बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपनी नाराजगी और दर्द खुलकर जाहिर किया. उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी के कुछ विधायक वोटिंग के वक्त गैर मौजूद नहीं रहते तो परिणाम अलग हो सकता था. तेजस्वी यादव ने चुनाव परिणाम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ये हार सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए भी चिंता का विषय है. उनका आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी और एनडीए ने चुनाव जीतने के लिए पैसे और सत्ता के दबाव का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी चीजें ठीक नहीं हैं और इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है.
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5 सीटों पर NDA की जीत
दरअसल, बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए ने सभी सीटों पर जीत दर्ज कर ली. इनमें रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा और बाकी उम्मीदवारों की जीत हुई, जिससे एनडीए ने राज्यसभा में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली. इस चुनाव में महागठबंधन की रणनीति को उस समय बड़ा झटका लगा जब कांग्रेस के तीन और आरजेडी का एक विधायक वोटिंग के दौरान अनुपस्थित हो गए. इन चार विधायकों के नहीं आने से विपक्ष का गणित पूरी तरह बिगड़ गया और एनडीए को बढ़त मिल गई. इसी वजह से आरजेडी अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने में सफल नहीं हो सकी. तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर ये विधायक मौजूद होते तो मुकाबला बराबरी का हो सकता था. उन्होंने ये भी कहा कि पार्टी इस पूरे मामले की समीक्षा करेगी और जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
संघर्ष जारी रहेगा- तेजस्वी
हालांकि, इस हार के बावजूद तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनावों में जनता सच्चाई समझेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष की ताकत बढ़ेगी. एनडीए पर निशाना साधते हुए तेजस्वी ने कहा कि सभी लोगों को पता है कि एजेंसियां कहां है, लेकिन चाहे जितनी भी संख्या होती विपक्ष बीजेपी से लड़ता और हमेशा अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे. तेजस्वी ने कहा कि एक दिन जरूर आएगा, जिस दिन विपक्ष कामयाब होगा. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने मशीन तंत्र का गलत इस्तेमाल कर किसी को डरा कर, किसी को खरीद कर जो राजनीति की परंपरा शुरू की है, उसका अंत जरूर होगा.
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