लिव-इन पार्टनर, फिजिकल रिलेशन, शादी से इनकार... उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनाया बड़ा फैसला

Uttarakhand High Court: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने लिव इन पार्टनर के द्वारा दर्ज कराए गए केस से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है, जिसके बारे में देशभर के युवाओं को पता होना चाहिए। हाई कोर्ट ने लड़की का याचिका का निपटारा करते हुए लड़के के हक में फैसला सुनाया है।

Uttarakhand High Court

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए युवक के हक में फैसला सुनाया।

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Uttarakhand High Court Order: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने लिव-इन-रिलेशनशिप, शारीरिक संबंधों और शादी से इनकार से जुड़े मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट का कहना है कि अगर लिव इन में रहने वाले बालिग युवक-युवती ने मर्जी से संबंध बनाए और बाद में लड़का शादी का वादा पूरा नहीं कर पाया तो शारीरिक संबंधों को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।

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BNS की धारा 376 के तहत रेप कहलाएगा

लेकिन भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 376 के तहत इसे रेप तब माना जाएगा, जब यह साबित होगा कि शुरुआत से ही लड़का झूठ बोल रहा था। उसका इरादा धोखा देना था और संबंध बनाने के लिए उसने शादी का झूठा वादा किया था। मामला मसूरी की एक महिला का हे, जिसमें अपने लिव-इन पार्टनर सूरज बोरा पर आरोप लगाकर उसके खिलाफ रेप केस कराया था।

शादी से इनकार पर रेप केस दर्ज कराया

बता दें कि महिला ने सूरज बोरा पर आरोप लगाया कि उसने शादी का वादा किया और शारीरिक संबंध बना लिए। अब वह शादी करने से इनकार कर रहा है। 45 दिन के अंदर शादी करने का वादा किया था, लेकिन वह मुकर गया। इसलिए उसने सूरज के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया, जिसे सूरज ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।

सूरज के पक्ष में वकील की कोर्ट में दलील

सूरज के वकील ने दलील दी कि महिला और सूरज के बीच संबंध सहमति से बने थे। सूरज का इरादा महिला को धोखा देने का नहीं था। न ही उसने शादी का झूठा वादा किया था, लेकिन जब शादी की बात आई तो उसे महसूस हुआ कि वे इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ सकते। इसलिए उसने शादी करने से इनकार कर दिया। यह कोई अपराध नहीं है, इसलिए कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

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महिला के पक्ष में वकील की कोर्ट में दलील

राज्य सरकार और महिला के वकील ने दलील दी कि महिला ने शादी के वादे के आधार पर ही संबंध बनाए थे। कानूनी कार्रवाई करके जांच के दौरान ही पता लगाया जा सकता है कि शादी करने का वादा शुरू से ही झूठा था या बाद में रिश्ते का भविष्य जानकर इरादा बदला गया। इसलिए कानूनी कार्रवाई को रोका नहीं जाना चाहिए। पुलिस की जांच की सच और झूठ का खुलासा कर पाएगी।

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दलीलें सुनने के बाद ये फैसला दिया गया

हाई कोर्ट के जस्टिस आशीष नैथानी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया कि महिला ने सहमति से संबंध बनाए तो शादी से इनकार किए जाने पर वह दूषित नहीं होगी। महिला को यह साबित करना होगा कि सूरज ने संबंध बनाने के लिए शादी का झूठा वादा किया। दोनों लंबे समय तक रिलेशन में रहे और कई बार संबंध बने तो यह दोनों की सहमति के बिना तो संभव नहीं हो सकता।

ऐसे में ठोस आधार के बिना सूरज के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उसका शोषण होगा, इसलिए हाई कोर्ट देहरादून के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में लंबित मामले और 22 जुलाई 2023 का पुलिस की ओर से दायर किए गए आरोप पत्र को रद्द करती है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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