कौन हैं IAS दिव्या मित्तल? जिन्होंने 13 साल की नौकरी के बाद छोड़ा पद, X-फेसबुक पोस्ट लिख बताई इस्तीफे की वजह

भारत में एक और IAS अफसर से सिविल सर्विसेज छोड़ दी है और पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने करीब 13 साल देशसेवा की और इस दौरान बतौर IAS अफसर अपने अनुभवों को भी देशवासियों के साथ बांटा. दिव्या ने अपने फेसबुक अकाउंट और X हैंडल दोनों पर पोस्ट लिखीं.

divya mittal | ias officer | uttar pradesh

दिव्या मित्तल ने इस्तीफे को लेकर लंबी-चौड़ी फेसबुक पोस्ट भी लिखी. (Credit- X)

विज्ञापन

उत्तर प्रदेश कैडर की IAS दिव्या मित्तल ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने 13 साल देशसेवा करने के बाद पद छोड़ा और अपने X-फेसबुक हैंडल पर पोस्ट लिखकर फैसले के पीछे की वजह भी बताई. उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में जिलाधिकारी के रूप में तैनात रहीं दिव्या मित्तल आजकल विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थीं, लेकिन बतौर IAS अफसर अपने 13 साल के सफर और देशसेवा के अनुभवों को जाहिर करते हुए उन्होंने स्वेच्छा से त्यागपत्र दे दिया. सोशल मीडिया पर दिव्या मित्तल की फेसबुक-X पोस्ट खूब वायरल हो रही है, जिस पर यूजर्स प्रतिक्रियाएं भी व्यक्त कर रहे हैं.

दिव्या मित्तल कैसे बनी थीं IAS अफसर?

IIT-IIM से पढ़ाई करने के बाद दिव्या ने लंदन में नौकरी की. लेकिन देशसेवा करने का जज्बा उन्हें वापस वतन ले आया और उन्होंने UPSC क्रैक करके IAS का पद लिया. दिव्या मित्तल ने फेसबुक-X पर लिखे लेटर में अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि कैसे दिन-रात मेहनत करके उन्होंने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से डिग्री की. लेकिन लंदन में नौकरी करते समय उन्हें ‘सब कुछ’ पा लेने के बाद भी अधूरापन महसूस होता था और जब उन्होंने भारत लौटकर UPSC करने का फैसला किया तो सुकून मिला. फिर दिनरात कड़ी मेहनत करके IAS अफसर बनने का सपना पूरा किया.

विज्ञापन

दिव्या मित्तल को कौन-सी रैंक मिली थी?

दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से बीटेक (B.Tech) की डिग्री ली. IIM बेंगलुरु से पोस्ट ग्रेजुएशन (MBA) किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन में इंटरनेशनल फाइनेंशियल फर्म ‘जेपी मॉर्गन’ में बहुत बड़े सैलरी पैकेज पर बतौर ट्रेडर काम किया. लेकिन वे नौकरी छोड़कर भारत लौट आईं और साल 2012 में UPSC एग्जाम क्रैक करके 68वीं ऑल इंडिया रैंक (AIR 68) लेकर IAS अफसर बनीं. उनके पति गगनदीप सिंह भी IAS अधिकारी हैं. दिव्या ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, संतकबीरनगर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप काम किया और इन जिलों में उनके काम का काफी सराहा गया.

मिर्जापुर की जिलाधिकारी (DM) रहते हुए उन्होंने हलिया ब्लॉक के सुदूर पहाड़ी गांव लहुरियादह में बेहतरीन काम किया. इस इलाके में 75 साल से पानी से तरस रहे लोगों को राहत दिलाई और नल से पानी पहुंचाया. वे गोंडा की CDO भी रही हैं.

दिव्या मित्तल ने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा?

दिव्या मित्तल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है. साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था. दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी. पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था. अपने देश में न होना खलता था. मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर. वो कर्ज चुकाना था. चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों. सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला.

विज्ञापन

बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा. देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है. मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है. और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है. सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था. इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला. उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है.

मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ. सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया. लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए. उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी. और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी. इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी. और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे.

विज्ञापन

आज आभार से आँखें नम हैं. बस एक दृश्य इनमें बसा है. लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई. पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा. और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ