बत स्थित कैलाश पर्वत की कठिन यात्रा के विकल्प के रूप में श्रद्धालु आदि कैलाश के दर्शन करते हैं. यहां की परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है… कहा जाता है कि इस यात्रा से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है. ऊंचे हिमालय के बीच स्थित यह धाम श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है.

(यात्रा की प्रक्रिया और परमिट)

आदि कैलाश यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट यानी ILP अनिवार्य होता है. यह परमिट धारचूला तहसील या ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त किया जा सकता है.
यात्रा मार्ग अब पहले की तुलना में काफी सुगम हो चुका है… कुटी गांव तक वाहन पहुंच जाते हैं, जबकि अंतिम चरण में हल्का ट्रेक करना पड़ता है. मई से जून का समय यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, जबकि बारिश और सर्दियों में रास्ते कठिन हो जाते हैं.

आदि कैलाश पहुंचने के लिए सबसे पहले काठगोदाम रेलवे स्टेशन या पंतनगर एयरपोर्ट तक आना होता है. इसके बाद सड़क मार्ग से पिथौरागढ़, फिर धारचूला, गुंजी और कुटी गांव होते हुए श्रद्धालु इस पवित्र धाम तक पहुंचते हैं. धारचूला से आगे का रास्ता पहाड़ी और संवेदनशील है, जहां शेयर टैक्सी और जीप की सुविधा उपलब्ध रहती है.

यात्रा को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने इस बार व्यापक तैयारियां की हैं. डीएम आशीष भटगांई के निर्देश पर अधिकारियों की टीम ने धारचूला और गुंजी सहित विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है.
यात्रियों के ठहरने के लिए टेंट कॉलोनी, विश्राम गृह और अस्थायी शिविर तैयार किए गए हैं… साथ ही साफ-सफाई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. उच्च हिमालयी क्षेत्र को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है. यात्रा मार्ग पर मेडिकल कैंप, प्राथमिक उपचार केंद्र, ऑक्सीजन सिलेंडर और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती, चेक पोस्ट और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा कर सकें.

दुर्गम क्षेत्र होने के कारण संचार व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है. वायरलेस सेट और सीमित नेटवर्क के बीच सूचना आदान-प्रदान के विशेष इंतजाम किए गए हैं.
साथ ही बिजली, पानी, खाद्य सामग्री और सड़क मार्ग को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं.

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आदि कैलाश यात्रा शुरू होने से स्थानीय लोगों में खासा उत्साह है. होम स्टे, होटल और टैक्सी व्यवसाय से जुड़े लोग यात्रियों के स्वागत के लिए तैयार हैं. यह यात्रा सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी.

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First published on: May 01, 2026 05:22 PM

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